संदीप देव। क्या वैचारिक प्रतिबद्धता और ‘तानाशाही के खिलाफ संघर्ष’ की बातें महज़ जनता के सामने दोहराए जाने वाले चुनावी मुहावरे हैं, जो हर वर्ष आपातकाल की बरसी पर संघ और उसकी पोलिटिकल पार्टी भाजपा दोहराती रहती है? क्या परदे के पीछे का सच यह है कि जब भी राज्य का ‘डंडा सीधा’ होता है, तो संघ जैसे संगठन उसी सत्ता के सामने नतमस्तक होने को तैयार हो जाते हैं? “RSS and the Syndicate Files” की पिछली किस्त में हमने देखा कि कैसे १९६७ के चौथे आम चुनाव में अमेरिकी सिंडिकेट ने भारतीय राजनीति को मोड़ने के लिए पानी की तरह पैसा बहाया था। फिर हमने पढ़ा कि आपातकाल के बाद बनी संघ की जनसंघ वाली पहली जनता सरकार में कैसे अमेरिकी विभाजन थ्योरी को लागू किया गया। लेकिन बीच में आपातकाल का दौर छूट गया, जिसमें संघी अपनी बहादुरी की दुंदुभी बजाते हैं, जबकि सच तो यह है कि संघ भी कम्युनिस्ट पार्टी की तरह इंदिरा गांधी को पत्र लिखकर आपातकाल के समर्थन में तब खड़ी थी।
RSS and the Syndicate Files (किस्त 7): आपातकाल का वो गुप्त आत्मसमर्पण: जब यरवदा जेल से संघ प्रमुख ने इंदिरा गांधी को लिखे वफादारी के पत्र!
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Journalist from 2.5 decades | Bestseller Author by Nielsen Jagran | Awarded the Sahitya Akademi Award for his book writing | He also received the Pandit Madan Mohan Malaviya Award and the Shivaji Ratna Award for journalism | Founder Editor of https://www.indiaspeakdaily.in
8 Comments

बलराज मधोक ने भी बाला साहब देवरस की आपातकाल में इंदिरा गांधी से माफी और उनकी प्रशंसा के बारे में लिखा है। उन्होंने तो अटल जी के लिये भी लिखा है वो इंदिरा गांधी से मिले हुए थे इसलिये वो अधिकतम जेल से बाहर रहे।
ज्ञानवर्धक ।
संदीप जी विनोबा भावे वाले पत्र १२जनवरी१९७५ आप ने लिखा है वो वर्ष सही नही लगता,क्यों की इंदिरा गांधी को लिखे पत्र २२अगस्त १९७५ और १० नवंबर १९७५ को लिखे थे तो विनोबा भावे वाला पत्र १९७६ होना चाहिए ऐसा मुझे लगता है।
RSS and Syndicate Files se aam hindu ko RSS ki asliyat pata chal rahi hai, ye aapki muhim RSS ko khatam karne mein bahut sahayak hogi. Ab RSS ke paapon ka ghada bhar gaya hai, ant jaldi hoga. Jai Shri Ram.
ये रक्त बीज जब खत्म हो जायें।तब बात बने!दिन दोगुनी रात चौगुनी रफ्तार से उनकी वृद्धि हो रही है 🙏
बहुत बढ़िया लेख धन्यवाद जी
Exactly Right Sir
हिंदू एक बच्चे में संतुष्ट हैं! इनको आजादी चाहिए!!
संदीप भाई, ओम नमो नारायण
हम महंत संतोष शर्मा है, जयपुर, राजस्थान के पिंक सिटी प्रेस क्लब के डायरेक्टर है। भारतीय श्रमजीवी पत्रकार संघ, दिल्ली के नेशनल सेकेट्री है। कभी जयपुर आना हो, तो प्रेस क्लब जरूर पधारे, स्वागत है।
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