Ujjawal Trivedi । धुरंधर फिल्म बनाने वालों से मेरे दस सवाल
1. नोटबंदी ने hawala तोड़ा — यह आपने screen पर दिखाया। लेकिन जिन अर्थशास्त्रियों ने इसे विफल बताया, जो आँकड़े RBI ने खुद दिए — क्या वो सब झूठ था? या सिर्फ आपकी कहानी के रास्ते में था?
2. 2007 से 2009 का भारत आपकी फिल्म में पाकिस्तान के इशारे पर नाचता दिखता है। उस दौर की चुनी हुई सरकार के लाखों समर्थक आज भी ज़िंदा हैं — क्या उनकी भावनाओं की कोई कीमत नहीं?
3. URI बनाई, Dhurandhar बनाई — हर बार “पहले अंधेरा था, अब रोशनी है” वाला narrative। आदित्य धर जी, यह pattern coincidence है या conscious choice?
4. Jio Studios का पैसा, सरकारी tax benefits, multiplex support — और कहानी में specific political decisions की जीत। तो honestly बताइए — यह independent cinema है या State-endorsed spectacle?
5. अगर कोई filmmaker कल एक फिल्म बनाए जिसमें नोटबंदी को देश की बर्बादी की तरह दिखाए — तो क्या आप उसका उतना ही समर्थन करेंगे जितना आप अपनी फिल्म का करते हैं?
6. अक्षय खन्ना जैसे actor को आपने पहले पार्ट में ही खत्म कर दिया — और दूसरे पार्ट में अर्जुन रामपाल को वो space नहीं मिली जिसके वो हकदार थे। क्या यह casting का अपमान नहीं?
7. करीब चार घंटे की फिल्म — क्या यह दर्शक की ज़रूरत थी या director का वो ego था जिसे कोई editor रोक नहीं सका?
8. संजय दत्त, आर. माधवन, अर्जुन रामपाल — तीन powerhouse actors और तीनों underused। इतने बड़े नाम सिर्फ poster पर चाहिए थे या कहानी में भी जगह देनी थी?
9. आपने कहा यह फिल्म real events से inspired है — तो फिर नोटबंदी और pre-2014 सरकारों वाले scenes के लिए आपके पास कौन से historical documents हैं? या यह सिर्फ “inspired” का convenient shield है?
10. रणवीर सिंह की performance निर्विवाद रूप से शानदार है — लेकिन क्या एक अच्छे actor की आड़ में एक कमज़ोर, politically biased screenplay को justify किया जा सकता है?
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Ujjawal Trivedi पत्रकार | कहानीकार
