“सुब्रमण्यम-स्वामी” नेतृत्व के लायक
ये भले काम भी कर सकता था , पर कभी नहीं ये करता है ;
केवल झूठा – प्रोपेगैण्डा , हर स्तर पर करता है ।
अरबों-खरबों के विज्ञापन , प्रेस-मीडिया अखबार को देता ;
सीधी तरह से जो न माने , ई डी – पुलिस को भिजवा देता ।
डर से भय से लोभ लालच से,केवल अपना ही प्रचार कराता ;
धर्महीन – अज्ञानी हिंदू की , आंखों में ये धूल झोंकता ।
क्यों आखिर ये ऐसा है ? क्यों कोई अच्छा-काम न करता ?
क्योंकि पापों का पुतला है ये , केवल पाप किया करता ।
हद दर्जे का चरित्रहीन है , जीवन का हर-अध्याय है काला ;
षड्यंत्र ही केवल कर सकता है , उसी में है नम्बर आला ।
ए सी वाई पी एल की ट्रेनिंग , अमरीका में इसने पायी ;
विषकन्याओं से कितना चक्कर ? कितनी सीडी बनवायी ?
ब्लैकमेल अमरीका करता , कठपुतली सा नचा रहा ;
इसके बाद है चीन का नम्बर , भारत को कितना लूट रहा ?
एपस्टीन – फाइल का खिलाड़ी , जाने कितने गंदे-खेल ?
धन्य – धन्य अमरीकी – संसद , कानून का डंडा रेलमपेल ।
एपस्टीन – फाइल निर्माता , इजरायल वो देश है ;
अपनी उंगली पर नचा रहा है , चलता उसका आदेश है ।
अपने कुकर्मों से मजबूर ये नेता, कभी न अच्छा काम करेगा ;
पर बहुत शीघ्र ये डूबने वाला, साथ में भारत ले डूबेगा ।
जागो हिंदू ! अब तो जागो , भारत-वर्ष डूबने वाला ;
तेरी धन-दौलत धरी रहेगी , परिवार सहित मिटने वाला ।
ब्रेनडेड जितना भी हिंदू , बुद्धि जिनकी लकवाग्रस्त ;
किसी दशा में नहीं बचेंगे , पूरी तरह ये आपदाग्रस्त ।
पर सामान्य बुद्धि का जितना हिंदू,अपने बचने का जतन करो;
वस्तु स्थिति को ठीक से समझो , सही दिशा में कदम धरो ।
हिंदू के सौभाग्य से अब भी, कुछ श्रेष्ठ बचे हैं मार्ग-प्रदर्शक ;
तुझको सही मार्ग दिखलाते,अनुसरण करो मत बनना दर्शक ।
शंकराचार्य जी , संदीप-देव , मधु-किश्वर हैं व विशाल सिंह ;
सुब्रमण्यम-स्वामी नेतृत्व के लायक,गीदड़ों बीच इकलौता सिंह
भारत का कल्याण जो चाहो , अच्छे-नेता को लाना होगा ;
वरना जीना-मरना अधिकार तुम्हारा, जैसा चाहो करना होगा ।
जीवन-मृत्यु तेरे हाथों में , जो भी चाहो सो पाओ ;
सम्मान सहित यदि तुझको जीना, तो अच्छी-सरकार बनाओ ।
जान-माल-सम्मान बचाना , अच्छी-सरकार के हाथों में ;
और अच्छी-सरकार बनाना , हिंदू ! तेरे ही हाथों में ।
“जय सनातन-धर्म”, रचनाकार : ब्रजेश सिंह सेंगर “विधिज्ञ”
