Courtesy Desk– इस्लामाबाद: रूस ने पाकिस्तान के ग्वादर बंदरगाह को इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर (INSTC) में शामिल करने पर सहमति जताई है। रूस के उप प्रधानमंत्री एलेक्सी ओवरचुक ने ग्वादर पोर्ट को बंदरगाह को INSTC से लिंक करने की पुष्टि की है। पाकिस्तान इसके लिए कोशिश में लगा था, जिस पर अब रूस भी तैयार है। भारत के लिए यह रणनीतिक तौर पर सीधा झटका है। क्षेत्र में रूस और चीन का पाकिस्तान के साथ आने से भारत के लिए अलग-थलग पड़ने का खचतरा पैदा होता है। रूस पारंपरिक तौर पर भारत का निकट सहयोगी रहा है। ऐसे में यह घटनाक्रम दिल्ली का ध्यान खींचता है।
कजान फोरम के दौरान स्पुतनिक के एक सवाल पर एलेक्सी ओवरचुक ने कहा कि हम लंबे समय से पाकिस्तान के साथ नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर से जुड़ने के बारे में बातचीत कर रहे हैं। दोनों पक्ष रूस और पाकिस्तान के बीच कनेक्टिविटी के विकल्पों पर चर्चा कर रहे हैं, जिसमें रेलवे भी शामिल है। हम निश्चित रूप से पाकिस्तान की इस पर पहलों का स्वागत करते हैं।
पाकिस्तान और रूस नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर और ग्वादर को लिंक करने पर बात कर रहे हैं। इस क्षेत्र में चल रहे संघर्षों (ईरान युद्ध) के बावजूद नॉर्थ-साउथ कॉरिडोर पर काम जारी है। हमने इस पर पाकिस्तान की पहल का स्वागत किया है।
रूसी डिप्टी पीएम एलेक्सी ओवरचुक
रूस को मनाने में कामयाब हुआ पाकिस्तान
स्पुतनिक ने तीन दिन पहले 13 मई को अपनी रिपोर्ट में बताया था कि पाकिस्तान ग्वादर बंदरगाह को रूस के इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर से जोड़ना चाहता है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के विशेष सहायक तलहा बुर्की ने INSTC को ग्वादर के साथ इंटीग्रेट करने की इच्छा जताई थी। ऐसा होने से यह कॉरिडोर चीन की ‘बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव’ से जुड़ जाएगा।

इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर 7,200 किलोमीटर का है। यह रूस के मुख्य केंद्रों को ईरान के बंदरगाहों और हिंद महासागर से जोड़ता है। रूस, ईरान और भारत का शुरू किए हुए INSTC में अब अजरबैजान, कजाकिस्तान और अन्य यूरेशियाई देशों के साथ-साथ पाकिस्तान को भी शामिल किया जा सकता है।
पाकिस्तान को क्या होगा फायदा
INSTC कॉरिडोर में शामिल होना पाकिस्तान को समुद्री व्यापार पर मजबूती देगा। ग्वादर पोर्ट अरब सागर पर होर्मुज जलडमरूमध्य के पास रणनीतिक रूप से अहम स्थान पर है। चीन-पाकिस्तान आर्थिक कॉरिडोर के तहत विकसित यह गहरे पानी का बंदरगाह यूरेशिया, अरब और उससे आगे व्यापार के लिए छोटे रास्ते देता है।
पाकिस्तानी बंदरगाहों में रूस की दिलचस्पी उसकी उस रणनीति के अनुरूप है, जिसका उद्देश्य पश्चिमी देशों पर निर्भरता कम करते हुए व्यापार मार्गों में विविधता लाना है। दूसरी ओर पाकिस्तान के लिए यह जुड़ाव ट्रांजिट से होने वाली कमाई में बढ़ोतरी और एक क्षेत्रीय केंद्र के तौर पर अपनी जगह बनाने का मौका बनता है।
भारत की चिंता क्या है
पाकिस्तान के एक ग्वादर बंदरगाह को भारत की ऊर्जा सुरक्षा और क्षेत्रीय प्रभाव के लिए एक चुनौती के रूप में देखा जाता है। रूस का पाकिस्तान के ग्वादर बंदरगाह को INSTC से जोड़ना भारत के हितों के खिलाफ जाता है। इससे चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे को मजबूती मिलेगी, जिस पर भारत की कई चिताएं हैं। इसके अलावा रूस का पाकिस्तान के साथ जुड़ाव एक नई भू-राजनीतिक चुनौती भी पैदा कर सकता है।
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