सनातन धर्म शास्त्रों (वेद, पुराण, रामायण, महाभारत) में यह स्पष्ट रूप से कहा गया है कि शासक (राजा या नेता) के पाप, अधर्म या अन्याय का सीधा असर जनता और प्रकृति पर पड़ता है। जब शासक धर्म मार्ग से भटकता है, तो राज्य में अकाल, महामारी, प्राकृतिक आपदाएं और अशांति उत्पन्न होती है। ऐसे शासक के शासन में जनता दुख भोगती है।

यहाँ प्रमुख शास्त्रों से संदर्भ दिए जा रहे हैं:-
- महाभारत (शांतिपर्व)
महाभारत के शांतिपर्व में भीष्म पितामह युधिष्ठिर को राजधर्म समझाते हुए कहते हैं कि राजा ही समय का कारण है (राजा कालस्य कारणम्)।
संदर्भ: “राजा कृतयुगस्रष्टा त्रेताया द्वापरस्य च। युगस्य च चतुर्थस्य न च संशयः॥” (शांतिपर्व)
अर्थात, राजा ही कृतयुग, त्रेता, द्वापर और कलियुग का निर्माता है। यदि राजा अधर्मी है, तो जनता को कलियुग (दुःख) भोगना पड़ता है।
आपदा का कारण: जब राजा धर्म का पालन नहीं करता, तो पृथ्वी अन्न उपजाना बंद कर देती है, वर्षा नहीं होती, आसमान से अग्नि की वर्षा होती है और प्रजा को अकाल मृत्यु आदि सहित अनेक दुखों का सामना करना पड़ता है।

- रामायण (अयोध्याकाण्ड)
वाल्मीकि रामायण में स्पष्ट उल्लेख है कि राजा के चरित्र और कार्यों का राज्य की भौतिक स्थिति पर गहरा प्रभाव पड़ता है।
संदर्भ: जब राम वनवास जाते हैं और अयोध्या में राजा नहीं होता, तब ऋषि-मुनि कहते हैं कि “राजा विहीन देश में बादलों के गरजने पर भी वर्षा नहीं होती” और अधर्म बढ़ता है।
मूल भाव: दुष्ट राजा के राज्य में प्रजा को भूख, भय और प्राकृतिक प्रकोप का सामना करना पड़ता है।
- मनुस्मृति
मनुस्मृति के अनुसार, शासक का प्राथमिक कर्तव्य धर्म की रक्षा करना है। यदि वह ऐसा नहीं करता, तो उसे पाप लगता है।
संदर्भ: “राजा यदा धर्मं नानुतिष्ठति, तदा प्रजाः पीड्यन्ते।” (अर्थात, राजा जब धर्म का आचरण नहीं करता, तब प्रजा पीड़ित होती है)।
दंड: यदि राजा धर्मपरायण नहीं है, तो वह न केवल स्वयं पाप का भागीदार बनता है, बल्कि प्रजा के पापों का भी एक हिस्सा उसे भोगना पड़ता है।
- श्रीमद्भागवत महापुराण
भागवत पुराण में राजा वेन का उदाहरण मिलता है, जिसके कुशासन और अधर्म के कारण राज्य में हर तरफ चोरी, डकैती और अकाल जैसी स्थितियां उत्पन्न हो गई थीं। संतों ने उसे ‘पापी’ कहा, जिसके कारण पृथ्वी ने अन्न देना बंद कर दिया था।

निष्कर्ष:
शास्त्रों के अनुसार, राजा/शासक राज्य का आध्यात्मिक और भौतिक संरक्षक है।
*राजा धर्मपरायण = सुराज्य, सुख, समृद्धि, अच्छी वर्षा।
*राजा अधर्मी/पापी = कुराज्य, अकाल, महामारी, विभिन्न तरह के संकट, प्राकृतिक आपदा।
साभार।

शायद स्वतंत्रता के बाद का निकृष्टम शासक इस समय सत्ता में है।