Ashish Saini राहुल गांधी को चिट्ठी लिखने वाले आदर्श कुमार गोयल की कहानी खत्म होने का नाम ही नहीं लेती। जितना लिखो, लिखते जाओ। यह देश के लोकतंत्र को बचाने के लिए अपना सब कुछ कुर्बान कर देने वाले नेता के अपमान के बाद फिर से सतह पर आ गई है।
आदर्श कुमार गोयल का क़िस्सा ग़ज़ब है। सीधे चलते हैं जून 2018 में जब सुप्रीम कोर्ट से रिटायर होने के तत्काल बाद केंद्र सरकार ने उन्हें एनजीटी का चेयरमैन बनाकर एक बड़ा उपहार दिया। लेकिन इतने उपहार से जज साहब का काम कैसे चलता?
सारी शर्मों हया को ताक पर रखकर भाजपा ने 6 जून 2018 को सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश पद से सेवानिवृत्त होने के कुछ ही घंटों बाद, न्यायमूर्ति आदर्श कुमार गोयल को राष्ट्रीय हरित अधिकरण का अध्यक्ष नियुक्त किया गया। लगभग उसी समय, हरियाणा में खट्टर सरकार ने उनके बेटे निखिल गोयल को 1.4 लाख रुपये के मासिक वेतन पर अतिरिक्त महाधिवक्ता नियुक्त करने का आदेश पारित कर दिया।

मुझे याद है अगले रोज़ ट्रिब्यून ने बड़ी बड़ी हेडिंग लगाई -“न्यायमूर्ति गोयल के बेटे को अतिरिक्त अटॉर्नी जनरल नियुक्त किया गया” यह कहानी यहीं खत्म नहीं होती। कई पूर्व नौकरशाह, कई पूर्व जज इस किस्से में शामिल हैं। पढ़ते रहिए, सोचते रहिए। क़िस्सा चिट्ठी का जारी है।

