By using this site, you agree to the Privacy Policy and Terms of Use.
Accept
India Speak DailyIndia Speak Daily
  • समाचार
    • देश
    • विदेश
    • मुद्दा
    • न्यायपालिका
    • अपराध
    • भ्रष्टाचार
    • जन समस्या
    • Events and Activities
    • Health Report
    • ISD Radio
    • ISD videos
    • English content
  • मीडिया
    • खोजी आलेख
    • मेनस्ट्रीम जर्नलिज्म
    • डिजिटल मीडिया
    • फिफ्थ कॉलम
    • फेक न्यूज भंडाफोड़
    • कानाफूसी
  • वैचारिकी
    • संघवाद
    • अस्मितावाद
    • जातिवाद
    • पंचमक्कारवाद
    • व्यक्तिवाद
    • समाजशास्त्र
    • राजनीतिक व्यक्तित्व
    • संपादकीय
  • इतिहास
    • स्वर्णिम भारत
    • गुलाम भारत
    • आजाद भारत
    • विश्व इतिहास
    • अनोखा इतिहास
  • धर्म
    • सनातन हिंदू धर्म
    • दर्शन और संप्रदाय
    • वास्तु एवं ज्योतिष
    • अब्राहमिक मजहब
    • उपदेश एवं उपदेशक
  • ब्लॉग
    • मूवी ज़ोन
    • भाषा और साहित्य
    • स्वयंसेवी प्रयास
    • कुछ नया
    • पर्यटन
    • नारी जगत
    • पुस्तकें
    • प्रेरक व्यक्तित्व
    • AI | Tech & Careers
    • SDEO’s Story
    • Sponsored Post
  • Members Only
  • JOIN US / LOGIN
Reading: न्याय का रोस्टर, रसूख का चक्रव्यूह: जब जज के बेटे के मुवक्किल बने मुख्य चुनाव आयुक्त!
Share
Notification
Latest News
उप्र के सभी 403 सीटों पर चुनाव लड़ेगी नागेश्वर राव की पार्टी!
Events and Activities
न्यायपालिका में बंद दरवाजों के बीच चल रही सौदेबाजी पर एक न्यायाधीश का विस्फोट!
न्यायपालिका संपादकीय
चुनावी मशीनरी पर संस्थागत कब्जे की नई ‘क्रोनोलॉजी’: कहीं भाई स्पीकर, कहीं पिता भाजपा प्रदेश अध्यक्ष—चुनावी कुर्सियों पर ‘हितों के टकराव’ का खतरनाक राष्ट्रीय सिंडिकेट!
खोजी आलेख
आखिर इतनी डरी हुई क्यों है सरकार? #ISD Live Video
ISD videos
मोदी सरकार की ‘झुकती रीढ़’ और एलन मस्क का दुस्साहस! जब मोदी सरकार ने मस्क के लिए बदला कानून, तो मस्क ने शुरू की ब्लैकमेलिंग!
खोजी आलेख
Aa
Aa
India Speak DailyIndia Speak Daily
  • ISD Radio
  • ISD Videos
  • JOIN US / LOGIN
  • समाचार
    • देश
    • विदेश
    • मुद्दा
    • न्यायपालिका
    • अपराध
    • भ्रष्टाचार
    • जन समस्या
    • Events and Activities
    • Health Report
    • ISD Radio
    • ISD videos
    • English content
  • मीडिया
    • खोजी आलेख
    • मेनस्ट्रीम जर्नलिज्म
    • डिजिटल मीडिया
    • फिफ्थ कॉलम
    • फेक न्यूज भंडाफोड़
    • कानाफूसी
  • वैचारिकी
    • संघवाद
    • अस्मितावाद
    • जातिवाद
    • पंचमक्कारवाद
    • व्यक्तिवाद
    • समाजशास्त्र
    • राजनीतिक व्यक्तित्व
    • संपादकीय
  • इतिहास
    • स्वर्णिम भारत
    • गुलाम भारत
    • आजाद भारत
    • विश्व इतिहास
    • अनोखा इतिहास
  • धर्म
    • सनातन हिंदू धर्म
    • दर्शन और संप्रदाय
    • वास्तु एवं ज्योतिष
    • अब्राहमिक मजहब
    • उपदेश एवं उपदेशक
  • ब्लॉग
    • मूवी ज़ोन
    • भाषा और साहित्य
    • स्वयंसेवी प्रयास
    • कुछ नया
    • पर्यटन
    • नारी जगत
    • पुस्तकें
    • प्रेरक व्यक्तित्व
    • AI | Tech & Careers
    • SDEO’s Story
    • Sponsored Post
  • Members Only
  • JOIN US / LOGIN
Have an existing account? Sign In
Follow US
  • Website Design & Developed By: WebNet Creatives
© 2022 Foxiz News Network. Ruby Design Company. All Rights Reserved.
India Speak Daily > समाचार > न्यायपालिका > न्याय का रोस्टर, रसूख का चक्रव्यूह: जब जज के बेटे के मुवक्किल बने मुख्य चुनाव आयुक्त!
न्यायपालिकासंपादकीय

