By using this site, you agree to the Privacy Policy and Terms of Use.
Accept
India Speak DailyIndia Speak Daily
  • समाचार
    • इवेंट एंड एक्टिविटी
    • देश-विदेश
    • राजनीतिक खबर
    • मुद्दा
    • संसद, न्यायपालिका और नौकरशाही
    • सरकारें
    • अपराध
    • भ्रष्टाचार
    • जन समस्या
    • ISD Podcast
    • ISD videos
    • English content
  • मीडिया
    • मेनस्ट्रीम जर्नलिज्म
    • सोशल मीडिया
    • फिफ्थ कॉलम
    • फेक न्यूज भंडाफोड़
  • राजनीतिक विचारधारा
    • अस्मितावाद
    • जातिवाद / अवसरवाद
    • पंचमक्कारवाद
    • व्यक्तिवाद / परिवारवाद
    • राजनीतिक व्यक्तित्व / विचारधारा
    • संघवाद
  • इतिहास
    • स्वर्णिम भारत
    • गुलाम भारत
    • आजाद भारत
    • विश्व इतिहास
    • अनोखा इतिहास
  • धर्म
    • अध्यात्म
    • सनातन हिंदू धर्म
    • पूरब का दर्शन और पंथ
    • परंपरा, पर्व और प्रारब्ध
    • अब्राहम रिलिजन
    • उपदेश एवं उपदेशक
  • पॉप कल्चर
    • मूवी रिव्यू
    • बॉलीवुड न्यूज़
    • सेलिब्रिटी
    • लाइफ स्टाइल एंड फैशन
    • रिलेशनशिप
    • फूड कल्चर
    • प्रोडक्ट रिव्यू
    • गॉसिप
  • BLOG
    • व्यक्तित्व विकास
      • मनोविश्लेषण
    • कुछ नया
    • भाषा और साहित्य
    • स्वयंसेवी प्रयास
    • ग्रामीण भारत
    • कला और संस्कृति
    • पर्यटन
    • नारी जगत
    • स्वस्थ्य भारत
    • विचार
    • पुस्तकें
    • SDEO Blog
    • Your Story
  • JOIN US
Reading: ॥ श्री हनुमते नम: ॥ 🌿
🌿🌼 श्री हनुमान चालीसा (भावार्थ एवं गूढार्थ सहित भाग – ११) 🌼🌿
Share
Notification
Latest News
वोट-चोर क्यों कुर्सी छोड़े ?
भाषा और साहित्य
मौलाना मदनी का जुल्म
राजनीतिक व्यक्तित्व / विचारधारा
जब मनमोहन सरकार ने गिरते ₹ को थाम लिया था!
मुद्दा
इंडिगो हाहाकार का असली कारण!
ISD videos
मिसप्लानिंग के कारण इंडिगो एयरलाइन ठप्प
मुद्दा
Aa
Aa
India Speak DailyIndia Speak Daily
  • ISD Podcast
  • ISD TV
  • ISD videos
  • JOIN US
  • समाचार
    • इवेंट एंड एक्टिविटी
    • देश-विदेश
    • राजनीतिक खबर
    • मुद्दा
    • संसद, न्यायपालिका और नौकरशाही
    • सरकारें
    • अपराध
    • भ्रष्टाचार
    • जन समस्या
    • ISD Podcast
    • ISD videos
    • English content
  • मीडिया
    • मेनस्ट्रीम जर्नलिज्म
    • सोशल मीडिया
    • फिफ्थ कॉलम
    • फेक न्यूज भंडाफोड़
  • राजनीतिक विचारधारा
    • अस्मितावाद
    • जातिवाद / अवसरवाद
    • पंचमक्कारवाद
    • व्यक्तिवाद / परिवारवाद
    • राजनीतिक व्यक्तित्व / विचारधारा
    • संघवाद
  • इतिहास
    • स्वर्णिम भारत
    • गुलाम भारत
    • आजाद भारत
    • विश्व इतिहास
    • अनोखा इतिहास
  • धर्म
    • अध्यात्म
    • सनातन हिंदू धर्म
    • पूरब का दर्शन और पंथ
    • परंपरा, पर्व और प्रारब्ध
    • अब्राहम रिलिजन
    • उपदेश एवं उपदेशक
  • पॉप कल्चर
    • मूवी रिव्यू
    • बॉलीवुड न्यूज़
    • सेलिब्रिटी
    • लाइफ स्टाइल एंड फैशन
    • रिलेशनशिप
    • फूड कल्चर
    • प्रोडक्ट रिव्यू
    • गॉसिप
  • BLOG
    • व्यक्तित्व विकास
    • कुछ नया
    • भाषा और साहित्य
    • स्वयंसेवी प्रयास
    • ग्रामीण भारत
    • कला और संस्कृति
    • पर्यटन
    • नारी जगत
    • स्वस्थ्य भारत
    • विचार
    • पुस्तकें
    • SDEO Blog
    • Your Story
  • JOIN US
Have an existing account? Sign In
Follow US
  • Website Design & Developed By: WebNet Creatives
© 2022 Foxiz News Network. Ruby Design Company. All Rights Reserved.
India Speak Daily > Blog > धर्म > सनातन हिंदू धर्म > ॥ श्री हनुमते नम: ॥ 🌿
🌿🌼 श्री हनुमान चालीसा (भावार्थ एवं गूढार्थ सहित भाग – ११) 🌼🌿
सनातन हिंदू धर्म

