हम सब भी थे अकल के अंधे
कानून बदल वोटों की चोरी , चोरी नहीं डकैती है ;
बंद करो ये सीनाजोरी , पूरी तरह बकैती है ।
गुंडागर्दी करतीं सरकारें , कैसी अजीब स्थिति है ?
पूरा गुंडाराज चल रहा , लगता आपात – स्थिति है ।
लोकतंत्र ले रहा सिसकियां , लगता अंतिम-समय आ गया ;
कुछ दिन और रही ये सत्ता , तो भारत पूरी तरह मिट गया ।
मिटने वाला है देश हमारा , किसकी जिम्मेदारी है ?
धर्महीन – अज्ञानी हिंदू की , बहुत बड़ी भागीदारी है ।
पढ़े-लिखे तक महामूर्ख हैं , किसको हृदय-सम्राट बनाया ?
खुद ही मौत बुलायी अपनी , अब काहे को चिल्लाया ?
हम सब भी थे अकल के अंधे , किसको कांधे पर बैठाया ?
ज्यादातर हिंदू जाग चुका अब ,पर काफी हिंदू अब भी बौराया ।
जो जागे हैं सोतों को जगाओ , असलियत नेता की बताओ ;
भारत-वर्ष बचाना है तो , अब अच्छी-सरकार बनाओ ।
अच्छी-सरकार बनेगी कैसे ? चुनाव-आयोग की कसो लगाम ;
पूरी तरह बदलना होगा , ईवीएम का अब क्या काम ?
सरकारें ये नहीं करेंगीं , क्योंकि उनका ही षड्यंत्र ;
पूरी तरह अवैध – सरकारें , चुनाव – आयोग है उनका यंत्र ।
अब जनता ही आगे आये , सुप्रीम-कोर्ट खो रहा है साहस ;
अग्निवीर से सेना जर्जर , कौन करे गुंडो को वापस ?
अंतिम-आशा देश की जनता , चाहे तो अपना-देश बचा ले ;
वरना देश टूटना निश्चित , देश के कई-टुकड़े करवा ले ।
भविष्य-मालिका भविष्य का दर्शन,साफ-साफ सब दीख रहा है;
अच्छी-सरकार नहीं आयी तो , देश रक्त में डूब रहा है ।
धर्महीन-अज्ञानी हिंदू ! गाजर – मूली की तरह कटेगा ;
अब्बासी-हिंदू नेता की साजिश , महामूर्ख हिंदू ! न बचेगा ।
कैसे हिंदू को मूर्ख बनाया ? गंदी – शिक्षा झूठा – इतिहास ;
अब जब हिंदू ! जाग रहा है , बन रहा है इसके गले की फांस ।
हिंदू ! इसके गले में अटको , हिंदू ! तुम कहीं नहीं भटको ;
हिंदू को सदा यही भटकाता,अब तुम बिलकुल मत भटको ।
सौ में नब्बे हिंदू – बाबा , हिंदू को भटकाते हैं ;
अब्राहमिकों के ये दलाल हैं , कथा बीच नचवाते हैं ।
हिंदू – धर्म मिटा देने की , इन सबको मिली सुपारी है ;
चरित्रहीन सब महा – लालची , भ्रष्टाचार सवारी है ।
पूरी तरह होश में आओ , धर्म – सनातन में आओ ;
हिंदू ! करो युद्ध – तैयारी और अच्छी – सरकार बनाओ ।
“जय सनातन-धर्म”, रचनाकार : ब्रजेश सिंह सेंगर “विधिज्ञ”