न्याय का रोस्टर, रसूख का चक्रव्यूह: जब जज के बेटे के मुवक्किल बने मुख्य चुनाव आयुक्त!

ISD News Network
By ISD News Network 9 Min Read
Share
9 Min Read
SHARE

इंडिया स्पीक डेली संपादकीय। विधि शास्त्र का सबसे अटल सिद्धांत है कि न्याय केवल होना ही नहीं चाहिए, बल्कि होते हुए दिखना भी चाहिए। लेकिन जब देश की सर्वोच्च अदालत से प्रक्रियागत मर्यादाएं तार-तार होने लगें, तय रोस्टर को धता बताकर मुकदमे खास पीठों को सौंपे जाने लगें, सुनवाई के दौरान जनता की आवाज (ऑडियो) बंद कर दी जाए और फैसलों के पीछे हितों के प्रत्यक्ष टकराव (Conflict of Interest) की बदबू आने लगे, तो लोकतंत्र का सबसे सुरक्षित माना जाने वाला दुर्ग दरकने लगता है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की आईएएस बेटी मेधा रूपम को सुप्रीम कोर्ट से मिली त्वरित राहत कोई सामान्य न्यायिक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि सत्ता, रसूख और न्यायपालिका के भीतर गहरी पैठ बना चुके संस्थागत गठजोड़ का खुला दस्तावेज है।

इस समूचे शर्मनाक घटनाक्रम के एक-एक तथ्य को बिंदुवार समझना आवश्यक है, ताकि देश जान सके कि संविधान की रक्षा का दम भरने वाली चौखट के भीतर क्या खेल हुआ है:

*विवाद की जड़ (छात्रा पर मनमाना रासुका): नोएडा में श्रमिकों के लोकतांत्रिक प्रदर्शन में शामिल होने पर दिल्ली विश्वविद्यालय की 25 वर्षीय छात्रा आकृति चौधरी को पुलिस ने जेल भेज दिया था। इसके बाद गौतम बुद्ध नगर की तत्कालीन डीएम मेधा रूपम ने पद का दुरुपयोग करते हुए छात्रा पर कड़ा राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका/NSA) ठोंक दिया, जिसके चलते वह 5 महीने जेल में सड़ती रही।

*इलाहाबाद हाईकोर्ट का चाबुक: इलाहाबाद हाईकोर्ट (जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस अचल सचदेवा की खंडपीठ) ने डीएम की इस कार्रवाई को घोर अवैध करार देते हुए कहा कि नौकरशाही का यह तानाशाही रवैया उत्तर प्रदेश को ‘ऑर्वेलियन डिस्टोपिया’ बना रहा है। अदालत ने आकृति चौधरी की रिहाई का आदेश देते हुए डीएम मेधा रूपम के व्यक्तिगत वेतन से ₹5 लाख हर्जाना वसूलने और उनकी सर्विस बुक पर सख्त प्रतिकूल टिप्पणी दर्ज करने का ऐतिहासिक आदेश दिया।