॥ श्री हनुमते नम: ॥ 🌿
🌿🌼 श्री हनुमान चालीसा (भावार्थ एवं गूढार्थ सहित भाग – ११) 🌼🌿

ISD News Network
Last updated: 2024/07/30 at 11:29 AM
By ISD News Network 42 Views 8 Min Read
Share
8 Min Read
SHARE

श्वेता पुरोहित :-

लाय सजीवन लखन जिवाये।
श्री रघुबीर हरषि उर लाये॥

अर्थ –
हे हनुमानजी आपने संजीवनी बूटी लाकर लक्ष्मणजी को जीवाया जिससे श्रीरघुवीर ने हर्षित होकर आपको अपने हृदय से लगा लिया।

गुढार्थ –
लक्ष्मणजी रामजी के बहिचर प्राण थे, लक्ष्मण जी को यदि राम जी का दाहिना हाथ कहा जाए तो अतिशयोक्ति नहीं होगी।

More Read

काशी में अद्वितीय वैदिक तपस्या, देवव्रत महेश रेखे ने रचा इतिहास
कुशा : घास नहीं, सनातन का दिव्य-तत्त्व
गौ-चेतना का पुनर्जागरण: “गौ मतदाता संकल्प यात्रा” की घोषणा
जगद्गुरु शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी का संकल्प: धर्म, राष्ट्र और गौ-संरक्षण का संगम

रामजी हैं और लक्ष्मणजी नहीं, यह कभी संभव ही नहीं हो सकता है, रामायण में राम जी कभी अकेले थे ही नहीं।

जिस प्रकार मनुष्य के साथ उसकी छाया का होना निश्चित है, उसी प्रकार रामजी के आते ही लक्ष्मणजी का आना अनिवार्य ही है।

विश्वामित्र जी राजा दशरथ जी के पास केवल राम जी को ही मांगते हैं।

रामजी का जाना निश्चित हुआ कि लक्ष्मण जी तो चलेंगे ही, उन्हें अलग से निमंत्रण देने की आवश्यकता ही नहीं थी।

राम जी को आमंत्रित करने का अर्थ है साथ लक्ष्मण जी को आमंत्रित करना।

माँ को बुलाया कि उसके साथ तीन वर्ष के बालक को बुलाया ही समझो।

‘बालक को साथ लेती आना’ ऐसा कहना जिस प्रकार माँ का अपमान है, ठीक उसी प्रकार राम जी को बुलाने के पश्चात् लक्ष्मण जी को निमंत्रण देने का अर्थ यही समझा जाएगा कि इन दोनों के पारस्परिक संबंध का यथार्थ ज्ञान हमें नहीं है।

यदि आदमी को बुलाने के बाद उसकी छाया को उसके साथ जाने से रोका जा सकता है तो लक्ष्मणजी को भी रामजी के साथ जाने से रोका जा सकता है

दोनों में इतनी अभिन्नता थी, कोई भी कार्य करवाना हो तो राम जी को ही कहते और उनका बोलना लक्ष्मण जी को भी कहने के समान होता।

इस प्रकार भाई-भाई का अभिन्न संबंध केवल रामायण ही संसार को दिखा सकती है।

रामजी का लक्ष्मणजी पर असीम प्रेम था, रामजी के राज्याभिषेक के समय रामजी, लक्ष्मणजी के लिए जो कहते हैं वह विचार करने योग्य है।

