नई दिल्ली/भोपाल: मध्य प्रदेश के बहुचर्चित और देश के सबसे बड़े भर्ती घोटाले ‘व्यापमं’ (Vyapam) की फाइलें एक बार फिर खुल गई हैं। कल, 26 मार्च 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने एक बेहद महत्वपूर्ण सुनवाई के दौरान CBI (केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो) और मध्य प्रदेश सरकार को नोटिस जारी कर इस पूरे मामले की अब तक की प्रगति पर विस्तृत ‘स्टेटस रिपोर्ट’ तलब की है।
न्यायमूर्ति की पीठ ने व्हिसलब्लोअर और पूर्व विधायक पारस सकलेचा की याचिका पर सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि जांच की धीमी गति और ‘बड़ी मछलियों’ के बचने के आरोपों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
याचिका में गंभीर आरोप: क्या ‘रसूखदारों’ को बचाया गया?
याचिकाकर्ता पारस सकलेचा ने अदालत के समक्ष चौंकाने वाले तथ्य रखे हैं। याचिका में दावा किया गया है कि CBI ने उन मुख्य कड़ियों को छोड़ दिया है जो सीधे तत्कालीन सरकार के मंत्रियों और प्रभावशाली नौकरशाहों तक पहुँचती थीं।
चर्चित ‘एक्सेल शीट’ मामले में हार्ड डिस्क और पेन ड्राइव के डेटा के साथ संभावित छेड़छाड़ के आरोपों की नए सिरे से जांच की मांग की गई है।
अपात्रों की बहाली: आरोप है कि घोटाले के माध्यम से भर्ती हुए कई लोग आज भी महत्वपूर्ण सरकारी पदों पर आसीन हैं, जबकि योग्य उम्मीदवार सड़कों पर हैं।
सत्ता और संगठन के गलियारों में हलचल इस घोटाले की पृष्ठभूमि में भाजपा और संघ (RSS) के बड़े नेताओं के नाम समय-समय पर उछलते रहे हैं।
पूर्व शिक्षा मंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा की गिरफ्तारी और खनन माफिया सुधीर शर्मा की डायरियों में दर्ज ‘हवाई यात्राओं के खर्च’ और ‘सिफारिशी नामों’ ने तत्कालीन सत्ता के शीर्ष को हिलाकर रख दिया था।
कल की अदालती कार्यवाही के बाद राजनीतिक गलियारों में सुगबुगाहट तेज हो गई है। विपक्ष ने इसे “सत्य की जीत” बताया है, वहीं सरकार का कहना है कि वह कोर्ट के निर्देशों का पालन करेगी।
मौत का वो खौफनाक मंजर: 50 जानें और अनसुलझे सवाल?
व्यापमं केवल पैसों के लेन-देन का मामला नहीं था, बल्कि यह भारत का सबसे ‘खूनी’ घोटाला साबित हुआ था। एक के बाद एक 40 से 50 गवाहों और आरोपियों की संदिग्ध मौतें (जिनमें पत्रकार अक्षय सिंह और छात्रा नम्रता डामोर शामिल थीं) ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की जांच प्रणाली पर सवाल खड़े किए थे।
सुप्रीम कोर्ट ने अब यह संकेत दिया है कि वह इन मौतों के पीछे के ‘पैटर्न’ और जांच की निष्पक्षता की दोबारा समीक्षा कर सकता है।
व्हिसलब्लोअर्स की उम्मीदें फिर जगीं
इस लड़ाई को अपने कंधों पर ढोने वाले डॉ. आनंद राय और आशीष चतुर्वेदी जैसे योद्धाओं के लिए यह आदेश एक बड़ी नैतिक जीत है। आशीष चतुर्वेदी, जिन्होंने 15 से ज्यादा जानलेवा हमले झेलने के बाद भी हार नहीं मानी, ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि “न्याय की चक्की धीरे चलती है, पर पीसती बहुत बारीक है।”
India Speak Daily का विश्लेषण: क्या होगा अगला कदम?
सुप्रीम कोर्ट ने सरकार और CBI को जवाब देने के लिए मात्र 14 दिनों का समय दिया है।
SIT का पुनर्गठन? यदि CBI की रिपोर्ट संतोषजनक नहीं पाई गई, तो कोर्ट मामले की निगरानी के लिए एक स्वतंत्र विशेष जांच दल (SIT) बना सकता है।
नई गिरफ्तारियां? जांच का दायरा बढ़ने पर कुछ पुराने और रसूखदार नाम दोबारा सलाखों के पीछे पहुँच सकते हैं।
व्यापमं का यह मामला केवल एक कानूनी लड़ाई नहीं है, बल्कि यह उन हजारों युवाओं के भरोसे की परीक्षा है जिन्होंने अपनी मेधा को भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ते देखा है। India Speak Daily इस मामले की हर अपडेट पर अपनी पैनी नजर बनाए रखेगा।
रिपोर्ट: ब्यूरो चीफ, India Speak Daily
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