सुनो ओ दिल्ली के सुल्तानों!
संदीप देव । सुनो ओ दिल्ली के सुल्तानों! सुनो ओ लखनऊ के…
एक सुबह जब मैं घर से निकला!
एक सुबह,जब मैं घर से निकला,देखा तुम छत पर,ओस की बूंदों सी…
हिंदी कविता: भरी दुनिया में मैं अकेला हूं!
इस भरी दुनिया में अकेला हूं,पुस्तकों से मेरी यारी है,पुस्तकें ही छोड़…
