गिरधारी लाल गोयल । संघ के पाले हुए नाग 27 आरएसएस के प्रोटोकॉल में 3 नंबर की स्थिति रखने वाले एक वरिष्ठ प्रचारक ने अपना स्वयं का एक संस्थान या थिंक टैंक स्थापित किया है
‘विद्या अध्ययन केंद्र’ जिसका मुख्यालय दिल्ली के सबसे पॉश इलाके नॉर्थ एवेन्यु में है… वहाँ जहां कि जो सांसदों को आवास अलॉट होते हैं….. इस थिंक टैंक में ऐसे लोगो को कार्य दिया गया है जो पहले वामपंथी विचारधारा से सम्बंधित थे.
खैर आजतक इस थिंक टैंक से कोई थिंक नहीं निकला बल्कि उक्त थिंक टेंक से से विश्वविद्यालय के कुलपति, संस्थान का निदेशक व किसी किसी एजेंसीज का चेयरमैन या सदस्य सचिव या फैकल्टी चयन में प्रमाणपत्र अवश्य मिल जाता है.
इन भाईसाहब जी को वाराणसी स्थित बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय से विशेष लगाव है .. लगाव इतना है की BHU में एनाटोमी डिपार्टमेंट की महिला प्रोफेसर के भाईसाहब से सबंध जगजाहिर है. वह महिला इतना रसूख रखती है की कई कांड में शामिल उस महिला का कोई कुछ भी नहीं बिगाड़ सका .. जबकि उसने BHU में लगे हुए चन्दन के वृक्षों को कटवा दिया था जिसको लेकर बहुत बवाल हुआ था.
दूसरा मामला भी BHU से एक महिला का है, उक्त महिला को प्रचारक जी ने BHU से बाबा भीमराव आंबेडकर लखनऊ का रजिस्ट्रार बनवा दिया
फिर एक दिन 26 लाख के आर्थिक गबन के आरोप में उस महिला को BBU छोड़कर BHU आना पड़ा चूँकि उस महिला के प्रचारक जी से विशेष संपर्क है तो उन्होंने ने उस महिला को BHU में जॉइंट रजिस्ट्रार बनवा दिया…
उत्तर प्रदेश महिला आयोग की सदस्य की बहू ने JNU में सहायक प्रो के रूप में ज्वाइन किया था .. चूँकि भाईसाहब उत्तर प्रदेश से है और मथुरा-अलीगढ गृह नगर होने के कारण प्रदेश महिला आयोग की सदस्य की बहु से भी भाई साहब के परिचय की बदौलत वो JNU में सहायक प्रोफेसर से सह व उसके बाद प्रोफेसर बन गयी
जिस महिला ने JNU में कभी भी राष्ट्रवादी विचारधारा का समर्थन तक नहीं किया हो उस महिला को JNU में डीन ऑफ़ स्टूडेंट तक बनवा दिया.
प्रमोशन इतना दिया की वर्तमान में वह महिला 3 केन्द्रीय विश्वविदालय (वर्धा, तमिलनाडु व झारखंड) की कार्यकारी परिषद्/EC (विश्वविदालय की सर्वोच्च संस्था) की सदस्य है. यह महिला विद्या अध्ययन केंद्र का विदेशविभाग का कार्य देखती है.
ये तीनो महिलाएं कभी भी संघ या Sangh के विविध क्षेत्र में कार्य करने वाले संगठनो कि एक्टिव तो छोड़ो साधारण सदस्य तक नहीं रहीं और न ही समर्थक … तो आखिरकार क्यों भाईसाहब इनको प्रमोट किये चले जा रहे हैं
