अवनीश कुमार। मैं जब जब चाहता हूं अबसे राजनीतिक पोस्ट्स ना करूँ त्योंहीं गंगापुत्र मास्टरस्ट्रोक चल देते हैं और जननायक कोई न कोई बकचोदी कर देता। दोनो के अंध समर्थक इसे देशहित और इसके फायदे बताने लगता है। यह देख मेरे अंदर का पिशाच जाग उठता।
भीम स्मृति के माने तो पहले भेदभाव केवल sc/st के साथ ही होता था। लेकिन नव अम्बेडकरवाद से ग्रसित हड़प्पा के प्रीस्ट किंग की माने तो obc के साथ भी भेदभाव होता है। और करता कौन है तो सवर्ण। मोदी सरकार का कहना है, शिक्षण संस्थानों खासकर यूनिवर्सिटी में जातिगत भेदभाव का सिर्फ SC/ST/ओबीसी के साथ होता है। जुलाई में कांग्रेस कर्नाटक में रोहित वेमुला बिल ला रही थी। एक्ट का लोगों ने विरोध किया। चूंकि कांग्रेस लाई थी इसलिए हमलोगों के पीछे-पीछे महामानव की IT cell ने भी विरोध किया। कुछ और लोग आगे आए और अंततः कर्नाटक सरकार को झुकना पड़ा, एक्ट नहीं आया।
अब हड़प्पा के प्रीस्ट किंग पिछले दरवाजे से यही अध्यादेश सारे देश पर थोपने जा रहे। सारे कॉलेजों में caste-discrimination हटाने के लिए equity committee बनेगी। और caste discrimination का मतलब सिर्फ SC/ST/OBC होगा।
UGC रेगुलेशन 2026 ने कैंपस में भेदभाव रोकने के लिए भारत के कॉलेजों और यूनिवर्सिटीज़ के लिए रेगुलेशन जारी किए हैं-
चौंकाने वाली बात यह है कि इन रेगुलेशन के अनुसार-
- सिर्फ़ जनरल स्टूडेंट्स को ही अपराधी (उत्पीड़क) माना जाएगा
- सिर्फ़ OBC/SC/ST स्टूडेंट्स को ही पीड़ित (उत्पीड़ित) माना जाएगा
- झूठी शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं होगी
- इसके अतिरिक्त हर जगह घूमने वाले इक्विटी स्क्वैड होंगे जो जगह-जगह यह जांच करेंगे कि बाबासाहेब के किसी अनुयायी को किसी मनुवादी ने कष्ट तो नहीं पहुँचा दिया। इससे जो General Vs All का माहौल बनेगा, आप उसकी कल्पना भी नहीं कर सकते।
सरकार ने पहले ही निर्धारित कर दिया है कि कॉलेज में बस 2 वर्ग होंगे- शोषक एवं शोषित। शोषित में सब हैं और शोषक में सिर्फ सवर्णों के बच्चे। सवर्ण लड़कों के साथ जो होगा सो होगा ही, इससे सवर्णों लड़कियाँ जिस तरह नीलकुंठा का शिकार होंगी, वह अकल्पनीय है।
मान लो आपकी बेटी/बहन किसी कॉलेज में है। वहां किसी मुल्ले ने या किसी दलित/ओबीसी जाति ने उसके साथ छेड़खानी की या कुछ भी किया उसके बाद भी वह अगर उल्टे आपकी बेटी पर ही आरोप लगा देगा तो जेल में आपकी बेटी ही जाएगी। किसी ने सवर्ण लड़की को डेट के लिए प्रोपोज किया और तुमने मना कर दिया। वह लड़का जातिवादी का आरोप लगाकर तुम्हारी जिंदगी के साथ खेल सकता है। वह झूठा बहाना लेकर तुम्हारे HOD से तुम्हारी शिकायत कर सकता है। HOD आप पर कारवाई नहीं करता है तो उसे पहले एक साल विथ जुर्माना, फिर तीन साल जेल विथ जुर्माने का सजा हो जाएगा। अगर तुम कॉलेज में हो, वहां कोई दलित/ओबीसी और यहाँ तक कि मुसलमान कहता है तुम उससे संबंध बनाओ। तुम इंकार कर दी, अब इंकार के लिए तुम्हें जॉब से हाथ धोना पड़ सकता है। झूठा किसी आरोप में फंसाया जा सकता है। वह तुम्हें जेल भिजवा देगा और उपर से जुर्माना भी लेगा। इसमें बेल का भी प्रावधान नहीं है। दूसरी तरफ यदि तुम उसके कहे अनुसार चल रही तो तुम्हरा जमकर शोषण होना है। पहले मानसिक और फिर शारिरिक। इसके बाद भी सही से रह सकोगी, कोई गारंटी नहीं है।
जिस देश में 72 प्रावधानों वाले हरिजन एक्ट में कन्विक्शन का रेट 5% से लेकर 0.67% तक का है वहाँ ये अब नई बकचोदी की जा रही है। इस प्रकरण में कोई स्पष्टीकरण कट्टर भाजपा समर्थकों की ओर से नहीं आया है। प्रवक्ता संभवतः पार्टी से लाइन की आशा में बैठे होंगे कि इसे सामाजिक न्याय के रूप में बताया जाए या सवर्णों को लिंग के अग्रभाग पर ले कर चलने को ही पार्टी लाइन बना कर चलता रहा जाए कि साले तुम कोई रिस्पॉन्स डिज़र्व नहीं करते। और समर्थकों का क्या, उसके लिए मोदी वाक्य ही धर्मशास्त्र है। पार्टी ही धर्म है। ये सब मिलकर बनाएगा विकसित भारत। घंटे का विकसित भारत बनेगा! महामानव ने सवर्णों के खिलाफ नाजी जर्मनी के गेस्टापो सिस्टम यहाँ लॉन्च कर दिया है।
समानता के नाम पर आज जो जहर समाज में बोया जा रहा है उसका फल कल बहुत विषैला होगा। कल नया आदेश आएगा कि सवर्णों के घर बेटियां हों तो उन्हें भोग स्वरूप बाबा साहब के अनुयायियों को समर्पित किया जाए, क्योंकि इसके बिना सामाजिक न्याय नहीं हो सकता। विष्णु के11वें अवतार ने हिंदुराष्ट्र का चूरन चटाकर भीमराष्ट्र बना दिया। देश को उस बॉर्डर पर खड़ा कर दिया जहाँ से गृहयुद्ध से अलावा और कोई विकल्प नहीं दिखता। गङ्गापुत्र इतिहास में अमर होने की मंशा कर रखे हैं। याद रखिए, आप अच्छे कामों के लिए याद किए जायंगे तो चूतियों सा कामों के लिए गरियाये भी जायंगे।
