शांतिपूर्ण सत्ता परिवर्तन , परमावश्यक अब देश में ;
हमें चाहिये अच्छा-शासन , “राम-राज्य” हो देश में ।
“राम-राज्य” का मतलब समझो, पूरी तरह कानून का शासन ;
जस का तस कानून हो लागू , शत-प्रतिशत हो पूर्ण-सुशासन ।
जनादेश सर्वोच्च चाहिये , जन – आकांक्षा पूरी हो ;
निष्पक्ष-चुनाव कराना होगा , जनता से न दूरी हो ।
गला न्याय का बहुत घुट चुका , बंद करो अब इसकी हत्या ;
लोकतंत्र का प्राण न्याय है, न्याय की हत्या है आत्महत्या ।
न्याय की हत्या – सत्य की हत्या , यही धर्म की है हत्या ;
धर्म बिना निष्प्राण है जीवन , तत्काल बंद हो इसकी हत्या ।
धर्म – सनातन छोड़ने वाले , हिंदू ! अपने ही हत्यारे हैं ;
अपना – जीवन नर्क बनाते , ये इतने बेचारे हैं ।
अब्बासी-हिंदू नेता के अंधभक्त, अपना सत्यानाश कर रहे ;
अब्बासी-हिंदू भारत के नेता, देश का पूर्ण-विनाश कर रहे ।
ये अब्राहमिक-ग्लोबल-एजेण्डा , हिंदू-धर्म मिटाने का है ;
हिंदू ! भली-भांति ये जानो , वरना तू मिट जाने का है ।
सरकारें सब खेल रही हैं , म्लेच्छ – देशों के हाथों में ;
सरकारें डर कर नाच रहीं हैं, सब-कुछ है म्लेच्छों के हाथों में ।
राजनीति की गंदी – चालें , भारत के नेता खेल रहे हैं ;
अरब-अमेरिका-चीन के आगे , अपने घुटने टेक रहे हैं ।
क्या स्वतंत्रता नष्ट हो चुकी ? क्या भारतवर्ष गुलाम है ?
क्यों नेता मजबूर है इतना? इसका कारण क्या गंदे-काम हैं ?
ब्लैकमेल हो रहा जो नेता ,उसकी सरकार हटाना होगा ;
सुप्रीम-कोर्ट आगे आ जाओ , निष्पक्ष-चुनाव कराना होगा ।
सुप्रीम-कोर्ट तेरे हाथों में , अब भारत का सम्पूर्ण-भविष्य ;
भारत-वर्ष बचेगा कैसे ? निष्पक्ष-चुनाव में छिपा भविष्य ।
शांतिपूर्ण बस यही मार्ग है , भारत-वर्ष बचाने का ;
निष्पक्ष-चुनाव इकलौता मार्ग है, लोकतंत्र जीवित रखने का ।
चुनाव-आयोग की पूर्ण-मरम्मत , सर्वप्रथम करना होगा ;
निष्पक्ष-चुनाव-आयुक्त बनाओ, यही सुनिश्चित करना होगा ।
फिर से बैलट-पेपर लाओ , ई वी एम हटाना होगा ;
पारदर्शी हो सभी प्रक्रिया , सबका विश्वास जगाना होगा ।
सबके विश्वास की थोथी-बातें, अब तक बस केवल नारा है ;
इसको धरती पर लाना होगा , ये अधिकार हमारा है ।
जनविश्वास जगाना होगा, इस अनिवार्य-कार्य को करना है ;
सुप्रीम-कोर्ट अब देर मत करो , क्या भारत-वर्ष मिटाना है ?
“जय सनातन-धर्म”, रचनाकार : ब्रजेश सिंह सेंगर “विधिज्ञ”
