संदीप देव। “बंगाल में मुस्लिमों ने गाय खरीदने से किया मना, सड़कों पर उतरे हिंदू।” मीडिया ऐसी हेडिंग के जरिए गो हत्या को प्रोत्साहित करने में जुटी हुई है। बंगाल में भाजपा की सुवेंदु सरकार ने ईद आदि पर पशुओं की हत्या पर रोक लगाकर बहुत ही सराहनीय कार्य किया है।
मीडिया ऐसी हेडिंग के जरिए सरकार पर दबाव बनाना चाहती है कि वह अपना फैसला वापस ले ले! संभवतः इसमें बीफ एक्सपोर्टर लॉबी, उनसे चंदा लेने वाले और उसके समर्थक नेताओं की महत्वपूर्ण भूमिका हो।
उधर दूसरी ओर न्यूज24 की खबर के अनुसार, “कोलकाता हाई कोर्ट ने ईद से पहले पशुओं की हत्या पर पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से लगाई गई रोक को बरकरार रखा है। कोर्ट ने इसे चुनौती देने वाली याचिकाओं को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने 1950 के पशु हत्या कानून के तहत मजहबी आधार पर छूट देने और भैंस, बैल आदि की हत्या की इजाजत देने की मांग को अस्वीकार कर दिया है। हालांकि, कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि वह 27/28 मई को ईद के अवसर पर क्या किसी छूट की आवश्यकता होगी, इस पर 24 घंटे के भीतर विचार करें।”

तीसरी ओर, ज्योतिष्पीठाधीश्वर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी महाराज ने बंगाल में गाय बेचने के लिए बेचैन हिंदुओं को राहत देते हुए यह घोषणा की है कि “जो हिंदू हर हाल में गाय बेचना ही चाहते हैं तो वह कसाई की जगह मुझे बेचें।” शंकराचार्य जी की गोशाला में उन गायों की देखभाल होगी।

ज्ञात हो कि बंगाल में पहले ईद-बकरीद के अवसर पर सार्वजनिक जगहों पर पशुओं को काटा जाता था। इसे रोकने के लिए भी ज्योतिष्पीठाधीश्वर शंकराचार्य और उनके वरिष्ठ अधिवक्ता पी.एन.मिश्र. ही आगे आए थे और कोलकाता हाईकोर्ट में याचिका डाली थी कि ईद-बकरीद के नाम पर सार्वजनिक जगहों पर पशुओं की हत्या रोकी जाए।
उनकी ही याचिका पर कोलकाता हाईकोर्ट ने बंगाल में ईद आदि पर सार्वजनिक जगहों पर पशु हत्या को बैन किया था, अन्यथा पहले बंगाल की सरकार ईद-बकरीद के अवसर पर दो-तीन दिनों के लिए सार्वजनिक जगहों पर पशु हत्या में छूट का अध्यादेश जारी कर देती थी।
शंकराचार्य जी एवं उनकी लीगल टीम ने विजय पाई थी तब जाकर बंगाल में सार्वजनिक रूप से पशु हत्या बंद हुई और पशु जनगणना के अनुसार इस कारण बंगाल में गायों की संख्या लगातार बढ़ती चली गई। शंकराचार्य जी अभी भी प्रयास कर रहे हैं कि “जो हिंदू पैसे के कारण गाय को कसाई के हाथों बेचता है, यदि पैसा ही उसके लिए सबकुछ है तो पैसा हम देंगे, लेकिन गाय को कसाई के हाथों मत बेचो। हमें दे दो। हम पैसा देंगे।” शंकराचार्य जी इसके लिए OLX की तर्ज पर G-OLX नामक वेबसाइट बनाने जा रहे हैं, जिस पर गाय बेचने वाले पंजीकरण करा कर अपनी गाय बेच सकते हैं। उन्हें शंकराचार्य जी की पीठ की ओर से बाजार भाव से रकम का भुगतान कर दिया जाएगा।
कल सोशल मीडिया पर कुछ विधर्मी महिला/पुरुष शंकराचार्य जी के इस कदम की आलोचना करने में जुटे थे। समझ नहीं आता, गाय की रक्षा के लिए शंकराचार्य जी द्वारा उठाए इस अत्यंत सराहनीय कदम से इन्हें इतनी पीड़ा क्यों हो रही है?
असल में हिंदू वेश में कालनेमियों की एक बड़ी फौज खड़ी हो गई है, जिसका हिंदू धर्म के मूल से कोई लेना-देना नहीं है! इनका हिंदुत्व केवल राजनीतिक है। जैसे वामपंथी हिंदू, हिंदू नहीं होता, वैसे ही संघी-पार्टीबाज-गो द्रोही हिंदुओं को भी हिंदू कहना उचित नहीं है। इनको हिंदू की जगह विधर्मी या नास्तिक कहना ज्यादा उचित होगा। धन्यवाद । जय गो माता।
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