संदीप देव। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ट्रूथ सोशल पर खुद को ईसा मसीह के रूप में प्रोजेक्ट करते हुए एक फोटो डाला है। डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान से जंग के बीच ट्रुथ सोशल पर खुद को ईसा मसीह के रूप में दर्शाते हुए एक तस्वीर पोस्ट की है। ईरान-अमेरिका युद्ध में हुए ‘अल्पविराम’ के बीच ट्रंप ने यह फोटो जारी किया है। यह तस्वीर AI से बनी दिखती है जिसमें ट्रंप एक अस्वस्थ्य दिख रहे शख्स को चमत्कारी आशीर्वाद देते दिख रहे हैं। बैकग्राउंड में अमेरिका का झंडा है, कई अमेरिकी सैनिक फरिश्ते से दिख रहे हैं और फाइटर जेट उड़ते दिख रहे हैं।

मनोविज्ञान में इसे ‘नारसिस्टिक पर्सनैलिटी डिसऑर्डर कहते हैं। मनोवैज्ञानिकों के अनुसार नार्सिसिस्टिक पर्सनैलिटी डिसऑर्डर (NPD) एक मानसिक स्वास्थ्य स्थिति है, जिसकी पहचान खुद को बहुत ज़्यादा अहमियत देना, दूसरों से तारीफ़ की गहरी चाहत रखना और दूसरों की भावनाओं को न समझना (empathy की कमी) है। इसके लक्षणों में घमंड, खुद को खास समझना, दूसरों को अपने हिसाब से चलाना और अपनी इज़्ज़त को लेकर बहुत ज़्यादा संवेदनशील होना शामिल है। इसमें दूसरों पर कंट्रोल करना, अपनी गलती का इल्ज़ाम दूसरों पर डालना और भावनात्मक रूप से दूसरों को नज़रअंदाज़ करना शामिल है।
हिंदी में इसे ‘आत्ममुग्ध व्यक्तित्व विकार‘ कहते हैंं। यह एक गंभीर मानसिक स्वास्थ्य समस्या है जिसमें व्यक्ति स्वयं को अत्यधिक महत्वपूर्ण समझने लगता है। इस बीमारी के शिकार व्यक्ति अन्य लोगों का ध्यान पाने के लिए कुछ भी कर गुजरते हैं। वे चाहते हैं कि लोग उनकी हमेशा प्रशंसा करें। इस विकार से ग्रसित लोगों में दूसरों की भावनाओं को समझने या उनकी परवाह करने की क्षमता न के बराबर होती है।
इस मानसिक बीमारी के लक्षण क्या हैं?
अमेरिकन साइकियाट्रिक एसोसिएशन (APA) के अनुसार, किसी व्यक्ति में NPD है, इसका पता निम्नलिखित संकेतों से मिलता है:-
(क) अपनी उपलब्धियों या हुनर को बढ़ा-चढ़ाकर बताना।
(ख) असीमित ताकत, सफलता या सुंदरता की कल्पनाओं में खोए रहना।
(ग) यह मानना कि वे “खास” और दूसरों से बेहतर हैं।
(घ) दूसरों से बहुत ज़्यादा तारीफ़ की उम्मीद रखना।
(च) खुद को दूसरों से ज़्यादा समझदार समझना।
(छ) अपने मकसद को पूरा करने के लिए दूसरों का फ़ायदा उठाना।
(ज) दूसरों से जलन रखना या यह मानना कि दूसरे उनसे जलन रखते हैं।
NPD किस कारण होता है?
नार्सिसिस्टिक पर्सनैलिटी डिसऑर्डर (NPD) आनुवांशिक, पर्यावरणीय और न्यूरोबायोलॉजिकल कारकों की जटिल परस्पर क्रिया के कारण होता है। इसके मुख्य कारणों में बचपन के शुरुआती अनुभव शामिल हैं—जैसे कि अत्यधिक लाड़-प्यार या घोर उपेक्षा/दुर्व्यवहार, गलत पालन-पोषण और उच्च उपलब्धि पर ज़ोर देने वाले संस्थागत या सामाजिक दबाव के कारण यह बीमारी उम्र के किसी भी पड़ाव पर व्यक्ति में उत्पन्न हो सकता है।
सनातन धर्म में भी मिलते हैं इसके उदाहरण!
आधुनिक साइकोलॉजी जिसे नारसिस्टिक पर्सनैलिटी डिसऑर्डर (NPD) कहती है, सनातन पौराणिक इतिहास इसे ‘हिरण्यकशिपु इफेक्ट’ और ‘पौंड्रिक इफेक्ट’ कहता है। हिरण्यकशिपु और पौंड्रिक को यही बीमारी लगी थी और उन दोनों ने अपने आप को भगवान घोषित कर अपनी पूजा करवाने लगे थे। हिरण्यकशिपु का घमंड तो स्वयं उसके पुत्र प्रह्लाद ने ही तोड़ दिया था। पौंड्रिक ने स्वयं को वासुदेव घोषित करते हुए नारायण की तरह दिखने के लिए दो नकली हाथ भी लगा लिया था और उसमें सुदर्शन चक्र की भांति लोहे का एक भारी भरकम चक्र भी धारण कर लिया था। उसी रूप में वह दरबार में बैठता था!
भारत में भी एक नेता को भगवान विष्णु घोषित करने की चमचों में होड़ मची थी। भगवान श्रीराम को ऊंगली पकड़ कर चलाते हुए चमचों ने अपने नेता को प्रोजेक्ट किया था। इसका असर यह हुआ कि उस नेता ने खुद के मुंह से ही खुद को ‘नॉनबाइलॉजिकल’ अर्थात् ‘अजैविक’ घोषित कर दिया। उनके कहने का आशय था कि वह पृथ्वी पर अवतरित हुए हैं, न कि जन्म लिया है! हर युग में कुछ असुरों को यह बीमारी लग जाती है! फिर पभगवान ऐसे ‘नारसिस्टों’ को जमीन पर पटक कर उसे उसकी असली औकात दिखा देते हैं!
नोट:- पढ़िए कि आखिर कौन था नारसिसिस और उसकी क्या थी कहानी कि जिसके कारण आत्ममुग्धता की बीमारी का नाम ही नारसिस्टिक पर्सनैलिटी डिसऑर्डर (NPD) पड़ गया?
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इतनी महत्वपूर्ण और शोध परक जानकारी इतने सुन्दर और सरल रूप में मिलती है यहां,कि समय का ध्यान ही रहता। बहुत बहुत धन्यवाद श्वेता जी संदीप जी नमस्कार
Very rightly explained. Keep it up.