संदीप देव। मैंने शक म्लेच्छ भागतानंद के हाथ में स्थित ‘शैतानी दंड’ का राज खोला था। वह इसे ब्रह्म दंड कहता था और उस पर श्रीहरि विष्णु के विग्रह को बिगाड़ पर एक आंख वाले शैतानी विग्रह की उसने स्थापना कर रखी है। मेरे एक्सपोज करते ही उसने महाभारत के एक अधूरे श्लोक का उपयोग किया और पकड़ा गया। वह श्लोक राजदंड से संबंधित था और उस पर भी ‘इल्युमिनाती’ का प्रतीक चिह्न एक आंख नहीं था।
जब मैंने महाभारत का पूरा श्लोक जारी कर दिया तो उसने कल इस पर एक वीडियो किया। अब तो वह और भी बुरी तरह एक्सपोज हो गया है! भागतानंद ने राजदंड-ब्रह्मदंड पर कुतर्क कर अपने अशास्त्रीय होने का पूरा प्रमाण दे दिया है।
इसने मान लिया है कि नारायण की एक आंख इसने ‘अपनी परंपरा’ के अनुसार लगाई है। ‘अपनी परंपरा’ अर्थात् इस्लामी ‘कालिया-जिन्न’ की साधना करने वाली पैशाचिक परंपरा। एक आंख तो असुर गुरु शुक्राचार्य का ही था। उनकी एक आंख भगवान विष्णु से द्वेष में फूट गई थी। म्लेच्छ भागतानंद ने भी अपनी आसुरी प्रवृतियों के कारण श्रीहरि विष्णु से अपने द्वेष के कारण अपने दंड पर उनकी एक आंख गायब कर दी है!
कल इस म्लेच्छ ने यह कह कर कि ‘मैंने अपनी परंपरा के कारण दंड पर एक आंख का चिह्न धारण किया है’, अपने मुंह से यह स्वीकार कर लिया कि यह आसुरी परंपरा का व्यक्ति है। अब भी हिंदुओं की आंखें इसकी ओर से न खुले तो ऐसे हिंदुओं को स्वयं श्रीहरि विष्णु भी नहीं बचा सकते हैं।
दूसरा झूठ भी इसने अपने मुंह से स्वीकार कर लिया। इसने कहा कि ‘ब्रह्म दंड के अंतर्गत ही राजदंड भी होता है।’ इसे यह तक नहीं पता कि शास्त्रों में ब्रह्मदंड बांस का बताया गया है, चांदी का शैतानी विग्रह वाला नहीं।
रामायण और महाभारत में वशिष्ठ जी और विश्वामित्रजी के संघर्ष में वशिष्ठ जी के बांस वाले ब्रह्म दंड की चर्चा आई है। आदिशंकराचार्य जी ने भी ‘यतिदंडैश्वर्य विधानम’ में बांस के दंड की बात की है। फिर धातु मुख वाला शैतानी दंड इसने क्यों धारण किया है?
अर्थात् कल के वीडियो में इसने अपने मुंह से मान लिया कि इसे शास्त्रीय ब्रह्म दंड के बारे में रत्ती भर भी जानकारी नहीं है। ईश्वर की लीला देखिए, इस शक म्लेच्छ के मुंह से ही इसका सच वह खुलवाते जा रहे हैं कि इसे शास्त्रों का कोई ज्ञान नहीं है। बस तोते की तरह कुछ श्लोक इसने रट रखा है और उसी आधार पर हिंदुओं को मूर्ख बनाते हुए आचार्यों को गाली देता रहता है!
कल एक वीडियो में इसने यह भी माना कि यह ‘चोर’ है। इसने अपनी पुस्तक ‘धुरंधर संहिता’ में सनातन धर्मशास्त्रों से चोरी करके श्लोक डाले हैं और उसे अपना बता दिया है। कल इसने स्वीकार किया कि करीब 25% श्लोक इसने चुराए हैं, जबकि चोरी इससे कहीं अधिक है। सनातन धर्म ग्रंथों की चोरी कर और उसकी मनमानी व्याख्या कर यह सनातन धर्म से खुलेआम खिलवाड़ कर रहा है और सारे आचार्य चुप हैं!
स्वामी सियारामदास जी पर अनर्गल टिप्पणी करने पर भी इसने माना कि इसे उनका आशय समझ नहीं आया था। उनके प्रश्न समझ नहीं आए थे। अर्थात् अपनी धूर्तता और चोरी के साथ-साथ अपनी मूर्खता का यह खुलकर प्रदर्शन कर रहा है। बिना प्रश्न समझे ही यह किसी पर भी हमला कर बैठता है। यह अधम और निर्लज्ज है। बार-बार मुंह की खाने के बाद ही अपनी धूर्तता व बेशर्मी से बाज नहीं आता है।
यह खुलेआम शास्त्रों में मिलावट कर रहा है, उसे विकृत कर रहा है। सभी शंकराचार्यों एवं आचार्यों को इसके अशास्त्रीय कदाचरण पर बोलना चाहिए। जब संघ प्रमुख मोहन भागवत ने शास्त्रों में सुधार की बात कि तो आचार्य सहित पूरा हिंदू समाज उबल पड़ा था, लेकिन यह खुलेआम शास्त्रों को विकृत कर रहा है, उनकी मनमानी व्याख्या कर रहा है और समाज चुप है! ऐसी स्थिति में मौन रहना इसके पाप कर्म को बढ़ावा देना होगा। इसके विरुद्ध बोलना ही धर्म है।
इसके पूर्वजों ने भी शास्त्रों में अमर्यादित मिलावट की है, जिसके कारण यह शक म्लेच्छ भागतानंद ‘प्रक्षिप्तवाद’ का खुला समर्थक है। उदाहरण के लिए इसके लोग सांब उप-पुराण का बड़ा नाम लेते हैं। सांब उप-पुराण में इसके पूर्वजों ने भगवान श्रीकृष्ण, उनके पुत्र सांब और श्रीकृष्ण की पत्नियों का जमकर चरित्रहनन किया है। मिलावट करते हुए इन म्लेच्छों ने यह तक लिखा है कि पुत्र सांब को देखते ही उनकी माताएं कामातुर हो गई और उनका रज बहने लगा! क्या किसी पुत्र को देखकर मां के अंदर ऐसी विकृत काम भावना पनप सकती है?
शकों और बौद्धों ने अपनी मानसिक विकृति को हमारे शास्त्रों में उड़ेल कर दूषित किया है। अब हिंदू समाज बताए माता-पुत्र के ऐसे संबंधों को वह स्वीकारेगा? भगवान का यह अपमान उसे बर्दाश्त है? इन शक म्लेच्छों के तो बड़े-बड़े कारनामें हैं, जो मैं पब्लिक में रखूंगा।
इसने कहा है कि यह शक-मगों पर अपना बयान देगा। इसके बयान के बाद मैं बड़े-बड़े विद्वानों का निष्कर्ष शक म्लेच्छों पर लोगों के सामने रखूंगा। और हां, मेरा मुंह बंद कराने के लिए इसके फतवे के बाद इसके समाज के लोगों ने पूरे देश भर में मेरे ऊपर मुकदमा दर्ज कराना आरंभ कर दिया है। अभी तक 6 मुकदमा दर्ज कराया जा चुका है। यह पूरे हिंदू समाज के लिए अच्छा है! अब सुप्रीम कोर्ट में सनातन धर्म ग्रंथों के साथ शकों द्वारा किए कदाचार और मिलावट को साक्ष्य सहित रखा जाएगा, तब यह और बिलबिलाएंगे!
