संदीप देव। क्या अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के मंच पर ‘संप्रभुता’ और ‘स्वतंत्र विदेश नीति’ की बातें महज़ एक छलावा हैं? “RSS and the Syndicate Files” की पिछली किस्तों में हमने देखा कि कैसे 1950 के दशक में जे.ए. कुरन जैसे सीआईए हैंडलर ने नागपुर में घुसकर संघ को अंदर से ‘अधिग्रहित’ (Co-opt) करने का ब्लूप्रिंट बनाया था। लेकिन इस ‘को-ऑप्शन’ (अधिग्रहण) की असली और भयानक व्यावहारिक परीक्षा भारतीय राजनीति के सबसे उथल-पुथल वाले दशक—1960 के उत्तरार्ध में होनी थी। जब परदे के पीछे से भारत की नीतियां और रणनीतिक झुकाव वैश्विक सिंडिकेट के हितों के आड़े आने लगे, तो सिंडिकेट ने भारत के आंतरिक धार्मिक और सामाजिक विमर्शों के भीतर करोड़ों डॉलर्स झोंककर तख्तापलट और वैचारिक हाइजैकिंग का वो खेल शुरू किया, जिसने देश के पूरे राष्ट्रवादी ताने-बाने को बदलकर रख दिया।
RSS and the Syndicate Files (किस्त-4): आस्था का सौदा और CIA का गुप्त फंड: जब संसद के बाहर बहे खून को मोरारजी सरकार ने फाइलों में दफन कर दिया!
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Journalist from 2.5 decades | Bestseller Author by Nielsen Jagran | Awarded the Sahitya Akademi Award for his book writing | He also received the Pandit Madan Mohan Malaviya Award and the Shivaji Ratna Award for journalism | Founder Editor of https://www.indiaspeakdaily.in
7 Comments

संदीप जी, आपके साहस,श्रम, और ज्ञान को शत् शत् नमन!! जिस समाचार की पूंछ भी कभी नहीं दिखी , उसे आप ने सबूतों के साथ उजागर किया। बहुत बहुत धन्यवाद श्वेता जी संदीप जी नमस्कार।
आज भी भारत को फिर से गुलाम बनाने का षड्यंत्र चल रहा है।संघ पूरा सहयोग कर रहा है हिन्दू हिन्दुस्तान को मिटाने में।।
और फिर इसी मोरारजी के सरकार में मंत्री रहते हुए देश के शासन, प्रशासन , न्याय और मीडिया विभाग में अपनी संघी विचारधारा वाले लोग अटल आडवाणी द्वारा बिठाए गए. उस समय लगाए गए उस विष वृक्ष के विषैले फलों से निकले जहर को आज देश की जनता भुगत रहीं हैं.
प्रस्तुत लेख में दिए गए CIA के दस्तावेजों को अब यहीं झूम करके अच्छी तरह से पढ़ा जा सकता हैं. धन्यवाद संदीप जी 🙏
देश के असली दुश्मनों की पहचान कराने वाली रिपोर्ट।
Sandeep Deo ji aapko aur apki puri team ko sadhuvaad.
BJP aur Sangh ke asli chehre ko ujagar karne ke liye, hinduon ko dharmik muddon par andolit karo aur satta milne ke baad hinduon ko dump kar do, yahi charitra hai in logon ka.
Explosive unbelievable. Sandeep ji 🙏dhanyawaad