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India Speak Daily > समाचार > न्यायपालिका > आप तो न्याय के सर्वोच्च पद पर बैठे हैं मि-लॉर्ड, खुद जज कर बताइए कि इन तस्वीरों की व्याख्या कोई कैसे करे?
न्यायपालिका

आप तो न्याय के सर्वोच्च पद पर बैठे हैं मि-लॉर्ड, खुद जज कर बताइए कि इन तस्वीरों की व्याख्या कोई कैसे करे?

Courtesy Desk
By Courtesy Desk 7 Min Read
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7 Min Read
CJI Ranjan Gogoi with politicians
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जब से नरेंद्र मोदी भारत के प्रधानमंत्री बने हैं मीडिया, देश के इतिहास में पहली बार का जुमला खुब गढ रहा है। रविवार को देश के संविधान दिवस की पूर्व संध्या पर दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र की सबसे बड़ी अदालत एक बार फिर पहली बार इतिहास के बनने का गवाह बना। दरअसल आजाद भारत के प्रधानमंत्री पहली बार सुप्रीम कोर्ट परिसर में गए। वे देश के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगई द्वारा आयोजित रात्रि भोज में विशेष अतिथि थे। भोज का आयोजन BIMITEC देशों के मुख्य न्यायाधीशों के लिए आयोजित था। इस भोज में भारत के उपराष्ट्रपति मुख्य अतिथि थे। एक एतिहासिक फोटो जो देश के सामने आया वो उपराष्ट्रपति के ट्यूटर अकाउंट से आया। यहां जो घटना पहली बार घटित नहीं हुई वो मीडिया की इंट्री को लेकर कहा जा सकता है। मीडिया वहां तक कभी नहीं जाती। इसबार भी नहीं गई। लेकिन एक तस्वीर गवाह बनी उस एतिहासिक भोज की। तो फिर सवाल उठा, क्या मुख्यन्यायधीश का प्रधानमंत्री संग ऐसी तस्वीर सामने आनी चाहिए!

यह दुर्भाग्य ही है कि एक वर्ग आज तक गुजरात के उस मुख्यमंत्री को भारत के प्रधानमंत्री के रुप में स्वीकार नहीं कर पाया । ये मीडिया का दवाब मानिए जो भारत के प्रधानमंत्री के सामने असहज होते हैं लेकिन कई मामलों में चार्जशीटेट अभियुक्त के सामने सहज। हां यह सच है कि देश के न्यायधीशों के लिए एक अघोषित नैतिकता रही है कि वो किसी से निजी कार्यक्रम का हिस्सा न बने। किससे मिल रहे हैं उसका विशेष ख्याल रखे। लेकिन माई लॉड! आप भारत प्रधानमंत्री से मिल रहे हैं। देश की तीसरे बडे संवैधानिक पद पर बैठे प्रधानमंत्री और चौथे सबसे बड़े संवैधानीक पद पर बैठे मुख्य न्यायाधीश। तस्वीर जज कीजिए और खुद फैसला कीजिए !  यह कि तस्वीरें क्या बयां कर रही है।

ये तस्वीर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यन्यायाधीश रंजन गोगोई की सुप्रीम कोर्ट में मुलाकात की है। देश के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है कि प्रधानमंत्री सुप्रीम कोर्ट में आये थे। संविधान दिवस की पूर्व संध्या पर प्रधानमंत्री मोदी रविवार रात साढ़े नौ बजे सुप्रीम कोर्ट में आये थे।  अवसर था BIMSTEC (बे ऑफ बंगाल इनेसिएटीव फॉर मल्टीसेक्ट्रल टेक्नोलॉजी इकोनोमिक्स)  देशों यानि बांग्लादेश,नेपाल भूटान, श्रीलंका, म्यांमार और थाईलैंड के मुख्य न्यायाधीशों के लिए भोज के आयोजन का।

यह खबर कहीं प्रमुखता से नहीं दिखी क्योंकि मीडिया को इसके लिए आमंत्रण नहीं था। न कभी होता है। कार्यक्रम का आयोजन वहां था जहां बिन बुलाए हर जगह पहुंचने का लोकतांत्रिक दाईत्व रखने वाली मीडिया की इंट्री वहां प्रतिबंधित होती है। लेकिन जब अंदर की एक तस्वीर उपराष्ट्रपति के ट्वीटर अकांउट से जारी हुई तो खबर वायरल होने लगी। लोग अपनी तरह से अनुमान लगाने लगे। सवाल करने लगे कि मोदी वहां क्यों गए! जस्टिस गोगई उनसे क्यों मिले। ये वो लोग जो आज तक स्वीकार नहीं कर पाए कि मोदी दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के पूर्ण बहुमत से चुने गए प्रधानमंत्री हैं। वे 448 अनुच्छेद और 12 अनसुचियों वाले दुनिया के सबसे बड़े लिखित संविधान वाले देश के  तीसरे सबसे बडे संविधानिक पद पर बैठे हैं। वे उस सदन के मुखिया हैं जो  सुप्रीम कोर्ट के आदेश को बदलने की हैसियत रखता है। क्योंकि उसे ‘वी द पीपल’ ने चुना है। जो हमारे संविधान की आत्मा है।

