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India Speak Daily > Blog > समाचार > मुद्दा > इंदिरा को युद्ध का निर्णय लेने और उसे क्रियान्वित करने में नौ माह का वक्त लगा था! युद्ध टू मिनट नुडल नहीं, इसकी तैयारी में समय लगता है!
मुद्दा

इंदिरा को युद्ध का निर्णय लेने और उसे क्रियान्वित करने में नौ माह का वक्त लगा था! युद्ध टू मिनट नुडल नहीं, इसकी तैयारी में समय लगता है!

ISD News Network
Last updated: 2016/11/11 at 4:52 PM
By ISD News Network 303 Views 9 Min Read
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India Speaks Daily - ISD News
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मुख्यधारा की मीडिया से लेकर सोशल मीडिया तक टू मिनट नूडल्स विचारों की बाढ़ आई हुई है! लोग टू मिनट में नूडल्स पकाने की तरह पाकिस्तान से युद्ध चाहते हैं! कश्मीर के उरी में जिस तरह से पाकिस्तानी आतंकवादियों ने कायराना हमला कर हमारे 18 जवानों को मौत के घाट उतार दिया, उससे देश के एक-एक व्यक्ति के मन में गुस्सा है! गुस्सा मेरे भी मन में है, लेकिन मैं अपनी सरकार पर भरोसा करने के लिए तैयार हूं ताकि वह जब पाकिस्तान को जवाब देने के लिए कदम उठाए तो उसमें हड़बड़ी या जनता का दबाव नहीं, बल्कि एक कुशल रणनीति की झलक दिखे!

लोग चाहते हैं कि एक-दो दिन के अंदर भारतीय सेना पाकिस्तान का धावा बोल दे और उसे नेस्तनाबूत कर दे! भारतीय सेना में इसकी क्षमता है और वह कर भी सकती है, लेकिन उसे बिना तैयारी के हमले के लिए युद्ध में उतार देने की नसीहत देने वालों को यह सोचना चाहिए कि दुनिया की कोई भी लड़ाई बिना तैयारी के नहीं लड़ी गई है! एक छोटे से इराक को मसलने के लिए भी अमेरिका को वर्षों इसके लिए तैयारी करनी पड़ी थी! बिना तैयारी के अमेरिका ने वियतनाम को, सोवियत संघ ने अफगानिस्तान को और भारत ने श्रीलंका के अतिवादी संगठन लिट्टे को कम आंकने की भूल की थी, परिणाम क्या निकला, यह टू मिनट नुडल्स की तरह बेचैन लोग गूगल करके पता कर सकते हैं!

भारतीय सेना और सरकार पाकिस्तान को तबाह करने और उसके परमाणु बम की काट को ढूंढ कर उसकी सारी हेकड़ी हवा करने पर काम कर रही है! इसके लिए वह अपने हिसाब से वक्त और जगह तय करेगी। उसे इससे कोई मतलब नहीं है कि मीडिया और सोशल मीडिया के बयानवीर क्या सोच रहे हैं!

भारत की अब तक की सबसे बड़ी सैन्य जीत 1971 में पाकिस्तान पर जीत को माना जाता है, जिसमें भारत ने पाकिस्तान को दो टुकड़ों में बांटकर एक नए बंगलादेश का निर्माण कराया था। इस लिहाज से तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को देश का सबसे सफल प्रधानमंत्री माना जाता है! इंदिरा गांधी ने भारतीय सेना को ऑपरेशन ‘कैक्टस लिली‘ चलाने की इजाजत फरवरी 1971 में दी थी! अर्थात तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने तब के सैन्य प्रमुख मानेकशॉ को बुलाकर फरवरी में पूर्वी पाकिस्तान पर हमला करने को कहा था और तब ऑपरेशन ‘कैक्टस लिली’ की रूपरेखा बनी थी, जिसे क्रियान्वित नवंबर में जाकर किया गया! मानेकशॉ ने इंदिरा गांधी से कहा था कि भारतीय सेना पाकिस्तानी सैनिकों को कुचलने में सक्षम है, इसके बावजूद उसे वक्त चाहिए ताकि हर तरह के सैन्य उपकरण, साजो-समान और रणनीति से खुद को और अधिक सक्षम बना लिया जाए और इंदिरा गांधी ने इसे माना, जिसके कारण इतना बड़ा परिणाम निकला!

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भारत में बंगलादेशी शरणार्थियों की बढ़ती जा रही बाढ़ से प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी परेशान थी और वह अब किसी भी कीमत पर युद्ध के लिए और अधिक रुकने को तैयार नहीं थीं। लेकिन वह रुकीं! क्योंकि युद्ध के मैदान में तो सेना को ही जाना था न कि नेताओं को! इसलिए उन्हें सेना को वक्त देना पड़ा ताकि वह पूरी तरह से तैयार हो जाए!

