– के. पी. मलिक- बीजिंग में हुई शी जिनपिंग और डोनाल्ड ट्रंप की मुलाकात ने वैश्विक राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। जब शी जिनपिंग ने अमेरिका को “डिक्लाइनिंग नेशन” यानी पतनशील राष्ट्र बताया और ट्रंप ने जवाब में “100 परसेंट करेक्ट” कहकर सहमति जताई, तो यह सिर्फ एक कूटनीतिक टिप्पणी नहीं रही, बल्कि अमेरिका की आंतरिक राजनीतिक लड़ाई और वैश्विक शक्ति संघर्ष का बड़ा संकेत बन गई है।
ट्रंप का यह बयान दरअसल सीधे तौर पर जो बाईडेन प्रशासन पर हमला माना जा रहा है। ट्रंप यह संदेश देना चाहते हैं कि बाइडन के नेतृत्व में अमेरिका आर्थिक, सामरिक और वैश्विक प्रभाव के स्तर पर कमजोर हुआ है, जबकि चीन लगातार खुद को एक उभरती महाशक्ति के रूप में स्थापित कर रहा है। यही वजह है कि चीन की धरती से ट्रंप का यह बयान अमेरिकी चुनावी राजनीति में भी बड़ा मुद्दा बन सकता है।
इस पूरे घटनाक्रम के केंद्र में “Thucydides Trap” का सिद्धांत भी चर्चा में है। यह वह ऐतिहासिक अवधारणा है जिसमें कहा जाता है कि जब कोई उभरती शक्ति किसी स्थापित महाशक्ति को चुनौती देती है, तो टकराव लगभग तय हो जाता है। आज चीन और अमेरिका के बीच बढ़ती आर्थिक प्रतिस्पर्धा, ताइवान विवाद, इंडो-पैसिफिक में सैन्य तनाव और टेक्नोलॉजी वर्चस्व की लड़ाई उसी दिशा की ओर इशारा कर रहे हैं।
दरअसल, शी जिनपिंग का “Declining America” वाला बयान केवल राजनीतिक व्यंग्य नहीं, बल्कि चीन के बढ़ते आत्मविश्वास का सार्वजनिक प्रदर्शन माना जा रहा है। वहीं ट्रंप की सहमति ने यह साफ कर दिया कि अमेरिका के भीतर भी अब यह बहस गहरी हो चुकी है कि क्या देश वास्तव में अपनी वैश्विक पकड़ खो रहा है। दुनिया अब सिर्फ अमेरिका बनाम चीन की प्रतिस्पर्धा नहीं देख रही, बल्कि उस संभावित संघर्ष की आहट सुन रही है जो आने वाले वर्षों में वैश्विक शक्ति संतुलन को पूरी तरह बदल सकता है।
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