More Read

न्यायपालिका में बंद दरवाजों के बीच चल रही सौदेबाजी पर एक न्यायाधीश का विस्फोट!
चुनावी मशीनरी पर संस्थागत कब्जे की नई ‘क्रोनोलॉजी’: कहीं भाई स्पीकर, कहीं पिता भाजपा प्रदेश अध्यक्ष—चुनावी कुर्सियों पर ‘हितों के टकराव’ का खतरनाक राष्ट्रीय सिंडिकेट!
देश में दूसरा आपातकाल! आखिर इतनी डरी हुई क्यों है सरकार?
‘अमेरिका फर्स्ट’ की वेदी पर भारतीय मेधा: निलंबन, मानवीय संकट और भारत की रणनीतिक विफलता

रोस्टर की धज्जियां उड़ाकर पीठ-परिवर्तन: हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ डीएम मेधा रूपम सुप्रीम कोर्ट पहुँचीं। सुप्रीम कोर्ट के 13 जुलाई के आधिकारिक रोस्टर के अनुसार निवारक नजरबंदी (NSA) से जुड़ा यह मामला जस्टिस बी.वी. नागरत्ना की पीठ के समक्ष जाना तय था। लेकिन मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत के रोस्टर विशेषाधिकार के तहत इसे अंतिम क्षणों में बिना क्रम (out-of-turn) अचानक जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा और जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह की पीठ में भेज दिया गया।

सुप्रीम कोर्ट के 13 जुलाई से प्रभावी रोस्टर व्यवस्था के अनुसार, ज्ञानेश कुमार की बेटी और गौतम बुद्ध नगर की डीएम मेधा रूपम पर लगे जुर्माने से जुड़ा मामला जस्टिस बी.वी. नागरत्ना की पीठ के समक्ष सुनवाई हेतु जाना था।

लेकिन ठीक अंतिम क्षण में इस मामले को जस्टिस एस.सी. शर्मा और एन.के.… pic.twitter.com/XUOOjctqVS

— Ravindra Singh Sheoran (@TellingRavindra) September 24, 2026

*रहस्यमयी तरीके से ऑडियो बंद (म्यूट) होना: जब जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने मामले की सुनवाई शुरू की, तो सुप्रीम कोर्ट की खुली अदालत (Open Court) की परंपरा और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के ऑडियो को पूरी तरह ‘स्विच ऑफ’ (म्यूट) कर दिया गया। पत्रकार, वकील और आम जनता यह नहीं सुन सके कि अदालत के भीतर क्या दलीलें दी गईं, और बिना किसी स्पष्टीकरण के पीठ ने हाईकोर्ट के जुर्माने और टिप्पणियों पर फौरन रोक (स्टे) लगा दी।

*जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा के बेटे का खुलासा और ECI कनेक्शन: इस मामले का सबसे विस्फोटक और अनैतिक पहलू यह सामने आया कि जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा के बड़े बेटे सिद्धार्थ शर्मा (जिन्होंने 2017 में वकालत शुरू की) सीधे भारत के चुनाव आयोग (ECI) के मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में स्टैंडिंग काउंसिल (सरकारी वकील) हैं! यानी जिस आयोग के सर्वेसर्वा मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार हैं, उसी आयोग से जज के बेटे की वकालत और आजीविका जुड़ी है।

Propriety Questions Emerge As Son Of Justice SC Sharma, Who Heard ECI & Medha Ropam Cases, Is Election Commission's Lawyer |@manuvichar https://t.co/YuzFUdBTCl

