India Speak Daily Bureau। अमेरिका-ईरान-इजरायल युद्ध का 36 दिन हो चुका है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का दावा था कि यह युद्ध एक सप्ताह भी नहीं चलेगा। अमेरिका-इजरायल समर्थक और विशेषज्ञ भी यही मानकर चल रहे थे, परंतु जिस तरह से ईरान ने अमेरिका को नको चने चबवा दिया है, उससे ट्रंप गहरे धंसते नजर आ रहे हैं। वह अपनी खीझ में अपने अधिकारों को हटा रहे हैं।
पिछले 24 घंटों में, वियतनाम युद्ध के बाद से किसी एक दिन में सबसे ज़्यादा अमेरिकी विमान मार गिराए गए हैं। ईरान और उसके आस-पास के इलाके में तीन अमेरिकी विमानों के मार गिराए जाने की पुष्टि हुई है, और संभवतः चार विमानों को निशाना बनाया गया है। इतिहास में पहली बार, ईरान ने 24 घंटे से भी कम समय में अमेरिका के 4 सबसे महत्वपूर्ण विमानों को निशाना बनाने में सफलता हासिल की है। रिपोर्ट के अनुसार, ईरान ने इन विमानों को निशाना बनाया:-

🇺🇸 एक F-15 (ईरान के अंदर ही क्रैश हो गया)
🇺🇸 एक A-10 (हॉरमुज़ जलडमरूमध्य में क्रैश हो गया)
🇺🇸 एक ब्लैक हॉक हेलीकॉप्टर (निशाना लगने के बाद इराक में क्रैश/लैंड हो गया)
🇺🇸 एक F-16CJ (क्षतिग्रस्त हो गया और उसे आपातकालीन लैंडिंग करनी पड़ी)
पिछली बार अमेरिकी वायुसेना ने 24 घंटों में इतने ज़्यादा विमान 10 मई, 1972 को ‘ऑपरेशन लाइनबैकर” के दौरान वियतनाम में खोए थे, जब 11 विमान अमेरिकी विमान या तो मार गिराए गये थे या दुर्घटनाग्रस्त हो गए थे। न ‘डेज़र्ट स्टॉर्म’ के दौरान, न इराक में, और न ही अफगानिस्तान में, यह वियतनाम में हुआ था और अब ईरान में हो रहा है।
ईरान ने अमेरिकी वायुशक्ति इतना बुरा हाल कर दिया है कि अमेरिका सकते में है। ईरान में अमेरिकी पायलट की तलाश चल रही है। ईरान ने चेतावनी दी है कि अगर वॉशिंगटन उसके इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमला करता है, तो वह “इलाके में सभी अमेरिकी और ज़ायोनी एसेट्स को खत्म कर देगा”। ईरान ने खाड़ी देशों से अमेरिकी सैनिकों को निकालने की मांग कर दी है।
दूसरी ओर ईरान ने जॉर्डन, कुवैत, बहरीन पर अटैक कर दिया है। उसने यहां पर
तेल के बाद पानी और गैस के प्लांट पर वार कर दिया है। टेक कंपनी ओरैकल पर भी ईरान ने हमला किया है।
ईरान की सेना ने जॉर्डन-कुवैत और बहरीन में अमेरिकी ठिकानों पर ड्रोन अटैक किए है। ईरान की सरकारी टीवी से जुड़े एक लोकल चैनल ने शुक्रवार को दावा किया कि अमेरिका का एक फाइटर पायलट अपने विमान से बाहर कूदा और वो दक्षिण-पश्चिमी ईरान के इलाके में जाकर गिरा है। इससे पहले ईरान की ओर से दावा किया गया था कि पायलट को पकड़ लिया गया, हालांकि, बाद में इनाम की घोषणा की गई। अमेरिका की तरफ से दावा किया गया कि एक पायलट को बचा लिया गया जबकि दूसरे की तलाश जारी है।
इस बीच, ईरान ने भी रणनीति बदलते हुए सीधे जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर पानी और गैस प्लांट को निशाना बनाना शुरू कर दिया है। ताजा घटनाओं में कुवैत और अबू धाबी में बड़े हमलों की खबर सामने आई है, जिससे पूरे खाड़ी क्षेत्र में चिंता और तनाव बढ़ गया है। अबू धाबी में हबशन गैस फैसिलिटी के पास एयर डिफेंस सिस्टम द्वारा एक हमले को इंटरसेप्ट किया गया, लेकिन इसके बाद गिरे मलबे से आग लग गई। कुवैत में हालात ज्यादा गंभीर नजर आ रहे हैं। यहां एक बड़े वॉटर डिसेलिनेशन प्लांट पर ईरानी हमले की पुष्टि हुई है। इस हमले में प्लांट के कुछ हिस्सों को नुकसान पहुंचा है।
