संदीप देव। क्या अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के मंच पर ‘संप्रभुता’ और ‘स्वतंत्र विदेश नीति’ की बातें महज़ एक छलावा हैं? क्या दुनिया के नक्शे पर कोई भी ऐसा संप्रभु राष्ट्र नहीं है जो वैश्विक सिंडिकेट की मर्जी के बिना अपनी मर्जी से सांस भी ले सके? “RSS and the Syndicate Files” की पिछली दो किस्तों में हमने देखा कि कैसे 1950 के दशक में अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए (CIA) ने भारतीय सेना के भीतर प्रांतीय दरारें ढूंढने की कोशिश की और कैसे सीआईए के चतुर हैंडलर जे.ए. कुरन ने नागपुर स्थित संघ मुख्यालय में दो साल बिताकर भारत के वैचारिक भविष्य की ‘ह्यूमन एसेट मैपिंग’ पूरी की।
RSS and the Syndicate Files (किस्त 3): ‘कश्मीर प्रिंसेस’ विमान धमाका (1955): जब सिंडिकेट के ‘टाइम-बम’ ने दहलाया भारत का रक्षा और कूटनीतिक तंत्र !
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Journalist from 2.5 decades | Bestseller Author by Nielsen Jagran | Awarded the Sahitya Akademi Award for his book writing | He also received the Pandit Madan Mohan Malaviya Award and the Shivaji Ratna Award for journalism | Founder Editor of https://www.indiaspeakdaily.in
3 Comments

महत्वपूर्ण जानकारी🙏🚩
संदीप जी आज तक संघ और अमरीकी खुफिया एजेंसी सीआईए के गठजोड़ तथा संघ ने समय-समय पर देश और सनातन हिंदू धर्म के साथ जो द्रोह किया उसके बारे में बहुत पढ़ा था. लेकिन पहली बार इनके द्रोह के बारे में इतनी सुव्यवस्थित ढंग से संपूर्ण जानकारी इकठ्ठा देने के इस लाज़वाब प्रयास के लिए आपको दिल की गहराई से साधुवाद 🙏 🙏 🙏
इस शृंखला के अंत में पाठक अपने आप को इतना समर्थ पाएंगे की संघ के देश के प्रति द्रोह की जानकारी जुटाने के लिए अब उनकों अलग अलग मंच पर जाने की कोई ज़रूरत नहीं होगी.
संदीप जी बहुत ही आश्चर्यजनक तथ्य सामने लाने के लिए आप को साधुवाद श्री हरि विष्णु आप की रक्षा करें।