25 जनवरी को नर्मदा जन्मोत्सव के दिन द्वारका शारदा पीठ के जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती महाराज जबलपुर पहुंचे। यहां वे विभिन्न कार्यक्रमों में शामिल हुए।
उन्होंने दैनिक भास्कर के पत्रकार से बातचीत के दौरान कहा- ” 3 शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के समर्थन में हैं। प्रशासन उनका सर्टिफिकेट मांगने वाला कौन होता है। उसे कोई अधिकार नहीं। उन्होंने निर्दोष ब्राह्मणों के साथ जो निर्दयता से मारपीट की है। बेहद निंदनीय है” ।

पत्रकार : प्रयागराज में प्रशासन ने शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद से शंकराचार्य होने का प्रमाण मांगा है?
शंकराचार्य : प्रशासन शंकराचार्य से शंकराचार्य होने का प्रमाण नहीं मांग सकता। शंकराचार्य का शिष्य ही शंकराचार्य होता है। हमारे गुरु जी ने दो लोगों को ही संन्यास दिया। एक शिष्य हम हैं। दूसरे हैं अविमुक्तेश्वरानंद जी सरस्वती। इस तरह से वे शंकराचार्य जी के शिष्य हैं। शृंगेरी के शंकराचार्य जी ने उनका अभिषेक किया है। ये उत्तराधिकार परंपरा से आता है। ये हमारी शांकर परंपरा है। इसमें कोई दखलंदाजी नहीं कर सकता।
पत्रकार : प्रशासन ने 2 बार नोटिस जारी किए हैं?
शंकराचार्य: प्रशासन का यह काम नहीं है कि शंकराचार्य कौन है? कौन नहीं है, अगर प्रशासन यह काम करने लगेगा तो जितने नकली शंकराचार्य हैं और उन्होंने उन सभी को मेले में स्थान दिया है। वे सब उन्हें निरस्त करना चाहिए। वे कई लोगों को जगद्गुरु की उपाधि दे रहे हैं। शंकराचार्य की उपाधि दे रहे हैं। नकली शंकराचार्य बना रहे हैं। असली शंकराचार्यों का महत्व कम करने के लिए यह सब कर रहे हैं। इन सब पर रोक लगना चाहिए।
देश का कोई भी राजा हो जाए, उसे ये अधिकार नहीं है। शंकराचार्य का शिष्य ही शंकराचार्य होगा। हां, कोई भी शंकराचार्य न कहलवाए, इसलिए अन्य शंकराचार्यों का समर्थन जरूरी है।अविमुक्तेश्वरानंद को तीनों शंकराचार्यों का समर्थन हैं। शंकराचार्य की प्रामाणिकता की बात तो है ही नहीं, वे तो शंकराचार्य हैं ही। वहां प्रशासन से बड़ी चूक और नासमझी हो गई है। इसलिए प्रयागराज में विवाद बढ़ गया है। वहां बच्चों के साथ मारपीट न होती। आपके पास शासन है, प्रशासन है। इतना पुलिस बल है। छोटे-छोटे बच्चों को उठाते और उठाकर उन्हें उनके शिविर में छोड़ देते। ज्यादा से ज्यादा हिरासत में ले लेते। हमने देखा, उन्होंने उन बच्चों को इतना बुरा मारा है कि सोचा भी नहीं जा सकता।