— Live Law (@LiveLawIndia) September 25, 2026

*बेटों के पास मलाईदार सरकारी वकील पैनल: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार, जस्टिस शर्मा के बेटे सिद्धार्थ शर्मा केवल चुनाव आयोग ही नहीं, बल्कि केंद्र सरकार के सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेज (CBDT), आयकर विभाग (Income Tax) और कस्टम्स एवं एक्साइज के मुख्य पैनल्स पर काबिज हैं। यही नहीं, जस्टिस शर्मा के छोटे बेटे भी मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) के स्टैंडिंग काउंसिल बनाए गए हैं।

*उसी दिन चुनाव आयुक्त कानून पर खंडित फैसला: जिस दिन ज्ञानेश कुमार की बेटी को स्टे दिया गया, ठीक उसी दिन 2023 के विवादास्पद मुख्य चुनाव आयुक्त नियुक्ति कानून (जिसमें सीजेआई को चयन समिति से बाहर कर सरकार ने दो-तिहाई बहुमत अपने हाथ में ले लिया) पर जस्टिस शर्मा की पीठ का फैसला आया। पीठ के दूसरे जज जस्टिस दीपांकर दत्ता इस पर अंतिम फैसला देना चाहते थे, लेकिन जस्टिस शर्मा ने असहमति जताते हुए मामले को बड़ी संविधान पीठ को भेजने की राय देकर इसे वर्षों के लिए ठंडे बस्ते में डलवा दिया—जिससे सीधे तौर पर ज्ञानेश कुमार और मौजूदा सत्ता को अभयदान मिल गया!

चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति वाले पैनल को चुनौती देने वाली याचिका पर अब संविधान पीठ सुनवाई करेगी।
कोर्ट ने ये भी कहा है कि यह मामला सालों तक पेंडिंग नहीं रहना चाहिए।

– कोर्ट ने पांच जजों की एक स्थाई संविधान पीठ बनाने की सिफारिश भी की है जो केवल संवैधानिक मामलों की सुनवाई करेगी।…

— Prabhakar Kumar Mishra (@PMishra_Journo) September 23, 2026

*हितों का नग्न टकराव (Conflict of Interest): दो महीने बाद सेवानिवृत्त होने जा रहे जस्टिस शर्मा ने न तो खुद को इस मामले से अलग (recuse) किया और न ही सार्वजनिक रूप से यह खुलासा किया कि उनका बेटा उसी चुनाव आयोग का वकील है जिसके प्रमुख की बेटी को वे राहत दे रहे हैं।

*वकीलों के संगठन का सीजेआई को पत्र: ‘लॉयर्स एसोसिएशन फॉर कॉन्स्टिट्यूशन’ (LAFC) ने सीजेआई सूर्यकांत को खुला पत्र लिखकर रोस्टर के उल्लंघन, मुख्य चुनाव आयुक्त की बेटी को दिए गए वीआईपी ट्रीटमेंट और सुनवाई का ऑडियो म्यूट करने पर कड़ा ऐतराज जताते हुए न्यायिक प्रक्रिया के नष्ट होते भरोसे पर अलार्म बजाया।

*आलोचनाओं से घबराकर सुप्रीम कोर्ट का यू-टर्न: चौतरफा फजीहत और खुलासे के बाद बैकफुट पर आई सुप्रीम कोर्ट की पीठ को अपने आदेश में संशोधन करने पर विवश होना पड़ा। कोर्ट ने स्पष्टीकरण जारी किया कि रोक केवल डीएम के वेतन से ₹5 लाख वसूली और प्रतिकूल टिप्पणियों पर है, जबकि छात्रा आकृति चौधरी की रासुका हिरासत रद्द करने का हाईकोर्ट का फैसला जस का तस रहेगा—जो यह साबित करता है कि मूल आदेश केवल नौकरशाह के रसूख को बचाने की हड़बड़ी में दिया गया था।

