संदीप देव। अहंकारी लोगों का हाल नीचे की तस्वीर की तरह होता है। अहंकार के कारण उन्हें अपनी कुंठा, अपना फ्रस्ट्रेशन, अपना अवसाद खुद ही ढोना पड़ता है। किसी अन्य को दोष देने का कोई लाभ नहीं।
ईगो और ईश्वर दो किनारे हैं। एक को छोड़कर ही दूसरे तक पहुंचा जा सकता है। इसे कुछ ऐसे समझें; जब तक नदी का एक किनारा नहीं छोड़ोगे, दूसरे पर आखिर कैसे पहुंचोगे? यह चुनना तुम्हारे ऊपर है कि अपना ईगो चुनते हो, या फिर उस ईश्वर को!
एक और सच है। जिसने ईगो त्याग दिया, ईश्वर खुद आगे बढ़कर उसे अपने आलिंगन में ले लेता है। अहंकार का त्याग करके देखो, जिंदगी में हर पल आनंद की वर्षा में भीगते रहोगे।
और अहंकार का त्याग कैसे करोगे? हर वक्त साक्षीभाव दशा में जी कर। पल-पल चेतना में जीयो, और अपने जीवन के अंदर आते बदलाव को महसूस करो। यह मेरा अनुभव है। कुछ ज्यादा करने की जरूरत नहीं, बस चैतन्य हो जाओ!
