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India Speak Daily > इतिहास > गुलाम भारत > अमेरिकी पुरातत्वविद ने माना कि ताजमहल एक हिंदू भवन है।
गुलाम भारत

अमेरिकी पुरातत्वविद ने माना कि ताजमहल एक हिंदू भवन है।

ISD News Network
By ISD News Network 10 Min Read
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10 Min Read
Taj Mahal is Hindu Monument: Prof Marvin Mills (File Photo)
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भारत के मशहूर इतिहासकार पुरुषोत्तम नागेश ओक ने ताजमहल को हिंदू संरचना साबित किया था। तब नेहरूवादी और मार्क्सवादी इतिहासकारों ने उनका खूब मजाक उड़ाया था। जबकि पीएम ओक की ही परिकल्पना थी कि वह मकबरा नहीं तेजोमहालय नाम का हिंदू स्मारक था। उस समय उन्होंने सबूत के साथ साबित किया था कि इसका निर्माण शहजहां ने नहीं बल्कि जय सिंह ने कराया था। लेकिन शाहजहां ने उस पर कब्जा कर लिया और फिर उसे मकबरा में बदल दिया था। लेकिन अब अमेरिका के पुरातत्वविद प्रो. मार्विन एच मिल्स ने ताजमहल को हिंदू भवन माना है। उन्होंने अपने शोध पत्र में सबूत के साथ स्थापित किया है। इतिहास में झूठ और फरेब स्थापित करने में लगे नेहरूवादी और मार्क्सवादी इतिहासकारों को इससे चोट पहुंच सकती है।

मुख्य बिंदु

* अपने शोध पत्र में मिल्स ने साक्ष्य प्रस्तुत कर ताजमहल के अस्तित्व पर खड़े किए सवाल

* ताजमहल के बगल में बनी मसजिद मक्का की ओर न होकर पश्चिम की ओर है क्यों ?

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अब जब ताजमहल को लेकर नए-नए तथ्य उजागर होने लगे हैं तो मुसलमानों ने अपनी मंशा जाहिर कर दी है। तामजमहल को लेकर अपनी धार्मिक बुनियाद मजबूत करने के लिए ही मुसलमानों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर नमाज अदा करने की इजाजत मांगी थी। लेकिन उनकी मंशा को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने उनकी मांगें खारिज कर दी है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि यह विश्व धरोहर के साथ ही दुनिया के सात अजूबों में से एक है। इसलिए इसलिए इसे ध्यान में रखने हुए ताजमहल स्थित मसजिद में नमाज अदा करने की कोई अनुमित नहीं दी जाएगी। नमाज कहीं और भी अदा की जा सकती है।

Supreme Court refuses to allow offering of Namaz at Taj Mahal. The Court says the historic Taj Mahal is one of the seven wonders of the world, so it should be kept in mind that no Namaz will be offered there. There are other places where one can do that. pic.twitter.com/vYQ3xHNiwy

— ANI (@ANI) July 9, 2018

अमेरिका की कूटनीतिक राजधानी न्यूयॉर्क स्थित प्रैट इंस्टीट्यूट के प्रसिद्ध शिल्पकार तथा प्रोफेसर मार्विन मिल्स ने ताजमहल का विस्तृत अध्ययन किया और उस पर अपना शोध पत्र भी लिखा। ताजमहल पर लिखा उनका शोध पत्र उस समय न्यूयॉर्क टाइम्स में प्रकाशित हुआ था। उनके शोध से ही ताजमहल के बारे में कई नई सूचनाएं और विश्लेषण सामने आए हैं। वैसे तो भारतीय विद्वान इतिहासकार ओक ने तो पहले ही यह स्थापित कर दिया था कि ताजमहल शाहजहां का बनवाया मकबरा नहीं बल्कि हिंदू राजा जय सिंह द्वारा बनाया गया तेजोमहल था। लेकिन मिल्स के इस शोध पत्र ने उनकी परिकल्पना पर मोहर लगा दी है।

