गिरधारी लाल गोयल D राजा या डेनियल राजा तमिलनाडु से है। कई वर्षों से राज्यसभा में है। पिछली बार इनकी पत्नी वायनाड-केरल से लोकसभा का चुनाव लड़ी थी।
वैसे आप लोगों को 2016 को JNU का लेके रहेंगे आजादी वाला मामला तो याद होगा ना! इसकी बेटी अपराजिता ने उसमें कितनी सक्रियता से भाग लिया था
अपराजिता राजा दिल्ली यूनिवर्सिटी से अपना स्नातक के बाद JNU में परास्नातक करने के लिए आईं और नियमो को ताक में रखकर JNU का कोयना छात्रावास अलॉट करवा लिया।

ये सब हुआ। 2014 के बाद….. ये JNU में होने वाली देशविरोधी या देश तोड़क गतिविधियों की एक प्रमुख सक्रिय सदस्य रही है…. ले के रहेंगे आजादी वाले मामले में ABVP के लोगो ने जब दिल्ली पुलिस के वसंत कुंज थाने में FIR किया उसमे डेनियल राजा की पुत्री घोर वामी अपराजिता राजा का नाम भी था. शैला रसीद का भी. कुल मिलकर 45 लोगो की लिस्ट थी…
लेकिन जैसे ही डैनियल राजा को पता चला कि उनकी पुत्री पर FIR हो गया है. वे तुरंत ही अपने खास मित्र JDU के K C त्यागी को लेकर तत्कालीन केंदीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह के पास गए (KC त्यागी राजनाथ के परम मित्र है)
डैनियल राजा ने केंद्रीय गृह मंत्री से बताया कि उनकी वामी बेटी का कैरियर खराब जाएगा अगर चार्जशीट दाखिल हो गयी….. फिर क्या था
गृहमंत्री जी ने तत्काल तत्कालीन दिल्ली पुलिस आयुक्त को आदेश दिया कि अपराजिता राजा का नाम उस लिस्ट से हटा दिया जाए…
और दिल्ली पुलिस ने वही किया….
लेकिन आज इस आस्तीन के सांप को देखो
संघ की सौ साल की सबसे बड़ी उपलब्धि ये भी है कि जिसने हिन्दुओँ की जितनी मारी उसकी सत्ता के मजे में बड़ी हिस्सेदारी
ये हैं बद्रीनारायण तिवारी, जिसको कि TISS विश्वविद्यालय का कुलपति नियुक्त किया गया है।
केंद्र सरकार द्वारा अब टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (TISS) को जब डीम्ड यूनिवर्सिटी का दर्जा मिला तो कुलपति की नियुक्ति का अधिकार केंद्र सरकार की मिनिस्ट्री ऑफ एजूकेशन के पास आ गया और केंद्र सरकार ने प्रो बद्रीनारायण तिवारी को पहला कुलपति नियुक्त कर दिया जबकि यह 2 वर्षो से खाली चल रहा था।
JNU में सुखदेव थोराट द्वारा हिन्दूद्वेष के लिए 2012 में एक सेन्टर खोला गया जिसका नाम है, The Centre for the Study of Discrimination and Exclusion (CSDE)। थोराट के अनुसार भारत मे दलितों के साथ जो कथित भेदभाव व शोषण होता है, सेंटर के माध्यम से उसकी स्टडी व डेटा कलेक्शन हो….. वह डेटा ye संस्थान EU व UN को देते है ताकि यूनाइटेड यूनियन उसकी एजेंसीज, यूरोपियन यूनियन, ऑस्ट्रेलिया आदि से भारत के ऊपर दबाव बनाया जाए कि आज भी SC/ ST व OBCs का शोषण होता है….. इसलिये उनको रिलीजियस फ्रीडम दे दिया जाए, वे हिन्दू से बुद्धिस्ट या बुद्धिज़्म में जाये वे धर्मांतरण करने को स्वतःत्र है, इसमे मूलनिवासी थ्योरी भी आई कि ये वहां के मूलनिवासी है उंसके वावजूद सवर्णो द्वारा उनका शोषण जारी है…
बद्रीनारायण उसी सेन्टर में प्रो के रूप में तैनात हुआ, फिर बद्रीनारायण ईसाई मिशनरियों के एजेंडे पर कार्य करने लगा इसने ‘दलितों का शोषण होता है’ इस पर कई पुस्तकें लिखी एक पुस्तक लिखी “हिंदुत्व का मोहनी मंत्र” जिसमे आरएसएस की आलोचना किया कि कैसे दलितों को बेबकूफ बनाया जाता है। 9 Feb,2016 को जब JNU में टुकड़े टुकड़े गैंग द्वारा जो कार्यक्रम हुआ था उंसमें इस बद्रीनारायण नें उसी गैंग की तरफ से भाषण आदि दिया था…