राम जी यह नहीं कहते कि ‘मैं राजा बनने चला हूँ’ ‘लक्ष्मण, मया सार्धं प्रशाधि त्वं वसुंधराम्’ लक्ष्मण तुझे ही राज्य करना है ऐसा रामजी कह रहें हैं।

कितनी उच्च भावना है, दोनों का जीवन अभिन्न है, यदि रामजी कीर्ति की पताका है तो लक्ष्मणजी पताका का दण्ड है।

ध्वजकी पूजा करते समय काष्ठनिर्मित दंड को ही चांवल-चंदन चढ़ता है।

तुलसीदासजी ने तथा महर्षि वाल्मीकिजी ने रामचन्द्र जी का चरित्र-चित्रण करके मानव जाति के समक्ष संस्कृति का उच्च ध्येय रखा और इस ध्येय के समीप पंहूँचने के लिए लक्ष्मणजी के जैसी उग्र साधना करने का इशारा किया है।

साधक की कठोर उग्र साधना का ऐसा महान आदर्श लक्ष्मण जी ने उपस्थित किया है कि जिसकी रजकण तक पहुँचने के लिए अनेक जन्मों का परिश्रम करना पड़ेगा।

राम जी ने जिस समय लक्ष्मणजी को वन में साथ चलने को मना किया तो लक्ष्मण जी ने कहा – ‘जिस प्रकार जल के बिना मछली नहीं रह सकती उसी प्रकार लक्ष्मण भी राम के बिना नहीं रह सकता है।’

यह शब्द केवल शिष्टाचार के नाते अथवा रामजी को भला लगने के लिए नहीं बोले गये थे, लक्ष्मणजी के विशुद्ध अन्त:करण से निकले हुए ये उद्गार थे।

तभी तो जब लक्ष्मणजी को रामजी का वियोग हुआ है उसी स्थल पर रामायण की इतिश्री करनी पड़ी है।

लक्ष्मणजी का संपूर्ण जीवन रामजी की सेवा में बिता है, वे रामजी के साथ इतना घुलमिल गये थे कि राम शब्द का उच्चारण करते ही लक्ष्मणजी साथ में आते ही है।

लक्ष्मण जी जब मूर्छित होते हैं तो राम जी कहते हैं –

न हि मे जीवितेनार्थ: सीतया च जयेन वा।
को हि मे जीवितेनार्थ: त्वयि पंचत्वमागते॥

देशे देशे कलत्राणि देशे देशे च बांधवा:।
तं तु देशे पश्यामि यत्र भ्राता सहोदर:॥

ये दोनों श्लोक बतलाते हैं कि रामजी लक्ष्मणजी की ओर किस दृष्टि से देखते थे।

रामजी शब्द है और लक्ष्मणजी अर्थ, राम शब्द का अर्थ लक्ष्मण जी के कारण था, लक्ष्मणजी के बिना राम शब्द अर्थ रहित हो जाए।

तभी तो रामजी विलाप करते हुए कहते हैं:- ‘‘ सीता न मिले तो कोई बात नहीं, परन्तु यदि लक्ष्मण चला जाएगा तो मेरे प्राण निकल जायेंगे।’’

रामजी जैसे सत्यवादी पुरुष इन शब्दों का उच्चारण करते हैं।

वास्तव में देखा जाए तो रामजी कौशल्याजी के पुत्र और लक्ष्मणजी सुमित्राजी के पुत्र, फिर भी रामजी ‘सहोदर:’ (एक माँ के पेट से जन्मे हुए भाई) शब्द का प्रयोग करते हैं, यही बात दोनों के संबंध की विशिष्टता समझाती है।

लक्ष्मणजी जब रामजी के साथ वन गमन के लिए निकले तो अपनी पत्नी उर्मिलाजी को केवल ‘मैं जाता हूँ ’ इतना ही कहकर चल पड़े।

‘मैं जाऊँ या न जाऊँ’ यह पूछा तक नहीं, पत्नी की राय तो लेनी चाहिए, परन्तु नहीं ली, पती कर्तव्य का विचार ही नहीं किया।