मिल्स ने अपने शोध पत्र में जोर देते हुए कहा है कि शुरू में ताजमहल एक हिंदू स्मारक था, जिसे बाद में मुगलों ने कब्जा कर उसे मकबरे में बदल दिया। उन्होंने अपने शोधपत्र में ताजमहल से जुड़े ऐसे-ऐसे ऐतिहासिक साक्ष्य दिए हैं कि कोई उसे झुठला नहीं सकता। ताजमहल की बाईं ओर एक भवन है जो अब मसजिद है। वह मसजिद पश्चिमाभिमुख है यानि उसका मुख पश्चिम की ओर है। सवाल उठता है कि अगर उसे मूल रूप से मसजिद के रूप में बनाया गया होता तो उसका मुख पश्चिम की बजाय मक्का की ओर होता। जबकि यह मसजिद पश्चिमोन्मुख है।

इसकी मीनारें भी बताती हैं कि यह मसजिद का नहीं बल्कि हिंदू स्मारक की प्रतीक हैं। ताज महल के चारों ओर बनाई गई मीनारें भी कब्र या मसजिद के हिसाब से उपयुक्त नहीं है। तर्क के साथ देखें तो इन चारों मीनारों को मसजिद के आगे होना चाहिए, क्योंकि यह जगह नमाजियों के लिए होती हैं। जबकि चारों मीनारें मसजिद की चारों ओर बनाई गई हैं। जो हिंदू स्मारकों की दृष्टि से बिल्कुल उपयुक्त है।

इस प्रकार उन्होंने अपने शोधपत्र के माध्यम से यह अपील की है कि ताजमहल के उद्भव को जानने के लिए कार्बन -14 और थर्मोल्यूमिनेन्सेंस के माध्यम से असली तारीख तय की जा सकती है। इसके लिए भारतीय पुरातात्विक सर्वेक्षण विभाग को सरकार से इस कार्य को पूरा कराने का अनुरोध करना चाहिए। ताकि इस विश्व धरोहर की सच्चाई देश और देशवासियों के सामने आ सके।

मिल्स ने कहा है कि वैन एडिसन की किताब ताज महल तथा जियाउद्दीन अहमद देसाई की लिखी किताब द इल्यूमाइंड टॉम्ब में काफी प्रशंसनीय आंकड़े और सूचनाएं हैं। जो इनलोगों ने ताजमहल के उद्भव और विकास के लिए समकालीन स्रोतों के माध्यम से एकत्रित किए थे। इनमें कई फोटो चित्र, इतिहासकारों के विवरण, शाही निर्देशों के साथ-साथ अक्षरों, योजनाओं, उन्नयन और आरेखों का संग्रह शामिल है। लेकिन दोनों इतिहासकारों ने प्यार की परिणति के रूप में ताजमहल के उद्भव की बात को सिरे से खारिज कर दिया है। दोनों इतिहासकारों ने ताजमहल के उद्भव को मुगलकाल का मानने से भी इनकार कर दिया है।

मिल्स ने ताजमहल पर खड़े किए ये सवाल
ताजमहल के दोनों तरफ बने भवनों को गौर से देखिए। कहा जाता है कि इसमें से एक मसजिद के रूप में कार्य करता है तो दूसरे का अतिथि गृह के रूप में उपयोग किया जाता। जबकि दोनों भवनों की बनावट एक जैसी है। सवाल उठता है कि जो शाहजहां अपनी बीवी के प्रेम में ताजमहल बनवा सकता है क्या वे दो प्रकार के कार्य निष्पादन करने के लिए एक ही प्रकार का भवन बनवाया होगा। दोनों भवनो को भिन्न-भिन्न प्रकार से बनाया जाना चाहिए था?

