संदीपदेव । संघ प्रमुख ‘समलिंगावत’ (महाभारत में समलैंगिकता ढूंढने के कारण यह नाम उन पर शूट करता है) ने एक पुस्तक का लोकार्पण किया था। पुस्तक का नाम है- ‘द मिटिंग ऑफ माइंड्स: अ ब्रिजिंग इनिशिएटिव’। इसका हिंदी अनुवाद ‘वैचारिक समन्वय: एक व्यवहारिक पहल’ के रूप में आ चुका है। यह पुस्तक संघ के मुस्लिम राष्ट्रीय मंच और इंद्रेश कुमार ने डॉ.ख्वाजा इफ्तिखार अहमद से लिखवाया है। इफ़्तिख़ार अहमद भी संघ के मुस्लिम मंच से जुड़े हैं और इस पुस्तक में इंद्रेश कुमार को एक मसीहा के रूप में स्थापित करने का प्रयास किया है।
यह पुस्तक यदि ब्रेनडेड संघी पढ़ेंगे तो कहेंगे, आहा! कितनी अच्छी बात लिखी है। परंतु कोई धर्मनिष्ठ सनातनी हिंदू जब इसे पढ़ेगा तो पाएगा कि यह पूरे हिंदू समाज का ‘ब्रेनवॉश’ कर उसके इस्लामीकरण का संघी प्रयास है। उदाहरण के लिए ख्वाजा लिख रहे हैं कि इस्लाम से हिंदू धर्म में घर वापसी संभव नहीं है, क्योंकि इस्लाम समानता का मजहब है और हिंदू धर्म वर्णवादी/जातिवादी है।

अब आप ‘समलिंगावत’ के बयान और मोदी सरकार की जातिवादी योजनाओं जैसे SC/ST act, OBC की आड़ में मुस्लिम आरक्षण, UGC कानून आदि को ध्यान से देखिए तो आपको लगेगा कि जो जातिवादी कानून यह संघी सरकार बना रही है, वह ‘समलिंगावत’ की ‘जाति पंडितों ने बनाई थ्योरी’ और मुस्लिम मंच के ख्वाजा के ‘मुसलमानों का हिंदू धर्म में घर वापसी नहीं हो सकती’ की थ्योरी को कानूनी कवच प्रदान करने का कार्य करता है।
दूसरा उदाहरण लेते हैं। अभी शंकराचार्यजी ने कहा था कि “इंद्रेश कुमार ने उन्हें कहा था कि मुस्लिम मंच ने १० लाख हिंदू बेटियों की शादी मुस्लिमों से करवाई है।” शंकराचार्यजी के इस बयान के बाद संघ ने अपने संगठन की दलित-मुस्लिम महिलाओं को शंकराचार्य जी के विरुद्ध काशी की सड़कों पर प्रदर्शन करने के लिए उतार दिया था। इससे स्पष्ट है कि संघ इस मामले में शंकराचार्यजी पर दबाव बनाकर उन्हें चुप कराने का प्रयास कर रहा है।

अब ख्वाजा की इस पुस्तक में मुस्लिम मंच की जो तारीफ की गई है, उसमें एक बिंदु यह भी है कि मुस्लिम मंच ‘रक्षा बंधन’ कार्यक्रम करवाता है! अब सोचिए कि जिस मुस्लिम समाज में चाचा, मामा, बुआ आदि की बेटियों को भी बहन की जगह बीबी बनाने का रिवाज है, वहां रक्षाबंधन के जरिए संघ का मुस्लिम मंच हिंदू लड़कियों को कहां और किनकी ओर ढकेल रहा है!
इसीलिए यह पुस्तक हर सनातनी हिंदुओं के घर में अवश्य होनी चाहिए ताकि संघ के ‘इस्लामी भारत’ के विचार को समझ कर हिंदू अपने परिवार को इनसे बचा सके। यह पुस्तक एक ‘मीठी छुरी’ है, जो हलाल भी करती है तो ब्रेनडेड संघी भेड़ों को लगता है कि यह तो गुदगुदी कर रही है?
मैंने इस पुस्तक का हिंदी अनुवाद कपोत पर उपलब्ध करा दिया है। यह पुस्तक असल में संघी नेटवर्क के अंदर ‘ब्रेनवॉश’ तकनीक के रूप में लिए लिखी गई है, इसलिए मार्केट के लिए बेहद कम कॉपी छपी है, परंतु हम जैसे लोग जो इन पर नजर रखते हैं, वह इन्हें समझने के लिए इनका पूरा साहित्य अवश्य पढ़ते हैं।
अतः यह पुस्तक मैं प्रत्येक सनातनी हिंदुओं को पढ़ने के लिए अवश्य कहूंगा ताकि ‘कालनेमी संघ’ द्वारा हिंदू समाज के इस्लामीकरण की पूरी प्रक्रिया को समझ कर आप अपने परिवार को इनसे बचा सकें। जय सनातन धर्म।
नोट:- पुस्तक का लिंक नीचे दिया गया है! कुछ कॉपी ही मिली है। जिनका आर्डर पहले आएगा, उनको भेज दिया जाएगा। एक कॉपी सम्मान के साथ शंकराचार्य जी को भी भेजा जा रहा है ताकि उन्होंने जो कहा है, उसका लिखित प्रमाण उन्हें मिल सके। धन्यवाद।