सेना ने फरवरी से लेकर नवंबर 1971 तक अपने आप को पूरी तरह से सक्षम बनाया और जब वह पूरी तरह से तैयार हो गई तब इसकी जानकारी इंदिरा गांधी को दी। सेना से हरी झंडी मिलते ही नवंबर 1971 में इंदिरा ने चढ़ाई का आदेश दे दिया। नवंबर में युद्ध शुरु हुआ और 16 दिसंबर को समाप्त हो गया। यह भारतीय सेना की तैयारी का ही नतीजा था कि इतने कम समय में हमें जीत मिली, कम से कम भारतीय सैनिक हताहत हुए और कुशल रणनीति के कारण 90 हजार पाक सैनिकों को आत्मसमर्पण करने के लिए बाध्य होना पड़ा। उसी उपलक्ष में 16 दिसंबर को विजय दिवस के रूप में मनाया जाता है।

यदि तब मुख्यधारा की मीडिया और सोशल मीडिया होता तो शायद प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी व भारतीय सेना को नौ महीने तैयारी का वक्त भी नहीं देता! युद्ध का उन्माद एक चीज है और संपूर्ण रणनीति बनाकर युद्ध में उतरना बिल्कुल दूसरी बात!

सम्बंधित खबर: पाकिस्तान से लड़ाई अवश्यंभावी है, लेकिन शास्त्री-इंदिरा की तरह जीत कर हारने की जगह, इस बार पहले पूरी विजय सुनिश्चित करनी होगी!

कश्मीर के उरी में हुए हमले के बाद भारत सरकार पाकिस्तान पर आर्थिक, रणनीतिक और सैन्य हमले की बड़ी तैयारी में जुटी है, लेकिन सोशल मीडिया और मुख्यधारा की मीडिया पर लोगों की बयानबाजी देखकर लगता है कि भारत बस बिना तैयारी युद्ध में आज और अभी कूद जाए! यह संभव नहीं है!
सरकार को यदि पॉपुलर स्टेप लेना होता और लोगों के गुस्से पर ही निर्णय करना होता तो मोदी सरकार अभी तक एलओसी पर फायरिंग का आदेश दे चुकी होती, जैसा कि हर बार होता है! इससे लोगांे का गुस्सा भी कम होता और सरकार भी सोचती कि चलो जान छूटी! लेकिन उरी के बेस कैंप पर 18 सितंबर को हमले के दो दिन बाद भी भारत सरकार की ओर से रणनीतियों के लिए हो रही बैठकें और चुप्पी इस बात का संकेत है कि इस बार सरकार जो करने जा रही है वह पारंपरिक तरीकों से अलग हटकर है, जिसकी शायद उम्मीद कम ही लोगों ने की हो!

एक उदाहरण और देता हूं! 1959 से भारतीय सीमा में चीन की घुसपैठ जारी थी! रणनीति बनाने और चीन को घेरने के लिए सैन्य प्रमुख के साथ बैठक करने की जगह तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू अक्टूबर 1962 में श्रीलंका के लिए रवाना हो गए! हवाई अडडे पर पत्रकारों ने पूछा कि चीन घुसपैठ कर रहा है और आप श्रीलंका जा रहे हैं? जवाहरलाल नेहरू ने बयानबाजी करते हुए कह दिया- चीन को कड़ा जवाब देने का आदेश दे दिया गया है! बस क्या था चीन ने उसी समय अक्टूबर महीने में ही हमला कर दिया! भारत की सेना तैयार ही नहीं थी। सेना पांच दिन तक बिना कमांडर के लड़ी और ढेर हो गई!

यह अंतर था- पापा नेहरू और बेटी इंदिरा के बीच! नेहरू ने सैन्य तैयारियों पर ध्यान दिए बिना, पॉपुलर स्टेप उठाते हुए मीडिया में बयानबाजी कर दिया कि ‘चीन को कड़ा जवाब देने का आदेश दे दिया गया है।’ भारतीय सेना को तो कोई आदेश मिला ही नहीं था, अलबत्ता चीन जरूर सचेत हो गया और उसने तत्काल हमला कर दिया! परिणाम क्या निकला, यह कहने की जरूरत नहीं! वहीं दूसरी ओर 1971 में इंदिरा ने सेना को तैयारी के लिए नौ महीने का वक्त दिया और उसका परिणाम क्या निकला यह भी सामने है! तो अब मैं पूछना चाहता हूं टू मिनट नुडल्स की तरह बेचैन पत्रकारों व लोगों से कि आपको आगामी भारत-पाक युद्ध में किस तरह का परिणाम चाहिए- 1962 वाला या फिर 1971 वाला!

मोदी सरकार ने पाकिस्तान को कूटनीति व अर्थनीति से लेकर युद्धनीति तक के मोर्चे पर ढेर करने के लिए योजनाओं को आकार देना शुरु कर दिया है! यदि सब्र हैं तो थोड़ा इंतजार करें, अन्यथा अपनी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को इसी तरह बहने दें! सरकार और सेना तो पूरी तैयारी के बाद ही कूदेगी और जरूर कूदेगी, इसका कम से कम मुझे तो भरोसा है!

1: सम्बंधित ख़बर: अभी सेना ने ही सरकार को पाकिस्तान पर सीधे हमले से बचने का सुझाव दिया है! जाड़े के बाद हो सकती है पाकिस्तान पर सीधी कार्रवाई!

2: पाकिस्तान को सबक मिलना तय है, क्योंकि मोदी सरकार की पाकिस्तान नीति चार चरणों में बंटी है, जिसमें पीओके को भारत में मिलाना भी शामिल है!

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TAGGED: Foreign policy of Narendra Modi, india pakistan, Terror attack on kashmir
ISD News Network September 20, 2016
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