भारत को बिल्कुल नहीं जरूरत , आयात और निर्यात की ;
पर भ्रष्टाचार हटाना होगा , फिर कमी नहीं कोई बात की ।
तड़क-भड़क कम करनी होगी , सादा-जीवन अपनाना है ;
चरित्रहीन नेता को हटाकर , चरित्रवान को लाना है ।
हर घंटे जो कपड़े बदले , बात-बात पर फोटो खिंचवाता ;
देश के धन को लूट-लूट कर , दुश्मन-देशों से लुटवाता ।
गंदे – व्यापारी साथी इसके , सहयोगी पूरे नंगे हैं ;
भारत को ही बेच – बेचकर , ये सारे नंगे चंगे हैं ।
सभी समस्याओं की ये जड़ है , कायर कमजोर नपुंसक नेता ;
अमरीका से इतना डरता है , हरदम पूंछ हिलाता रहता ।
अमरीका ब्लैकमेल करता है और भारत को लूट रहा ;
एपस्टीन – फाइल का चक्कर , भाग्य देश का फूट रहा ।
ब्रेनडेड जितना भी हिंदू और बुद्धि लकवाग्रस्त है ;
केवल इनके ही कारण से , देश आपदाग्रस्त है ।
महापतित है प्रेस – मीडिया , देश के ये गद्दार हैं ;
चरित्रहीन ये लालची सारे , नेता की भांति मक्कार हैं ।
अमरीका के टेलीविजन ने, नेता की कितनी हंसी उड़ाई ?
इजरायल को बाप बनाकर , जिसने अपनी टांगे फैलाई ।
पूरा भारत शर्मसार है , अब्बासी-हिंदू नेता के कारण ;
पहले इतना अपमान न झेला, जो अब झेला इसके कारण ।
भारत में सबसे बड़ा है दंगल , अंधभक्ति व देशभक्ति में ;
अंधभक्त दुर्भाग्य देश के, जो डूबे नेता की अंधभक्ति में ।
जिस देश का नेता चरित्रहीन हो, वो देश शीघ्र मिट जाता है ;
एपस्टीन-फाइल में फंसकर , ब्लैकमेल हरदम होता है ।
अब्बासी-हिंदू भारत का नेता, किले का फाटक यही खोलता ;
अमरीका का ये दलाल है , उसके आगे मुंह न खोलता ।
सीज-फायर अमरीका करवाता, मनमाना ट्रेड-डील करता ;
केवल इस नेता के कारण , हर मोर्चे पर देश हारता ।
हिंदू ने अक्ल बेच खाई है या बुद्धि गई है चरने घास ;
उसका जय-जयकार कर रहे , जिससे नहीं देश को आस ।
हर संस्थान हो चुका नपुंसक , पूरा निजाम ही बिगड़ गया ;
भ्रष्टाचार की गंदी-चाहत , सुप्रीम-कोर्ट तक फिसल गया ।
असल में ये सब महामूर्ख हैं , पता नहीं कब समझ आयेगी ?
धन – दौलत सब धरी रहेगी , साथ नहीं कुछ जायेगी ।
लेकिन फिर भी कुछ तो ऐसा , जो तेरे साथ ही जाते हैं ;
अच्छे – बुरे कर्म जो तेरे , अगला – जीवन दिलवाते हैं ।
“जय सनातन-धर्म”, रचनाकार : ब्रजेश सिंह सेंगर “विधिज्ञ”
