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ऐसा पहली बार हुआ जब शंकराचार्य को गंगा स्नाध किए बिना वापस लौटना पड़ा।

ISD News Network
Last updated: 2026/01/19 at 2:07 PM
By ISD News Network 32 Views 5 Min Read
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कल ज्योतिष्पीठाधीश्वर स्वामीश्री जगतगुरु अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी महाराज के साथ प्रयाग के माघ में उप्र पुलिस ने अभद्रता की। उनके डंडी संन्यासी शिष्यों की शिखा पकड़ कर घसीटा गया। ऐसा पहली बार हुआ जब शंकराचार्य को गंगा स्नाध किए बिना वापस लौटना पड़ा। इससे पूर्व ऐसी किसी घटना का जिक्र नहीं मिलता है।

इसके विरोध में शंकराचार्य जी इस कड़के की ठंड में रात भर धरने पर बैठे रहे। उन्हें बिना वर्दी के अज्ञात लोगों ने पालकी सहित उठाकर एक सुनसान जगह में जाकर छोड़ दिया। ऐसा माना जा रहा है कि पिछले साल कुंभ में मची भगदड़ में हिंदुओं की हुई मौत पर शंकराचार्य जी ने आहत होकर उप्र के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से जो इस्तीफा मांगा था, उसी का बदला इस बार योगी सरकार ने लिया है।

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी और उत्तर प्रदेश पुलिस प्रशासन के बीच माघ मेले में हुई घटना का विवरण कुछ इस प्रकार है:-

पूरा मामला क्या है?
यह घटना 18 जनवरी 2026 (मौनी अमावस्या) की है, जो माघ मेले का सबसे प्रमुख स्नान पर्व माना जाता है।

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    • घटनाक्रम: ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती अपने शिष्यों और काफिले के साथ संगम (त्रिवेणी) में स्नान के लिए जा रहे थे।
    • विवाद: पुलिस प्रशासन ने संगम नोज़ (Sangam Nose) के पास उनके वाहन/रथ को रोक दिया। पुलिस का कहना था कि भीड़ बहुत ज्यादा (करोड़ों में) होने के कारण उस क्षेत्र को ‘नो-व्हीकल ज़ोन’ (वाहन प्रतिबंधित क्षेत्र) बनाया गया है और उनसे पैदल आगे जाने का आग्रह किया गया।
    • आरोप: शंकराचार्य और उनके अनुयायियों का आरोप है कि पुलिस ने उनके साथ अभद्रता की और धक्का-मुक्की की। उनका कहना था कि प्रशासन ने परंपरा का अपमान किया है।
    • परिणाम: इस व्यवहार से आहत होकर शंकराचार्य ने स्नान करने से इनकार कर दिया और बिना संगम में डुबकी लगाए ही अपने शिविर (अखाड़े) में वापस लौट गए। उन्होंने इसे संतों का अपमान बताते हुए अन्न-जल त्यागने की भी बात कही।

    क्या इससे पहले ऐसी कोई घटना हुई है?
    आमतौर पर कुंभ या माघ मेलों में शंकराचार्यों और शीर्ष संतों के लिए प्रशासन विशेष व्यवस्था करता है और ऐसी घटनाएं अत्यंत दुर्लभ हैं।

      • इतिहास में संतों और प्रशासन के बीच सुविधाओं को लेकर मतभेद होते रहे हैं, लेकिन किसी शंकराचार्य का बिना स्नान किए मेले से वापस लौट जाना एक अभूतपूर्व और गंभीर घटना मानी जा रही है।
      • स्वयं शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने आरोप लगाया है कि मौजूदा सरकार के कार्यकाल में उनके साथ पहले भी ऐसा व्यवहार हुआ है, जिससे परंपराएं बाधित हुई हैं। हालांकि, सार्वजनिक पटल पर पुलिस द्वारा किसी शंकराचार्य के साथ ‘धक्का-मुक्की’ के ऐसे आरोप विरले ही सुनने को मिलते हैं।

      माघ मेले में नहाने की प्राचीन परंपरा क्या है?
      शंकराचार्यों और अखाड़ों के स्नान की परंपरा को ‘शाही स्नान’ (Royal Bath) कहा जाता है, जो माघ मेले और कुंभ का सबसे बड़ा आकर्षण होता है।

        • शोभायात्रा: शंकराचार्य और अखाड़ों के महामंडलेश्वर सोने-चांदी के हौदों, रथों या पालकियों में बैठकर गाजे-बाजे के साथ एक भव्य जुलूस (पेशवाई) के रूप में संगम तट पर पहुंचते हैं।
        • प्राथमिकता: परंपरा के अनुसार, सामान्य श्रद्धालुओं से पहले या विशेष निर्धारित समय पर संतों और शंकराचार्यों को संगम में स्नान करने का अधिकार होता है। प्रशासन उनके लिए घाट खाली करवाता है ताकि वे विधि-विधान से स्नान कर सकें।

        यह परंपरा कितनी पुरानी है?
        प्रयाग में कल्पवास और स्नान की परंपरा तो वैदिक काल (हजारों साल पुरानी) से चली आ रही है, लेकिन शंकराचार्यों और अखाड़ों के रूप में संगठित स्नान की परंपरा का श्रेय आदि गुरु शंकराचार्य को जाता है।

          • समयकाल: आदि शंकराचार्य का काल 8वीं शताब्दी (लगभग 788-820 ईसवी) माना जाता है।
          • इतिहास: उन्होंने ही हिंदू धर्म को संगठित करने के लिए चार पीठों और अखाड़ों की स्थापना की थी। अतः, शंकराचार्यों द्वारा शिष्यों के साथ संगठित रूप से मेले में आने और स्नान करने की यह परंपरा लगभग 1200 वर्ष से अधिक पुरानी मानी जा सकती है।
          • ऐतिहासिक दस्तावेजों (जैसे ह्वेन त्सांग के यात्रा वृत्तांत) में 7वीं शताब्दी में भी राजा हर्षवर्धन के समय प्रयाग में विशाल धार्मिक जमावड़े का उल्लेख मिलता है, जो इस परंपरा की प्राचीनता को सिद्ध करता है।

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          TAGGED: #shankaracharya, Kumbh, Kumbh Mela, prayagraj bhagdad, prayagraj kumbh, shankaracharya avimukteshwaranand saraswati
          ISD News Network January 19, 2026
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          ISD News Network
          Posted by ISD News Network
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