कुवैत के लिए यह बेहद अहम है क्योंकि देश की करीब 90 प्रतिशत पीने का पानी इन्हीं प्लांट्स से आता है। इससे साफ है कि इस तरह के हमले सीधे आम नागरिकों की जिंदगी को प्रभावित कर सकते हैं। इसके अलावा कुवैत के मीना अल-अहमदी ऑयल रिफाइनरी पर भी ड्रोन हमले किए गए, जिससे कई जगह आग लग गई। दमकल विभाग आग पर काबू पाने में जुटा है। खाड़ी क्षेत्र के अन्य देशों में भी खतरा बना हुआ है।
बहरीन में सायरन बजे, सऊदी अरब ने कई ड्रोन मार गिराने का दावा किया, जबकि यूएई में भी एयर डिफेंस सिस्टम सक्रिय किया गया। ईरान ने दावा किया है कि उसने अमेरिकी टेक कंपनी ओरैकल के UAE फैसिलिटी पर हमला कर दिया है, हालांकि UAE ने अब तक इस बात को कन्फर्म नहीं किया है कि ईरान ने ओरैकल के डेटा सेंटर पर अटैक किया है।
बताया जा रहा है कि ओरैकल का अमेरिका के डिपार्टमेंट ऑफ डिफेंस के साथ पार्टनर्शिप है। इतना ही नहीं, इस कंपनी के फाउंडर और चेयरमैन लैरी एलिसन के ईजाइली सरकार के साथ मजबूत संबंध हैं। इस वजह से ईरान इसे नैचुरल और वैलिड टार्गेट बताता है। हाल ही में ईरान ने बहरीन में ऐमेजॉन के AWS डेटा सेंटर को निशाना बनाया था। ईरान ने हाल ही में चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका और इजराइल अटैक बंद नहीं करते हैं तो वो अमेरिकी टेक कंपनियों पर अटैक करेगा। अब टेक इंफ्रास्ट्रक्चर भी इस जंग का हिस्सा बनता दिख रहा है। ईरान पहले ही साफ कर चुका है कि वह अमेरिकी टेक कंपनियों को वैलिड टारगेट मानता है।
ईरान की चेतावनी के बाद अमेरिकी कंपनी इंटेल ने ऑफिशियल स्टेटमेंट जारी किया है। कंपनी ने कहा है कि वो इस वॉर पर नजर बनाए हुई है और अपने कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित कर रही है। कंपनी की तरफ से कहा गया है कि कर्मचारियों की सेफ्टी उनकी फर्स्ट प्रायॉरिटी है।
ईरान ने इजरायल के शहर हाइफा पर बड़े हमले किए हैं। शुक्रवार को ईरान के मिसाइल हमले में उत्तरी इजरायल में स्थित हाइफा शहर में छह लोग घायल हो गए और कई घरों को नुकसान पहुंचा है। ईरान का यह हमला जहां हुआ है, वह इजरायल का ऑयल हब है जिससे नेतन्याहू सरकार की चिंताएं बढ़ गई हैं।
ईरान जिस स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर नाज करता है और जहां उसने टोल बूथ लगाया है, अब जंग वहीं पहुंच चुकी है। अमेरिका ने केशम आईलैंड पर बम बरसाए हैं। सैटेलाइट तस्वीरों से इस बात की पुष्टि हुई है कि अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद ईरान के केशम द्वीप पर बंदरगाह के बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा है।
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप लगातार ईरान को धमकी दे रहे हैं। ट्रंप ने कहा है कि अगर ईरान समझौता नहीं करता है तो ईरान के सभी बुनियादी ढांचे ध्वस्त कर दिए जाएंगे। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को कहा कि अमेरिका चाहे तो होर्मुज स्ट्रेट को खोल सकता है. ईरान का तेल ले सकता है।
ट्रंप ने कहा कि अगर अमेरिका को थोड़ा और समय मिले तो वो ये काम कर सकता है। उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा, “थोड़ा और समय मिले तो हम आसानी से होर्मुज स्ट्रेट खोल सकते हैं, तेल ले सकते हैं और बड़ा मुनाफा कमा सकते हैं. इससे दुनिया में तेल की नदियां बह जाएंगी।” हालांकि, अपने इस संदेश में ट्रंप ने यह साफ नहीं किया कि अमेरिका ईरान के होर्मुज स्ट्रेट पर नियंत्रण को कैसे खत्म कर सकता है या वो किस तेल की बात कर रहे हैं?

