विजय सिंह ठकुराय। पिछले दस साल में देश में सरकारी आंकड़ों के मुताबिक सिर्फ जम्मू एंड कश्मीर में 2200 से ज्यादा आतंकी घटनाएं हो चुकी हैं। नक्सल और नार्थ-ईस्ट कॉरिडोर को भी जोड़ लें तो संख्या 5500 + हो जाती है। इस दौरान सिविलियन और सेना को मिलाकर 2000 से ज्यादा भारतीय जाने हमनें गंवाई हैं।
देश में उड़ी, पुलवामा, पहलगाम, सुकमा और तमाम बड़े अटैक हुए। किसी ने कोई जिम्मेदारी नहीं ली। गृहमंत्री तो संसद में ऑन रिकॉर्ड कह चुके हैं कि घुसपैठ रोकना संभव ही नहीं है, पुलवामा में आतंकी 300 किलो विस्फोटक ले आते हैं, देश की राजधानी में 3000 किलो विस्फोटक पहुंच जाता है। इन जैसी दस साल की तमाम इंटेलीजेंस फेलियर्स के बाद भी अपने पद पर बने हुए हैं। पिछले दस साल में जवाबदेही के नाम पर किसी मंत्री या संतरी ने इस्तीफा नहीं दिया।
ऐसा नहीं है कि कांग्रेस के राज में आतंकी घटनाएं नहीं होती थीं, पर एक एकाउंटेबिलिटी होती थी। मुम्बई अटैक हुआ, सभी आतंकी मौका-ए-वारदात पर निपटा दिए गए, एक को जिंदा पकड़ कर फांसी दी गयी। फिर भी इस घटना को कांग्रेस ने अपनी फेलियर माना और गृहमंत्री, राज्य के मुख्यमंत्री और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के इस्तीफे हुए। उस दौर में कम से कम देश में जिम्मेदारी लेने की रवायत तो थी।
एक वो दौर था, जब संकट के साये के दौरान एक नेता के कपड़े बदलने मात्र से देश गुस्से में उबल पड़ता है। एक ये दौर है, जब एक नेता पहलगाम के पीड़ितों से बिना मिले बिहार चुनावी भाषण देने पहुंच जाते हैं। दिल्ली में कांड हुआ, ऊपर से 3000 किलो विस्फोटक पकड़े जा रहे हैं, पर हमारे मुखिया जी सुबह 7 बजे वोट देने की अपील कर भूटान नरेश का हैप्पी बर्थडे मनाने निकल जाते हैं। देश फिर भी गूंगा-बहरा बना हुआ है, मानों सवाल पूछना ही भूल गया है।
चलिए कोई नहीं, जाने देते हैं। बताएं तो हैं कि “भारी मन” से गए हैं।
देखिएगा, अगले दो दिन किसी फोटू में मुस्करायेंगे भी नहीं।
– झकझकिया
(चित्र में एक गैरतमंद पीएम है। 56 इंची का सीना भले ही न हो पर इतनी हिम्मत इस देश के लोगों को देते थे कि कोई भी उनके मुंह के सामने माइक रख कर सवाल पूछ सके)