उंसके बाद संघ की तरफ से इसको बुलाकर प्रयागराज स्थित GB पंत इंस्टिट्यूट का डायरेक्टर बना दिया गया और अब कुलपति TISS का कुलपति बना दिया गया
पहले बद्रीनारायण का नाम महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय उत्तर बिहार, मोतिहारी बिहार में कुलपति के लिए तय हो गया था…. लेकिन कुछ संगठनों के विरोध के कारण इनका पैनल निरस्त करना पड़ा… और उसके बाद इनको TISS का VC बना दिया गया
बताया जाता है कि (RSS) के सह सरकार्यवाह डॉ कृष्ण गोपाल जी ने बद्रीनारायण को बढ़ाया है
अपनी सौ साल की यात्रा में (RSS) ने अनगिनत नागौँ को दूध पिला पिला कर पुष्ट किया है
इन नागों ने भी जहर उगलने की अपनी ड्यूटी भलीभांति निभायी है

इसको 2013 के नागपुर के विज्यादशमी कार्यक्रम के मुख्य अतिथि बनाया गया था….. कार्यक्रम खत्म होने के बाद उदित राज JNU में महिषासुर शहादत दिवस (Oct 2013) में मुख्य अतिथि था
वह ‘महिषासुर शहादत दिवस’ जिसमें कि माँ दुर्गा को प्रोस्टीट्यूट/गणिका बताया गया था,
कहा गया कि ब्राह्मण नवरात्रि का व्रत इसलिए रखते है कि गणिका जिसका नाम दुर्गा है, को देवताओं, जो कि महिषासुर से डरते थे, ने हायर किया और उनको महिषासुर के महल में भेज जो 9 दिन महाप्रतापी, न्यायप्रिय राजा महिषासुर के साथ रही हनीमून मनाया और 9 वें दिन छल से महिषासुर को मार दिया।
9 दिनों तक देवता (brahmn)महल के किनारे छुपे रहे, बिना खाये पिये,
9वें दिन जब गणिका ने छल से बध कर दिया। इसी के उपलक्ष्य में ब्राह्मण नवरात्रि मानते हैं। यह मूलनिवासिओं के राजा में हत्या का जश्न है।
ध्यान देने वाली बात यह है कि जिस पत्रिका में इसको छापा गया था उनके सह संपादक Dilip C Mandal थे
खैर संघ की खुजली खत्म नहीं हुयी थी….. उदित राज को (BJP) ने दिल्ली के उत्तर पश्चिम दिल्ली लोकसभा सीट में 2014 का टिकट दिया… वो सांसद बन गया ।
ये वही उदित राज था , जिन्होंने UN यह AFFIDEVIT दिया था कि SC/ST/OBCs इस देश के मूलनिवासी है और सवर्ण ब्राह्मण,क्षत्रिय व बनिया/वैश्य यूरेसिया से आये है।
यही नही यह भी बोला की मूलनिवासी अफ्रीकन रेस के क्लोज हैं।
खैर 2015 में JNU में एक कांफ्रेंस आयोजित हुई थी, उनमे राजीव मलहोत्रा, डॉ त्रिभुवन सिंह, व डॉ उदितराज बतौर वक्ता के रूप में आये थ….. उदितराज उस कांफ्रेंस को छोड़कर भाग गए जब राजीव मल्होत्रा जी ने वह सारे एविडेंस दिखा दिए जो उन्हीने UN में दिए थे।
दूसरी तरफ डॉ त्रिभुवन सिंह ने मूलनिवासी थ्योरी पर उदितराज को आउट कर दिया।
BJP के बड़े नेता राम माधव ने गोआ कॉन्क्लेव में उदितराज को निमंत्रित किया था। उसी कांफ्रेंस में बेल्जियम के एक प्रमुख इंडोलॉजिस्ट डॉ. कोएनराड एल्स्ट भी आये थे, उन्होंने उदितराज को एक्सपोज़ कर दिया था कि यह चर्च ईसाई एजेंडा जिसमे प्राइवेट सेक्टर में आरक्षण की मांग की जा रही है।
एलस्ट ने यह भी बताया कि उदितराज bjp में रहकर चर्च ईसाइयों के ‘धार्मिक स्वतंत्रता, स्व निर्णय का अधिकार एजेंडा को ही बढ़ा रहे हैं।
उदितराज जो कि ब्रेकिंग इंडिया फोर्सेज का एक मजबूत स्तंभ था/है, अंततः BJP ने उसको सांसद क्यों बनाया
तो भाई स्व गुदा भंजन भाजपा – संघ का पुराना काम रहा है
साभार- गिरधारी लाल गोयल के फेसबुक वॉल से
