देशभक्त ये नहीं है नेता
तेजी से ढल रहा है सूरज , अंधियारा गहराता जाता ;
अब्बासी-हिंदू नेता की सत्ता, भारत खाई में गिरता जाता ।
चरित्रहीन मानव की बुद्धि , पूरी तरह भ्रष्ट हो जाती ;
सभी दांव पड़ते हैं उल्टे , सभी पोल खुलती जाती ।
क्या देशी – क्या नीति विदेशी ? पूरी तरह कबाड़ा है ;
सारे चौकीदार चोर हैं , पूरा चमन उजाड़ा है ।
व्यवस्थापिका , कार्यपालिका , न्यायपालिका, प्रेस-मीडिया ;
कर्तव्यों से विमुख हो चुके , उजड़ रही भारत की दुनिया ।
“भविष्य-मालिका” भविष्य का दर्शन ,यही दिखाई पड़ता है ;
हिंदू ! अब भी न जागा तो पूरा-भारत मिट जाता है ।
अग्निवीर से सेना जर्जर,युद्धक-सामग्री की कितनी किल्लत?
म्लेच्छ-देश जब करेंगे हमला , हाथ लगेगी केवल जिल्लत ।
देशभक्त ये नहीं है नेता , अब्बासी-हिंदू भारत का नेता ;
शैतानी उद्देश्य है इसका , भारतवर्ष नष्ट करता ।
इसका एजेंडा वोक-एजेंडा , फ्री-मेजन का पाप है ;
धर्महीन – अज्ञानी हिंदू ! मिटता अपने – आप है ।
जागो हिंदू ! अब तो जागो , अपना – धर्म बचाना है ;
अपने बच्चे-परिवार बचाओ , अपना – देश बचाना है ।
अज्ञान,स्वार्थ,भय,भ्रष्टाचार में,आखिर कब तक फंसे रहोगे ?
सच्चे – धर्म में कब लौटोगे ? कब अपने को मुक्त करोगे ?
हिंदू ! तुम आजाद नहीं हो , तुमको आजादी कहाॅं मिली ?
लोक-सेवक बन गये हैं मालिक , उनकी दासता तुम्हें मिली ।
जैसी करनी – वैसी भरनी , यही प्राकृतिक – न्याय है ;
धर्महीन – अज्ञानी हिंदू ! इस कारण अन्याय है ।
अब केवल सुप्रीम-कोर्ट ही , भारत-वर्ष बचा सकता है ;
निष्पक्ष-चुनाव करा सकता है , ईवीएम हटा सकता है ।
चुनाव-आयोग निष्पक्ष बनाओ , वही व्यवस्था ले आओ ;
पक्ष-विपक्ष व सीजेआई , निष्पक्ष चुनाव-आयोग बनाओ ।
भारतवर्ष बचाना है तो , निष्पक्ष चुनाव कराना है ;
अच्छी-सरकार तभी आयेगी , वरना भारत मिट जाना है ।
सुप्रीम-कोर्ट ढीले मत पड़ना , सख्त-फैसले लेना है ;
क्षण-क्षण मौका खिसक रहा है , बाद में फिर न आना है ।
जल्दी होगी शुरुआत तबाही , भारत पर हमला होना है ;
दिल्ली भी है प्रमुख निशाना , तब किसको बच पाना है ?
खुद भी बचो-भारत को बचाओ, अच्छी-सरकार बनाना है ;
और नहीं है मार्ग दूसरा , फौरन इस पर चल देना है ।
“जय सनातन-धर्म”, रचनाकार : ब्रजेश सिंह सेंगर “विधिज्ञ”
