एक नए राजनीतिक प्रयोग ने औपचारिक रूप से जन्म लिया। विजय ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली — लेकिन पूरा समारोह पारंपरिक भारतीय सत्ता-नाटकों से अलग दिखाई दिया। शपथ समारोह की शुरुआत पूरे वंदेमातरम से हुई। फिर राष्ट्रगान हुआ। और अंत में तमिलगान। यह पहली बार बताया जा रहा है कि किसी मुख्यमंत्री के शपथ ग्रहण में पूरा वंदेमातरम गाया गया।
दिलचस्प यह भी है कि एक दिन पहले बंगाल में ऐसा नहीं हुआ था। विजय के साथ 9 मंत्रियों ने भी शपथ ली। राहुल गांधी मंच पर उनके ठीक बगल में बैठे थे — यह दृश्य अपने आप में 2029 की राष्ट्रीय राजनीति का संकेत बन गया। लेकिन सबसे असामान्य क्षण उसके बाद आया।
राज्यपाल के जाने के तुरंत बाद विजय ने मंच पर ही तीन सरकारी दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए और अपने तीन चुनावी वादों को तत्काल लागू करने की घोषणा कर दी:
200 यूनिट मुफ्त बिजली। महिला सुरक्षा के लिए “Singa Penne” स्कीम। और Anti-Drugs Task Force। यह सिर्फ प्रशासनिक निर्णय नहीं था। यह एक राजनीतिक संदेश था — “मैं चुनाव जीतने नहीं, शासन करने आया हूँ।”
अपने भाषण में विजय ने कहा:
“A new era of real, secular, social justice starts now.”
उन्होंने मुस्लिम और ईसाई अल्पसंख्यकों को खुला आश्वासन दिया कि डरने की जरूरत नहीं है, सरकार सबकी होगी।
फिर उन्होंने वह पंक्ति कही जो शायद आने वाले वर्षों में बार-बार उद्धृत होगी:
“मैं आपकी तरह एक साधारण व्यक्ति हूँ। मैं लोगों को झूठे वादों से धोखा नहीं दूंगा। लोगों के पैसे का एक पैसा नहीं लूंगा। मेरे विधायक भ्रष्टाचार करने की हिम्मत नहीं करेंगे।”
भारतीय राजनीति में यह वाक्य अब इतना दुर्लभ हो चुका है कि सुनने में लगभग अवास्तविक लगता है। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि तमिलनाडु की आर्थिक स्थिति खराब है और सरकार श्वेत पत्र जारी करेगी।
यानी पहली बार किसी नए मुख्यमंत्री ने सत्ता संभालते ही “खजाना खाली मिला” वाला पारंपरिक रोना रोने के बजाय सार्वजनिक वित्तीय पारदर्शिता की बात की। और अंत में — भाषण के बाद विजय ने मंच पर मौजूद लोगों और राहुल गांधी के साथ खुद सेल्फी ली।
यह छोटी घटना नहीं थी। भारत की राजनीति दशकों तक “दूरी” पर टिकी रही — नेता ऊपर, जनता नीचे।
विजय उस दूरी को तोड़ते हुए दिखे। और शायद सबसे दिलचस्प बात यह रही कि उन्होंने पूरा चुनाव लगभग बिना इंटरव्यू, बिना टीवी डिबेट, बिना लगातार मीडिया बाइट्स के लड़ा। सोशल मीडिया, नियंत्रित संदेश और स्टार अपील के मिश्रण से। यह सिर्फ तमिलनाडु की जीत नहीं हो सकती। यह भारतीय राजनीति में “पोस्ट-टीवी पॉलिटिक्स” के नए युग की शुरुआत भी हो सकती है। ताकि सनद रहे।
साभार मूल लिंक
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