लेकिन माना जा रहा है कि वो ईरानी तेल को अपने कब्जे में लेने की ही बात कर रहे हैं क्योंकि वो पहले भी ईरानी तेल को अपने कब्जे में लेने की बात कर रहे थे। पिछले महीने के अंत में फाइनेंशियल टाइम्स को दिए एक इंटरव्यू में भी ट्रंप ने ईरान का तेल लेने की धमकी दी थी। उन्होंने कहा था कि ईरान का तेल उनकी पसंदीदा है। उन्होंने कहा था, “सच कहूं तो, मेरी सबसे पसंदीदा चीज ईरान का तेल लेना है. लेकिन अमेरिका में कुछ लोग कहते हैं कि आप ऐसा क्यों कर रहे हैं. वे लोग बेवकूफ हैं।” उन्होंने कहा कि अमेरिका ईरानी तेल निर्यात के मुख्य केंद्र खार्ग द्वीप पर कब्जा कर सकता है। ट्रंप ने इंटरव्यू के दौरान कहा, “हो सकता है कि हम खार्ग द्वीप कब्जा लें। हो सकता है कि नहीं लें। हमारे पास कई विकल्प हैं।”
ट्रंप ने कहा कि “अगर अमेरिका खार्ग द्वीप पर कब्जा करता है तो उसे वहां कुछ समय तक रहना पड़ सकता है।” उन्होंने आगे कहा, “मुझे नहीं लगता कि उनके (ईरान के) पास कोई खास सुरक्षा है. हम बहुत आसानी से खार्ग द्वीप ले सकते हैं।”
हालांकि बड़बोले ट्रंप के घर में मारामारी शुरू हो गई। ट्रंप को अपने ही अधिकारियों पर विश्वास नहीं रहा है। इसलिए अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक ही रात में अपनी सेना और सरकार के बड़े अधिकारियों को हटाकर पूरी दुनिया को चौंका दिया है। ट्रंप प्रशासन ने आर्मी चीफ जनरल रैंडी जॉर्ज को पद से हटाकर उन्हें तुरंत रिटायर होने का आदेश दे दिया है। चर्चा है कि एफबीआई डायरेक्टर काश पटेल और कई अन्य बड़े मंत्रियों पर भी जल्द ही एक्शन हो सकता है। माना जा रहा है कि युद्ध इच्छित सफलता न मिलने से ट्रंप बौखला उठे हैं।
असल में, ट्रंप के रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ अपनी टीम को बिल्कुल नए सिरे से तैयार करना चाहते हैं। उन्हें लगता है कि ट्रंप के मिशन को पूरा करने के लिए नए और भरोसेमंद लोगों की जरूरत है। इसी रणनीति के तहत पिछले एक साल में एक-दो नहीं, बल्कि सेना के एक दर्जन से ज्यादा बड़े जनरलों और एडमिरलों की छुट्टी की जा चुकी है। इस पूरी फेहरिस्त में आर्मी चीफ रैंडी जॉर्ज का जाना सबसे बड़ी खबर है, क्योंकि वे कोई साधारण अफसर नहीं हैं।
वेस्ट पॉइंट मिलिट्री एकेडमी से ग्रेजुएट जॉर्ज ने पहले खाड़ी युद्ध से लेकर इराक और अफगानिस्तान तक की भीषण जंगों में हिस्सा लिया है। उनके इसी लंबे अनुभव को देखते हुए 2023 में उन्हें सेना के सबसे ऊंचे पद पर बैठाया गया था। आर्मी चीफ बनने से पहले वे बाइडन सरकार में रक्षा सचिव के खास सलाहकार भी रह चुके हैं। यानी उनके पास युद्ध के मैदान से लेकर पेंटागन का दफ्तर चलाने तक का गहरा अनुभव है, लेकिन ट्रंप के नए एजेंडे में उनके लिए कोई जगह नहीं बची है।
अब पूरी दुनिया में यह सवाल उठ रहा है कि अगला नंबर किसका है? ‘द अटलांटिक’ की रिपोर्ट के मुताबिक, व्हाइट हाउस के अंदर इस बात की चर्चा बहुत तेज है कि एफबीआई के काश पटेल, आर्मी सेक्रेटरी डेनियल ड्रिस्कॉल और लेबर सेक्रेटरी को भी उनके पदों से हटाया जा सकता है। हालांकि, रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि राष्ट्रपति ट्रंप ने अभी इस पर अपना आखिरी फैसला नहीं सुनाया है और समय को लेकर अभी कुछ भी पक्का नहीं है, लेकिन अंदरखाने खलबली मची हुई है।
देखा जाए तो ट्रंप अपनी पूरी सुरक्षा टीम की सफाई कर रहे हैं। इससे पहले नौसेना और वायुसेना के सबसे बड़े अधिकारियों को भी हटाया जा चुका है। जानकारों का कहना है कि ट्रंप अपनी नेशनल सिक्योरिटी को लेकर एकदम अलग प्लानिंग कर रहे हैं और इसके लिए उन्हें पुरानी टीम के बजाए अपनी पसंद के लोग चाहिए। अब देखना होगा कि सेना में हुए इस बड़े फेरबदल का असर ईरान के साथ चल रहे युद्ध पर क्या पड़ता है?
