सुप्रीम-कोर्ट की कमजोरी से
शब्दकोष में शर्म नहीं है , लज्जा का कोई शब्द नहीं है ;
शर्मनिरपेक्ष देश का नेता , निर्लज्जता का प्रश्न नहीं है ।
बेशर्मी का विश्व-चैंपियन , कहीं भी कोई नहीं ठहरता ;
इसका हर-साथी भी इसी तरह है, सभी जगह दिखलाई देता ।
अब्बासी-हिंदू भारत का नेता,तन-मन-धन सब कुछ काला है ;
हुआ मानसिक-खतना इसका , बचपन से ही मतवाला है ।
भोग-विलास से भरा है जीवन , सीमाहीन अय्याशी है ;
देश के हित का काम न कोई , कितनी गंदी तानाशाही है ?
भारत का मक्कार-मीडिया , पत्रकारिता सब भूल चुका ;
अरबों-खरबों का विज्ञापन,चाटुकारिता में सब डूब चुका ।
केवल नेता का महिमा-मण्डन,प्रोपेगेण्डा सब उसी का करता ;
देश को सच्ची-खबर न देता , देशद्रोह ये सदा ही करता ।
नेता की जितनी बेईमानी है , प्रेस-मीडिया सदा साथ है ;
काले-कारनामें सब नेता करता , भारत हुआ अनाथ है ।
सभी कार्य हैं राष्ट्र-विरोधी , सारे अपराध हैं इसके नाम ;
कमजोर देश की न्यायपालिका,हो गया देश का काम-तमाम ।
सुप्रीम-कोर्ट की कमजोरी से , लोकतंत्र है खतरे में ;
संविधान की उड़ी धज्जियां , अस्तित्व देश का खतरे में ।
नेता का यही तो एजेण्डा है , भारत-वर्ष मिटाने का ;
अब्राहमिक – ग्लोबल – एजेण्डा , हिंदू – धर्म मिटाने का ।
देशभक्ति बिल्कुल भी नहीं है , चरित्र का पूर्ण-अभाव है ;
अय्याशी में पूरा डूबा है , फिर भी क्यों इसका भाव है ?
क्योंकि लगभग पूरा-भारत ही , अनाचार में डूब रहा है ;
स्वार्थ,लोभ,भय,भ्रष्टाचार के , गंदे-कीचड़ में कूद रहा है ।
क्योंकि हिंदू ! पाखण्ड में फंसकर ,धर्म-सनातन भूल रहा है ;
ऊपर से नेता के पाप का फंदा, जिसमें हिंदू झूल रहा है ।
देश के चारों-अंग हैं रोगी , ऐसी महामारी ये नेता ;
दुश्मन-देशों का ये दलाल है,अब्बासी-हिंदू भारत का नेता ।
धर्म का दुश्मन – देश का दुश्मन , भारत में आग लगा देगा ;
हिंदू ! अब भी न जागा तो , नेता देश मिटा देगा ।
ओ ! धर्महीन – अज्ञानी हिंदू , पूरी तरह मूर्खता छोड़ो ;
अनुसरण करो दक्षिण भारत का,उसी दिशा में भारत मोड़ो ।
शंकराचार्यों की शरण में आओ , गौ-गीता-गंगा की रक्षा ;
“ धर्मो रक्षति रक्षित : “ , तब ही पाओगे पूर्ण-सुरक्षा ।
वरना ये भारत नहीं बचेगा , गृहयुद्ध भयानक हो जायेगा ;
षड्यंत्र यही है इस नेता का , क्या पूरा हो जायेगा ?
“जय सनातन-धर्म”, ब्रजेश सिंह सेंगर “विधिज्ञ”,
