श्वेताभ पाठक श्वेत प्रेम रस। प्रश्न- गायत्री मंत्र और महामृत्युंजय मंत्र जाप के बारे में बहुत जिज्ञासा है जानने की l क्या स्त्री को कभी गायत्री मंत्र जप नही करना चाहिए?
उत्तर: आदरणीय श्री श्वेताभ पाठक भैया जी
मात्र गर्भिणी स्त्री और रजस्वला स्त्री के लिए वर्जित है ।
गायत्री मंत्र पर बहुत बार चर्चा हो चुकी है ।
मैंने बताया था कि मन्त्र किसे कहते हैं , गायत्री मंत्र का अर्थ क्या है ।
लेकिन गायत्री मंत्र गायत्री छंद पर आधारित है । इसके शब्दों को विशिष्ट आवृत्ति से यह प्राणवायु को ऊर्ध्व गति देता है ।
सब मंत्रों के अलग अलग विशिष्ट नियम , गुण और विशेषता होती है ।
तो जो जिस छंद में होगा , वह उसी के अनुरूप अपना प्रभाव दिखायेगा ।
जैसे कोई संगीत की तरंगें ऐसी होती हैं कि उसको सुनते ही दुःख का आभास होता है , कोई ऐसे होते हैं कि भुजायें फड़कने लगती हैं जैसे युद्ध की भेरी इत्यादि ।
तो यह सब तरंगों का कमाल होता है ।
तो गायत्री मंत्र जिस छंद में है उससे जो तरंगे निकलती हैं ( अगर ठीक ठीक उदात्त अनुदात्त स्वरित इत्यादि ठीक ठीक लगाये गए ) जो प्राण वायु को ऊर्ध्व गति देती हैं ।
जो गर्भिणी स्त्रियाँ होती हैं , जन्म देने के लिए अपान वायु का नीचे की ओर होना आवश्यक है ।
ज्यों ज्यों गर्भवस्था में समय बढ़ता है अपान वायु बालक को नीचे की ओर धकेलना शुरू करती है जिसे प्रसूति वायु बोलते हैं ,इसी से बच्चे का जन्म होता है ।
अब अगर यह प्रसूति वायु या अपान वायु ऊपर की ओर बढ़ने लगेगी तो बच्चे को और स्त्री को दोनों को बहुत समस्या होगी । इसलिए यह वर्जित है ।
ऐसे ही मासिक धर्म के समय गर्भ को साफ करने के लिए जो अपान वायु चलती है वह दूषित या खराब रक्त को नीचे धकेलती है ।
अब अगर इन दोनों समय कोई ऐसी तरंगे प्रभावित करें जहाँ प्राण वायु अर्थात अपान वायु ऊपर की ओर चढ़ने लगे तो स्त्रियों को अत्यधिक समस्या आती है , जिसके कारण वह मानसिक एवं शारीरिक रूप से भी अस्वस्थता की स्थिति में आ जाती हैं ।
इसी हेतु यह सब निषेध है ।
लेकिन यह पता करना या checklist लगाना कि कौन गर्भवती है और कौन रजस्वला है ,इसके लिए सभी स्त्रियों को लपेटे में ले लिया गया ।
