संदीप देव। #UGC काले कानून पर जब देश उबल रहा है तो फिर से ‘अजैविक सुल्तान’ को बचाने के लिए ‘गुलामों’ की फौज आगे आ गई है! कभी कमेटी अध्यक्ष कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह पर पर्चा फाड़ा जा रहा है तो कभी शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को ‘लात मार कर बाहर निकालो’ का जुमला उछाल कर फर्जी गुस्सा दिखाया जा रहा है! गुलाम अपने ‘सुल्तान’ को पुनः दूध पीता बच्चा साबित करने के प्रयास में जुट चुके हैं!

१) गुलाम भूल जाते हैं कि सामान्य वर्ग से ‘हिसाब चुकता’ का नारा किसने दिया था?
२) गुलाम भूल जाते हैं कि भीमवाद को बढ़ाने के लिए पंच-तीर्थ किसने स्थापित किए थे?
३) गुलाम भूल जाते हैं कि SC/ST act पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को किसने पलटा था?
४) गुलाम भूल जाते हैं कि सत्ता में आते ही वर्ष 2015 में SC/ST act में कड़े प्रावधान किसने जोड़े और किसने मीडिया में इसके लिए अपनी पीठ थपथपाई थी?
५) गुलाम भूल जाते हैं कि OBC मंत्रियों की अलग बैठक किसने आयोजित की थी?
६) गुलाम भूल जाते हैं कि ‘फर्जी दलित’ रोहित वेमुला के नाम पर फफक-फफक कर कौन रोया था?
७) गुलाम भूल जाते हैं कि OBC तय करने के केंद्र के अधिकार पर आए सुप्रीम कोर्ट के निर्णय को किसने पलटा था?
८) गुलाम भूल जाते हैं कि OBC को संवैधानिक दर्जा 2018 में किसने दिया था?
९) गुलाम भूल जाते हैं कि जिन्हें वह ‘हिंदु हृदय सम्राट’ के रूप में पेंट करते थे, मंच पर पहुंचते ही वह अपनी जति कैसे बताने लगता था?
१०) गुलाम भूल जाते हैं कि OBC आरक्षण का लाभ पसमंदाओं को देने का साक्षात्कार कौन दे रहा था?
११) गुलाम भूल जाते हैं कि SC/ST आरक्षण का लाभ भी पसमंदाओं को मिले, इसके लिए ‘जस्टिस बालाकृष्णन कमेटी’ का गठन किसने किया था?
१२) गुलाम भूल जाते हैं कि देश की राष्ट्रपति के अभिभाषण में सामान्य वर्ग का नाम किसने गायब किया? क्या राष्ट्रपति को भी दिग्विजय सिंह और धर्मेंद्र प्रधान पढ़ा रहे हैं?
१३) गुलाम भूल जाते हैं कि इस देश में UPI app तक का नाम जातिवादी सोच के तहत रखा गया है?
१४) गुलाम भूल जाते हैं कि एक साथ इतने सारे जातिवादी फैसले पहले किसी सरकार में नहीं हुए थे?
* अरे यदि कांग्रेसी दिग्विजय सिंह अभी भी तुम्हारी सरकार में कानून बनवा रहा है तो फिर चुल्लू भर पानी में डूब मरो! फिर तो तुम और भी नकारा और निकम्मे हो जो 12 साल सत्ता में रहकर भी एक कांग्रेसी के कहे पर कानून बनाते हो? फिर तुम्हें तो सत्ता में रहने का अधिकार ही नहीं है!
* और रही शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पर ठीकरा फोड़ने की बात तो कोई बताए कि इस सरकार में मंत्रियों की औकात है जो बिना ‘सुल्तान’ से पूछे कानून बना दे? रेल का फीता तो रेलमंत्री की जगह ‘अजैविक सुल्तान’ काटते हैं और कानून मंत्री बनाएंगे? मूर्ख बनाने का गजब खेल चल रहा है इस देश में?
* असल में यह ‘गुजरात मॉडल’ है! अच्छा हुआ तो सब ‘अजैविक सुल्तान’ ने किया और बुरा हुआ तो अपने मंत्री और विपक्ष को दोष देकर ‘सुल्तान’ को बचा लो। ‘सुल्तान’ पर डेंट नहीं आना चाहिए, भले इसके लिए देश को ही बर्बाद क्यों न करना पड़े?
* अखिर कब तक ‘क्राफ्टेड नरेशन’ का शिकार होते रहोगे? एक केवल IT cell नहीं, 2008 से ‘सुल्तान’ का दहिना हाथ रहे एक व्यक्ति की निगरानी में बकायदा एक थर्ड पार्टी कंपनी चल रही है, जो सारे नरेशन को कंट्रोल करती है और ‘अपने सुल्तान’ को हमेशा दूध का धुला व मासूम बताने के लिए सारे झूठ, प्रपंच, डीप स्टेट व सोरस का जुमला और दूसरों व अपनों पर आरोप का खेल रचती रहती है?
कब तक अपने दिमाग को ताक पर रखकर गुलामी करोगे? मनुष्य बनो, गुलामी बहुत कर लिए!