दूसरा सवाल है कि जब मुगलों ने भारत पर आक्रमण किया था उसी समय देश में तोपें आ गई थी, उसके बाद भी आखिर ताजमहल परिसर की दीवारें मध्ययूगीन, तोपखाने पूर्व तथा रक्षात्मक क्यों थीं? सवाल उठता है कि कि कब्र के लिए सुरक्षात्मक दीवार की आवश्यकता क्यों? (जबकि किसी राजमहल के लिए ऐसा होना अनिवार्य होता है )

तीसरा सवाल है कि आखिर ताजमहल के उत्तर दिशा में टेरेस के नीचे 20 कमरे यमुना की तरफ करके क्यों बनाए गए? किसी कब्र को 20 कमरे कि क्या जरूरत है? जबकि राजमहल की बात अलग है क्योंकि कमरे का अच्छा उपयोग हो सकता था।

चौथा सवाल है कि ताजमहल के दक्षिण दिशा में बने 20 कमरों को आखिर सील कर क्यों रखा गया है। आखिर विद्वानों को वहां प्रवेश क्यों नहीं है ? विद्वानों को अंदर जाकर वहां रखी चीजों का अध्ययन करने की इजाजत क्यों नहीं दी जाती है?

पांचवां और सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि आखिर यहां जो मसजिद है वह मक्का की तरफ नहीं होकर पश्चिम की ओर क्यों है ? अगर यह सातवीं शताब्दी की बात होती तो इसमें कोई परेशानी नहीं थी।

छठा सवाल उठता है कि आखिर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग ने ताजमहल की वास्तविक तारीख तय करने के लिए कार्बन -14 या थर्मो-लुमिनिस्कनेस के उपयोग को ब्लॉक क्यों कर रखा है? अगर इसकी इजाजत दे दी जाती है तो ताजमहल के उद्भव को लेकर उठने वाले विवाद तुरंत शांत होंगे क्योंकि इस विधि से आसानी से पता लगाया जा सकता है कि ताजमहल कब बना था? लेकिन न तो इसके लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण तैयार है न ही भारत सरकार।

Reference:
Primary Source: Review by Professor Marvin H. Mills of TAJ MAHAL-The Illumined Tomb, an anthology of seventeenth century Mughal and European documentary sources, by W.E. Begley and Z.A. Desai (Published by the University of Washington Press, Seattle and London, 1989).

Other Ref: Separating the Taj Mahal from Legend, Professor Marvin H. Mills.
Visit Indian History Real Truth Facebook group to view related posts. This article is part of ‘JEWELS OF BHARATAM SERIES [TM]‘ by the author.

नोट: यह लेखक के निजी विचार हैं। IndiaSpeaksDaily इस आलेख में दी गई किसी भी सूचना की सटीकता, संपूर्णता, व्यावहारिकता अथवा सच्चाई के प्रति उत्तरदायी नहीं है।

URL: Taj Mahal was actually a former Hindu palace occupied and converted to a tomb by Mugals

Keywords: Taj Mahal, Taj Mahal controversy, the illumined tomb, Mughal invasions, Professor Marvin H. Mills, Archaeological Survey of India, ताजमहल, ताजमहल विवाद, विवादास्पद मकबरा, मुगल आक्रमण, प्रोफेसर मार्विन एच मिल्स, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण,

ISD News Network July 11, 2018
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TAGGED: History, Muslim Period in India, Taj Mahal

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1 Comment
  • Avatar Virendra Dandekar says:
    June 5, 2020 at 3:27 pm

    It’s okay when the approval comes from Western countrymen, it’s acceptable as truth. I liked when you mentioned about P N Oak’s research on Taj Mahal. That Article was being published in series in The Magzine “Mother India ” of Shri Baburao Patel, may be in early 1960s(1964- 65 , if I mistake not) because I read all those articles, Subsequently, his book was published on TajMahal. Likewise refering PN Oak, Stephen Knapp has also clarified about Tajmahal, (which you will find in
    http://www.stephen – knapp.com, which covers many things on India & Hinduism). Likewise you may also visit Bijapur, in Karnataka, Gol Gumbaz monuments & you will be surprised. In Delhi itself you will find many monuments in the name of invaders, which in reality were the palaces of erstwhile Kings & their ministers.

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