भीमराव सकपाल बाद में ब्राह्मण की कृपा से भीम राव अंबेडकर ने कभी सभी दलियों के लिए काम नहीं किया आज के लेख में इसका प्रमाण सहित वर्णन है । अंबेडकर जब अभी पैदा भी नहीं हुवे थे तब ही अंग्रेज लेखक जान मुर्रे ने भारत में जो जातियां गंदे कपड़े पहनती थी , साफ़ सफ़ाई से नहीं रहती थी चमड़े का काम नाले साफ़ करने का काम करती थी उन्हें अस्पृश्य की श्रेणी में डाल दिया था आपको बता दें की इसका उल्लेख कहीं भी शास्त्र में नहीं अपितु जान मुर्रे की किताब में डिप्रैस्ड क्लास और मैक्समूलर द्वारा लिखित मनुस्मृति में इसी को शुद्र कह दिया और कहा कि उन्हें पढ़ने का और अच्छा जीवन जीने का अधिकार नहीं था ।
1823 में अंग्रेज़ की ईसाई मिशनरियों ने धर्मांतरण के गोरखधंधो को चलाने के लिए पहली बार डिप्रेस्ड ,अनटुचेबल इन शब्दों का प्रयोग किया और उन्हें अपने धर्म में धर्मांतरित करना शुरू किया । इसके बाद 1876 में जान मुर्रे ने अपनी पुस्तक में डिप्रेस्ड क्लास की भारत में स्थिति पर चर्चा किया आगे चल कर इसी मिशनरी ने ज्योतिबाफुले को आगे कर के गुलामगिरी लिखवाया और डिप्रेस्ड क्लास की स्थिति को लेकर अंग्रेजों के समक्ष आंदोलन कराया । आगे 1919 चेम्सफोर्ड सुधार के नाम पर डिप्रेस क्लास को सुविधा देने की बात हुई और इस 1919 एक्ट में डिप्रेस्ड क्लास डिफाइन किया गया ।
इस बीच विदेश(लंदन )जाने आने के कारण अंबेडकर की नजदीकी अंग्रेजों से शुरू हो गई थी और अब अंबेडकर धीरे अंग्रेजों के मोहरे बन चुके थे । इस बीच पढ़ाई पूरी करने अंबेडकर 1923 में भारत आए और एक साल की प्रतीक्षा के बाद उन्होंने 1924 में “बहिष्कृत हितकारिणी सभा” नामक संगठन बना कर अंग्रेज़ों से महार दलितों के लिए काम करना शुरू किए और 1927 में महाड़ आंदोलन शुरू किए ये सब अंग्रेज़ों के इशारे पर और भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन को कमज़ोर करने और दलितों को हिंदू धर्म से अलग कर हिंदू धर्म को समाप्त करने के लिए किया जा रहा था ।
1928 में जब साइमन कमीशन भारत आया उस समय इन्होंने दलितों के लिए अलग दलिस्तान या उनके लिए “सेपरेट एलेक्टोरेट” की माँग की क्योंकि उस समय साइमन कमीशन का भारतीयों द्वारा विरोध हो रहा था और अंबेडकर साइमन कमीशन के साथ खड़े थे उसका इनाम अंबेडकर को मिला “सेपरेट इलेक्टोरेट” के रूप में लेकिन गांधी के उपवास से अंग्रेजी सरकार डर गई और अंबेडकर को आदेश किया की जाकर गांधी से मिलो और समझौता करो फिर ये सेपरेट एलेक्टोरेट समाप्त हुआ ।
फिर 1935 का एक्ट आया जो आज के संविधान में बड़े रूप में आज भी स्थापित है में इस डिप्रेस्ड क्लास को अलग से राजनीतिक आरक्षित सीट दी गई लेकिन अंबेडकर नहीं चाहते थे की महारों के अलावा डिप्रेस्ड क्लास में कोई और सम्मिलित हो । इसमें गांधी बाबू जगजीवन राम और अन्य के प्रयास से उस समय की और जातियां जैसे धोबी ,नाई , बढ़ई , खटिक , बाल्मीकि सम्मिलित किए गए । यही डिप्रेस्ड क्लास को 1936 के ब्रिटिश गवर्नमेंट ऑर्डर में एक सूची प्रकाशित की गई जिसमे महार , चमार , धोबी , नाई, खटिक सहित 16 जातियां सम्मिलित की गई ।

अंबेडकर नहीं चाहते थे कि धोबी , नाई , खटिक , बाल्मीकि इसमें सम्मिलित किए जायें क्योंकि इन्होंने अंग्रेजों का साथ नहीं दिया उल्टा बाबू जगजीवन राम आदमी के नेतृत्व में अंग्रेजों का विरोध हुआ । एक बार इन सबका का शुचि से नाम अंग्रेजों ने फिर हटा दिया क्योंकि अंबेडकर के नेतृत्व में शेडयूल कास्ट फेडरेशन ने इन जातियों का इस सूची में रखने का घोर विरोध किया था लेकिन फिर गांधी और बाबू जगजीवन राम के प्रयास से धोबी , खटिक , पासी , बाल्मीकि आदि जातियां भी समिलित कर ली गई जो आज भी हैं ।
यह बात ध्यान रखना चाहिए कि जो घुमंतू जातियां थी जिनकी संख्या आज भी देश में सबसे 4% है जो कभी अंग्रेज़ों के सामने नहीं झुकी उनको भी अंबेडकर कभी डिप्रेस्ड क्लास बाद में शेड्यूल कास्ट में सम्मिलित नहीं होने दिए वो आज भी सामान्य श्रेणी के घुमंतू जीवन ही जी रहे हैं । इस लिए मैं बार बार कहता हूँ अंबेडकर केवल महारों के नेता थे कभी अन्य दलितों के बारे में सोचा ही नहीं उल्टा उनके स्वतंत्रता आंदोलन में अंग्रेजों का साथ ना देने के कारण विरोध करते रहे और दबाते रहे । ऐसे ही मैं प्रमाण के साथ कह चुका हूँ कि अंबेडकर का संविधान निर्माण में केवल महारों के राजनीतिक आरक्षण दिलाने के अलावा कोई योगदान नहीं था क्योंकि 14 जुलाई 1947 जब ये आये संविधान सभा में और 29 अगस्त 1947 को जब ये प्रारूप समिति का अध्यक्ष बनाये गए तब तक संविधान का 80% भाग बन चुका था और संविधान सभा ने उसको पारित भी कर दिया था । इस लिए कहता हूँ की संविधान का असली निर्माता बीएन राव थे अंबेडकर नहीं ।

