- अमेरिकी विदेश मंत्री और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार मार्को एंटोनियो रुबियो ने 14 फरवरी 2026 को म्यूनिख सिक्योरिटी कॉन्फ्रेंस में एक घोषणा की थी। इस कार्यक्रम में भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर भी शामिल हुए थे।
- मार्को रुबियो का कहना था- सेकंड वर्ल्ड वॉर से पहले तक West-मिशनरी, पिलग्रिम्स, ट्रैवलर्स और सैनिकों के जरिए नए-नए इलाके खोजता था और बड़े-बड़े साम्राज्य बनाए, लेकिन बाद में West सिकुड़ने लगा
- मार्को रुबियो का कहना था कि उन्होंने उपनिवेशवाद का सपना छोड़ा नहीं है और डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में हम इस सपने को पूरा करने जा रहे हैं। मार्को रुबियो जब यह कह रहे थे तो विदेश मंत्री एस. जयशंकर ये सब सुन रहे थे, लेकिन उन्होंने इसपर एक शब्द नहीं बोला
- भारत में हुए AI Impact Summit 2026 में भी Senior White House Policy Advisor श्रीराम कृष्णन ने कहा- डेटा और बाजार भारत का होगा, लेकिन AI का इन्फ्रास्ट्रक्चर अमेरिका का होगा- यानी ये डेटा की गुलामी का उदाहरण था. यदि इसी साल फरवरी में हुए भारत-अमेरिका ‘ट्रेड डील’ को देखें तो उसमें भी डाटा पर अमेरिकी प्रभुत्व को भारत ने स्वीकार किया है।
- कल 5 मार्च को दिल्ली में आयोजित Raisina Dialogue 2026 में US के डिप्टी सेक्रेटरी ऑफ़ स्टेट क्रिस्टोफर लैंडौ कहते हैं:-
“US भारत को वैसे इकोनॉमिक फ़ायदे नहीं देगा जैसे उसने चीन को दिए थे, US भारत को अपना कॉम्पिटिटर नहीं बनने देगा, ट्रेड डील में अमेरिकियों को पहले रखा जाएगा।”
उन्होंने यह बयान भारत में, भारत की ज़मीन पर दिया। Raisina Dialogue 2026 में भारत के विदेश मंत्री और प्रधानमंत्री भी शामिल हुए थे।
- अमेरिका के ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने आज कहा, ग्लोबल मार्केट में तेल का फ्लो जारी रखने के लिए, ट्रेजरी डिपार्टमेंट इंडियन रिफाइनर को रशियन तेल खरीदने की इजाज़त देने के लिए 30-दिन की टेम्पररी छूट दे रहा है।
यह जानबूझकर किया गया शॉर्ट-टर्म तरीका रशियन सरकार को कोई खास फाइनेंशियल फायदा नहीं पहुंचाएगा क्योंकि यह सिर्फ उन ट्रांजैक्शन को मंज़ूरी देता है जिनमें पहले से समुद्र में फंसा तेल शामिल है।
इंडिया यूनाइटेड स्टेट्स का एक ज़रूरी पार्टनर है, और हमें पूरी उम्मीद है कि नई दिल्ली U.S. तेल की खरीद बढ़ाएगी।
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