संदीपदेव। परसों 5 फरवरी 2026 को प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) के औपचारिक X हैंडल से एक पोस्ट किया गया।(Pic1) पोस्ट में इकोनॉमिक टाइम्स अखबार का लिंक शेयर करते हुए लिखा गया कि “Next 20-25 years will be era of India, says BlackRock CEO Larry Fink.”

यह लिंक प्रधानमंत्री मोदी के वाया ‘नमो एप’ के जरिए शेयर किया गया है। अर्थात् यह पूरी तरह से प्रधानमंत्री मोदी की जानकारी में औपचारिक रूप से शेयर किया गया है!
#PMO ने जो शेयर किया है, उसका हिंदी अनुवाद है:- “ब्लैकरॉक के CEO लैरी फिंक का कहना है कि अगला 20-25 साल भारत का होगा।”
आप कह सकते हैं कि यह खुश होने की बात है, इसलिए भारत के प्रधानमंत्री कार्यालय के हैंडल से इसे पोस्ट किया गया तो इसमें बड़ी बात क्या है?
अब यह जान लीजिए कि #EpsteinFiles में ब्लैकरॉक के CEO लैरी फिंक का नाम दर्ज है!(Pic2)। लैरी फिंक ‘डीप स्टेट’ ‘ग्लोबलिस्ट एलिट’ है। ब्लैकरॉक कंपनी क्या है, यह भी जान लीजिए?

ब्लैक रॉक (BlackRock) को अक्सर दुनिया की “सबसे ताकतवर कंपनी” या “पर्दे के पीछे की सरकार” कहा जाता है! असल में उस पर आरोप है कि वह पर्दे के पीछे से कई देशों की सरकार चलाती है। यह दुनिया की सबसे बड़ी एसेट मैनेजमेंट (Asset Management) कंपनी है, जिसका मुख्यालय न्यूयॉर्क में है।
ब्लैक रॉक कोई बैंक नहीं है जहाँ आप अपना खाता खोल सकें, बल्कि यह निवेश का प्रबंधन करती है। यह पेंशन फंड, बीमा कंपनियों, बड़े संस्थानों और अमीर लोगों के पैसों को शेयर बाजार, बॉन्ड और रियल एस्टेट में निवेश करती है। भारत में भी इसके काफी कार्यालय हैं। ब्लैक रॉक भारत के शेयर बाजार (NSE/BSE) में सबसे बड़े विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों में से एक है। यह भारत में मुकेश अंबानी के #jio के साथ भी साझीदार है। ब्लैक रॉक के निवेश से अंबानी ने भारत में ‘जिओ ब्लैकरॉक फंड’ नाम से एक ज्वाइंट वेंचर का निर्माण किया है।(Pic3)

AUM (Assets Under Management): वर्तमान में यह लगभग 10 ट्रिलियन डॉलर से अधिक की संपत्ति का प्रबंधन कर रही है। यह राशि भारत, जापान और जर्मनी जैसी बड़ी अर्थव्यवस्थाओं की संयुक्त जीडीपी से भी अधिक है।
ब्लैक रॉक की असली शक्ति उसका सॉफ्टवेयर ‘Aladdin’ (Asset, Liability, Debt and Derivative Investment Network) है। यह साफ्टवेयर ही पूरी दुनिया के बाजार को मैनेज करता है। सोचिए, यदि पूरी दुनिया एक ही सॉफ्टवेयर के सुझावों पर चलेगी, तो शेयर बाजार उसके इशारे पर नाचेगा और ब्लैकरॉक पर यही आरोप लगता रहा है!
आलोचकों का मानना है कि ब्लैक रॉक दुनिया भर की कंपनियों पर अपनी विचारधारा थोपती है। यह तय करती है कि कौन सी कंपनी ‘कैसे’ चलेगी? इसी कारण यह लोकतांत्रिक सरकारों से भी ऊपर एक ‘सुपर-रेगुलेटर’ की तरह काम करती है।
ब्लैक रॉक लगभग हर उस चीज की मालिक है जिसे आप इस्तेमाल करते हैं। चाहे वह एप्पल (Apple) का फोन हो, माइक्रोसॉफ्ट हो, कोका-कोला हो या बड़ी फार्मा कंपनियां और हथियार निर्माता—ब्लैक रॉक इन सबमें सबसे बड़े शेयरधारकों में से एक है।
ब्लैक रॉक जैसे वैश्विक संस्थानों का ध्यान केवल ‘रिटर्न’ और ‘प्रॉफिट’ पर होता है। जब ये कंपनियां विकासशील देशों के बुनियादी ढांचे या भोजन और आवास (Housing) जैसे क्षेत्रों में भारी निवेश करती हैं, तो आम आदमी के लिए कीमतें बढ़ जाती हैं। अमेरिका और यूरोप में आवास संकट के पीछे ब्लैक रॉक जैसे संस्थानों द्वारा सामूहिक रूप से घर खरीदने को एक बड़ा कारण माना गया है।
ब्लैक रॉक आज के पूंजीवाद का वह चेहरा है जो सभी सीमाओं को पार कर चुका है। यह एक ऐसी इकाई है जिसके पास न केवल पैसा है, बल्कि वह डेटा और एल्गोरिदम की स्वामी है जो वैश्विक अर्थव्यवस्था की दिशा तय करते हैं।
इसकी शक्ति इतनी अधिक है कि इसे सरकारों का “चौथा स्तंभ” (Fourth Piller of Government) भी कहा जाता है, जो बिना किसी चुनाव और जवाबदेही के दुनिया पर शासन कर रही है।
और इस ब्लैक रॉक के सीईओ लैरी फिंक (Larry Fink) वैश्विक राजनीति और अर्थशास्त्र में बहुत प्रभावी व्यक्ति हैं, जिसके लिए भारत का प्रधानमंत्री कार्यालय पलक पांवड़े बिछाए हुए है!
यह सारे तथ्य दर्शाते हैं कि भारत की ‘शासन व्यवस्था’ और ‘पूंजी नेटवर्क’ में ‘डीप स्टेट’ गहरी घुसपैठ कर चुका है! सच कहूं तो ‘एप्सटीन फाईल’ में किसी का नाम अनजाने में नहीं, बल्कि ‘ग्लोबल अदृश्य हाथों’ द्वारा ‘तय कार्यों’ के कारण दर्ज है!