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सवाल करने वाले इतने भोले भी नहीं हैं । वे सवाल करते हैं कि मोदी के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका है। सच है। एम एल शर्मा नामक एक वकील ने, एम एल शर्मा बनाम नरेंद्र दामोदर दास मोदी नाम से एक याचिका सुप्रीम कोर्ट में दाखिल किया है। वे चाहें तो इसी तरह की याचिका देश के मुख्य न्यायधीश जस्टिस रंजन गोगई के नाम से भी दाखिल कर सकते है। अखबार के किसी एक कतरन के आधार पर। एक मलयालम अखबार की कतरन के आधार पर वे भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश केजी बालाकृषणन के खिलाफ एक याचिका भी दाखिल कर चुके हैं। हमारा संविधान इतना लचिला है कि कोई इसी तरह की याचिका भारत राष्ट्रपति के खिलाफ भी ले आए। सुप्रीम कोर्ट के एक वरिष्ठम जज के खिलाफ भी एक याचिका ऐसे ही दाखिल की गई थी।

भारत के अनेको न्यायधीशों ने ऐसे नैतिक आचरण अपने पद पर रहते अपनाए की कभी किसी सार्वजनीक सभा में गए ही नहीं।  पद पर रहने के दौरान खुद को घर में कैद कर लिया। वे सब वही लोग थे जो हमारी न्यायपालिका के उच्च आदर्श को कायम रख पाए। लेकिन किसी संवैधानिक गोष्ठी या कार्यक्रम में जाना उनका नैतिक दाइत्व बनता है। देश के गणतंत्र दिवस पर मुख्य न्यायाधीश और प्रधानमंत्री प्रोटोकॉल के हिसाब से आसपास ही बैठते हैं। फिर संविधान दिवस पर यह सवाल क्यों! यह कि प्रधानमंत्री सुप्रीम कोर्ट क्यों गए ! उनको क्यों जाना चाहिए! रफेल डील मामले में प्रधानमंत्री के खिलाफ दायर पेटिशन पर जब मुख्यन्यायाधीश की कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा है, प्रधानमंत्री को सुप्रीम कोर्ट क्यों आना चाहिए!’ इतने सवाल।

तो क्या कई घोटालों में आरोपी चाजशीटेड पूर्व गृहमंत्री  जो किसी संविधानिक पद पर नहीं है उनके साथ ठिठोली करने वाले भारत के मुख्यन्यायाधीश उसी दवाब में हैं कि बाहर कैसे मुंह दिखाएंगे। हम किसके साथ बैठे हैं। आप तो न्याय के सर्वोच्च पद पर बैठे हैं । खुद जज कर बताइए न मीलॉड! तस्वीरों की व्याख्या कीजिए न मीलॉड।

भारत के प्रधानमंत्री की देश के प्रधान न्यायाधीश संग संवैधानिक गरिमा में मुलाकात की इस तस्वीर पर जमी बर्फ पर हंगामा ! और गैर संविधानीक पद पर बैठे आदालत से जमानत पर चल रहे एक अभियुक्त के संग गर्मजोशी! इसके मायने तो देश को पता चलना चाहिए मी लॉड ! क्योंकि थोड़ा थोड़ा भ्रम तो बना है मी लॉड! न्यायपालिका की गरिमा कायम रहे इसके लिए इन सवालों का जवाब जरूरी है।

URL: pm modi attend international judges meet why it is in questions

Keywords: CJI Ranjan gogoi and his behaviour with different types of politicians, CJI Justice Ranjan gogai, PM Narendra modi, Supreme Court, जस्टिस रंजन गोगई, नरेंद्र मोदी नरेंद्र सुप्रीम कोर्ट

Courtesy Desk November 27, 2018
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TAGGED: CJI, Justice Ranjan gogai, Narendra modi, pm modi, Supreme Court, जस्टिस रंजन गोगई, नरेंद्र मोदी, सुप्रीम कोर्ट

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