जहाँ राम जी का संबंध आ गया वहाँ उन्हें दूसरी कोई बात सूझती ही नहीं थी।

उनके मन मे कभी भी धर्म और कर्तव्य के विचारों का संघर्ष रामजी के प्रेम के साथ नहीं हुआ, क्योेंकि उनका कर्तव्य एक मात्र राम जी ही थे।

उनके मन में राम जी के सिवाय दूसरा कर्तव्य नहीं, रामजी के सिवाय अन्य विचार नहीं।

धन्य उर्मिलाजी और धन्य है लक्ष्मणजी, धन्य है वह उर्मिला जी जिसने अपना व्यक्तित्व पति में एकरस कर डाला और धन्य है वह लक्ष्मण जी जिसने अपना समस्त जीवन राम जी की छायारुप बना डाला।

लक्ष्मण जी को रामजी के कीर्तिध्वज की लाठी ही समझो, क्योंकि लक्ष्मणजी के ही कारण रामरुपी ध्वज फहराता है।

हनुमान जी लक्ष्मण जी के प्राण बचाने के लिए संजीवनी बूटी लेने जाते है। बुटी की पहचान न होने के कारण हनुमान जी अपनी बुद्धि और बल का प्रयोग कर विराट रूप धारण कर पूरा पर्वत ही उठा लाते है। संजीवनी के उपचार से ही लक्ष्मण जी के प्राण बच पाते है इसी लिए गोस्वामी तुलसीदास जी ने कहा है “लाय संजीवन लखन जियाये” प्रभु श्री राम के सभी संकटो को दूर करने के कारण ही हनुमान जी को संकटमोचन भी कहा जाता है।

लक्ष्मण जी की मूर्छित अवस्था के कारण प्रभु श्री राम बहुत दुखी होते है । लक्ष्मण जी की मूर्छा टूटने के बाद प्रभु श्री राम के मुख पर पुनः प्रसन्नता आ जाती है, ओर प्रभु श्री राम हनुमान जी को अपने ह्रदय से लगा लेते है।
लाय सजीवन लखन जियाये, श्री रघुवीर हरषि उर लाये ॥

क्रमशः

श्रीराम जय राम, जय जय राम, जय जय जय सीता राम 🙏
कोटि कविकुल तिलक श्रीहनुमानजी की जय 🙏

Related

TAGGED: राम जी, लक्ष्मण जी', संजीवनी बूटी, सीता
ISD News Network July 30, 2024
Share this Article
Facebook Twitter Whatsapp Whatsapp Telegram Print
ISD News Network
Posted by ISD News Network
Follow:
ISD is a premier News portal with a difference.
Previous Article श्रावण मास महात्म्य (सप्तम अध्याय) 🔱🌼🌿
Next Article महाभागवत श्रीज्योतिपन्त
Leave a comment Leave a comment

Share your CommentCancel reply

Stay Connected

Facebook Like
Twitter Follow
Instagram Follow
Youtube Subscribe
Telegram Follow
- Advertisement -
Ad image

Latest News

वोट-चोर क्यों कुर्सी छोड़े ?
मौलाना मदनी का जुल्म
जब मनमोहन सरकार ने गिरते ₹ को थाम लिया था!
इंडिगो हाहाकार का असली कारण!

You Might Also Like

सनातन हिंदू धर्म

काशी में अद्वितीय वैदिक तपस्या, देवव्रत महेश रेखे ने रचा इतिहास

December 2, 2025
सनातन हिंदू धर्म

कुशा : घास नहीं, सनातन का दिव्य-तत्त्व

December 2, 2025
सनातन हिंदू धर्म

गौ-चेतना का पुनर्जागरण: “गौ मतदाता संकल्प यात्रा” की घोषणा

September 12, 2025
सनातन हिंदू धर्म

जगद्गुरु शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी का संकल्प: धर्म, राष्ट्र और गौ-संरक्षण का संगम

September 8, 2025
//

India Speaks Daily is a leading Views portal in Bharat, motivating and influencing thousands of Sanatanis, and the number is rising.

Popular Categories

  • ISD Podcast
  • ISD TV
  • ISD videos
  • JOIN US

Quick Links

  • Refund & Cancellation Policy
  • Privacy Policy
  • Contact Us
  • Terms of Service
  • Advertise With ISD
- Download App -
Ad image

Copyright © 2015 - 2025 - Kapot Media Network LLP. All Rights Reserved.

Removed from reading list

Undo
Welcome Back!

Sign in to your account

Register Lost your password?