न्यायिक संस्थाएं संविधान के निर्जीव अनुच्छेदों या पद के विशेषाधिकारों की आड़ लेकर नहीं, बल्कि अपनी निर्भीक निष्पक्षता, अक्षुण्ण पारदर्शिता और बेदाग नैतिक आचरण से लोक-विश्वास अर्जित करती हैं। जब एक साधारण नागरिक अपनी जमानत और अर्जी की तारीख के लिए जेल की सलाखों के पीछे एड़ियां रगड़ता रह जाता है, और दूसरी तरफ चुनाव आयोग के वकील रहे बेटे के पिता (जज) उसी मुख्य चुनाव आयुक्त की बेटी के मुकदमे को बिना रोस्टर अपनी बेंच में खींचकर बंद ऑडियो के पीछे फौरी राहत बांटते हैं, तो यह न्याय नहीं बल्कि विशेषाधिकार प्राप्त अभिजात वर्ग का खुला संरक्षण है। यदि न्यायपालिका में मुकदमों के रोस्टर और फैसलों की दिशा जजों के परिजनों को मिलने वाले सरकारी पैनल्स और सेवानिवृत्ति के बाद ट्रिब्यूनलों के पदों की लालसा से तय होने लगेगी, तो जनमानस के भीतर अदालत का इकबाल हमेशा के लिए दफन हो जाएगा। समय आ गया है कि ‘मास्टर ऑफ द रोस्टर’ की मनमानी को खत्म कर मुकदमों के आवंटन को पूरी तरह स्वचालित और पारदर्शी बनाया जाए, ताकि सत्ता की दहलीज पर न्याय का तराजू बंधक बनने से बच सके।

इससे संबंधित अन्य खबरों का लिंक

चुनाव आयोग में दो-फाड़, नियमों का घनघोर उल्लंघन, मनमर्जी कर रहे ज्ञानेश कुमार?

संपादकीय: चुनाव आयोग में बगावत: ‘अवैध’ फैसलों और 14 आपत्तियों ने खोली निष्पक्षता की पोल!

संपादकीय…न्याय का रोस्टर पर रसूख की छाया: जब मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की बेटी के लिए सुप्रीम कोर्ट ने बदले नियम!

चुनाव आयोग में ‘साइबर तख्तापलट’: सीमा खन्ना, अमेरिकी सॉफ्टवेयर और लोकतंत्र के अपहरण का पूरा कच्चा चिट्ठा!

नोट:- यदि आपको हमारा यह दृष्टिकोण और वैचारिक स्पष्टता पसंद आई, तो हमारी स्वतंत्र व खोजी पत्रकारिता को संबल देने के लिए आज ही ISD परिवार से जुड़ें / सशुल्क सदस्यता लें।👇

ISD News Network September 27, 2026
🇮🇳 राष्ट्रहित और सत्य के पक्षधर बनें

साहसी पत्रकारिता की शक्ति बनें।

एल्गोरिदम की सेंसरशिप के विरुद्ध आपका साहस ही हमारी सबसे बड़ी शक्ति है। India Speak Daily की खोजी पत्रकारिता और विशेष ऑडियो विश्लेषण तक सीधी पहुंच के लिए हमारे कुटुंब के सारथी बनें।

❤️ ISDian बनें — सदस्यता लें।

📢 हमारे WhatsApp और Telegram से जुड़ें

ब्रेकिंग न्यूज़, विशेष रिपोर्ट्स और महत्वपूर्ण अपडेट्स सीधे अपने मोबाइल पर प्राप्त करें।

✈ Telegram से जुड़ें ☘ WhatsApp से जुड़ें
⚡ तुरंत अपडेट्स • 📰 बड़ी खबरें • 🎙 विशेष रिपोर्ट्स • कोई स्पैम नहीं

जुड़ने के बाद आपको क्या मिलेगा?

⚡ ब्रेकिंग न्यूज़ अलर्ट

महत्वपूर्ण खबर प्रकाशित होते ही तुरंत अपडेट पाएं।

📰 दिनभर की प्रमुख खबरें

बड़ी खबरों का आसान और संक्षिप्त सार सीधे आपके मोबाइल पर।

🛡 फेक न्यूज़ के खिलाफ

भ्रामक सूचनाओं पर तथ्य आधारित रिपोर्टिंग और विश्लेषण।

🇮🇳 राष्ट्रहित कवरेज

भारत और समाज से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर विशेष रिपोर्ट्स।

TAGGED: CEC Gyanesh Kumar, election commision, Election Commission of India, gyanesh kumar, Gyanesh Kumar daughter, Supreme Court

Related

पटाखा बेचने पर पुलिस का डंडा !

अर्चना कुमारी। हिंदुओं के प्रमुख त्योहार दिवाली आने में कुछ...

September 27 2026

सीएम योगी पर नहीं चलेगा केस, भड़काऊ भाषण मामले में सुप्रीम कोर्ट से राहत

यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ को आज बड़ी राहत मिल...

September 27 2026

हिन्दुओं को सद्भावना का पाठ पढ़ा कर विधर्मियों का साथ क्यों ?

सुभाष चन्द्र। सद्गुरु जग्गी – हिन्दुओं कोसद्भावना का पाठ पढ़ा...

September 27 2026

हिंदू लड़कियों के टॉयलेट दृश्य को रिकॉर्डिंग करने वाली मुस्लिम तीनों लड़कियों को मिल गई जमानत !

अर्चना कुमारी। कर्नाटक के उडुपी के नेत्र ज्योति कॉलेज में...

September 27 2026

Share this Article
Facebook Twitter Whatsapp Whatsapp Telegram Print
ISD News Network
Posted by ISD News Network
Follow:
India Speak Daily is a News portal and YouTube channel dedicated to Investigative and Data-driven journalism, operating on the principles of "No Left, No Right—Only Sanatani Voice."
1 Comment
  • Avatar Anonymous says:
    September 27, 2026 at 5:52 pm

    Sandeep Ji Ram Ram, meri tao Ishwar ye yahi prarthana hai ki wo Kalki Avtar Jaldi se jaldi le.

    Loading...
    Reply

Leave your Comments BelowCancel reply

--- Advertisement ---
Ad imageAd image
Ad imageAd image
Ad imageAd image

You Might Also Like

न्यायपालिकासंपादकीय

न्यायपालिका में बंद दरवाजों के बीच चल रही सौदेबाजी पर एक न्यायाधीश का विस्फोट!

October 12, 2026
खोजी आलेख

चुनावी मशीनरी पर संस्थागत कब्जे की नई ‘क्रोनोलॉजी’: कहीं भाई स्पीकर, कहीं पिता भाजपा प्रदेश अध्यक्ष—चुनावी कुर्सियों पर ‘हितों के टकराव’ का खतरनाक राष्ट्रीय सिंडिकेट!

October 11, 2026
संपादकीय

देश में दूसरा आपातकाल! आखिर इतनी डरी हुई क्यों है सरकार?

October 10, 2026
संपादकीय

‘अमेरिका फर्स्ट’ की वेदी पर भारतीय मेधा: निलंबन, मानवीय संकट और भारत की रणनीतिक विफलता

October 9, 2026
//

India Speak Daily – No Left – No Right, Only Sanatani Voice.

Popular Categories

  • ISD Radio
  • ISD Videos
  • JOIN US / LOGIN

Quick Links

  • Refund & Cancellation Policy
  • Privacy Policy
  • Contact Us
  • Terms of Service
  • Advertise With ISD

Copyright © 2015 - 2026 - Kapot Media Network LLP. All Rights Reserved.

Removed from reading list

Undo
Welcome Back!

Sign in to your account

Register Lost your password?
%d