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India Speak Daily > समाचार > मुद्दा > जन अभियान बनाना होगा सड़क सुरक्षा को : नितिन गडकरी
मुद्दा

जन अभियान बनाना होगा सड़क सुरक्षा को : नितिन गडकरी

Courtesy Desk
By Courtesy Desk 11 Min Read
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India Speaks Daily - ISD News
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Nitin Gadkari। दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस वे के रूप में हमें विश्वस्तरीय सड़क मिल गई है ऐसे में इसे मूर्त रूप देने वाले सड़क परिवहन मंत्री नितिन गड़करी का भारतिय सड़क परिवहन के बारे में उनका विचार जानना ही उपयुक्त होगा। इसमें कोई दो राय नहीं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कैबिनेट में अगर तथ्य के साथ अपने मंत्रालय के कार्यों को किसी ने रखा है तो वो खुद नितिन गडकरी ही हैं। ऐसे में देश के भविष्य के साथ यहां के परिवहन व्यवस्था को लेकर वे क्या सोचते हैं। इसलिए इस मौके पर हमने सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी के आलेख के माध्यस उनके विचार और योजना के बारे में अवगत कराने का प्रयास किया है

बात 2001 की है, जब मैंने मौत को बिल्कुल करीब से देखा था। उस समय मैं जिस गाड़ी से सफर कर रहा था वो गाड़ी विपरीत दिशा से आ रही एक अन्य गाड़ी से टकरा गई। दो गाड़ियों की आमने-सामने की ये टक्कर इतनी जोरदार और भयावह थी कि इस दुर्घटना के बाद मैं लगभग एक साल तक बिस्तर पर पड़ा रहने को मजबूर हो गया था। इस भीषण दुर्घटना से जीवित बच जाना मेरे लिए किसी चमत्कार से कम नहीं था। कई मायनों में इस दुर्घटना ने मेरे जीवन को बदल दिया। इस दुर्घटना के बाद न केवल जीवन को लेकर मेरा नजरिया बदल गया बल्कि इसने मुझसे सड़क दुर्घटनाओं की विभीषिकाओं से भी परिचित कराया। भारत जैसे विकासशील देशों में सड़क दुर्घटनाओं की वजह से लोगों को काफी परेशानी झेलनी पड़ती है। सड़क दुर्घटनाओं के बाद लोगों की असमय मौत हो जाती है।

कई जगहों पर तो दुर्घटना में मरने वाला घर का अकेला कमाने वाला व्यक्ति होता है और एक्सीडेंट में उसकी मौत के बाद और उसके परिवार वालों को जीवन यापन के लिए जूझना पड़ता है। उस परिवार को यह सब कुछ लंबे समय तक झेलने के लिए बाध्य होना पड़ता है। यहां पर मैं देश में रोड एक्सीडेंट्स के आंकड़ों पर ध्यान दिलाना नहीं चाहूंगा क्योंकि मीडिया में इसके बारे में काफी कुछ बोला और लिखा जा चुका है। इसकी जगह मैं आपको ये बताना चाहूंगा कि आप सड़क दुर्घटना के खतरों से मुक्त नहीं हैं। कहना ज्यादा सटीक होगा कि इस त्रासदी से कोई भी मुक्त नहीं।

सड़क दुर्घटनाओं को रोकने की जिम्मेदारी मुख्य रूप से आम नागरिकों की होती है लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि सरकार की इसके प्रति कोई जवाबदेही बनती ही नहीं। ऐसे में सरकार इन सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए प्रतिबद्ध है। सड़क सुरक्षा को लेकर सरकार की तरफ से लगातार प्रयास किया जा रहा है ऐसे में मैं आपको सड़क सुरक्षा की दिशा में सरकार की तरफ से उठाए गए कदमों की जानकारी देना चाहता हूं।
मेरे मंत्रालय के द्वारा इस संबंध में लिए गए फैसलों में सबसे महत्वपूर्ण है देश में राष्ट्रीय राजमार्गों की सड़कों को बढ़ाना। अभी देश के राष्ट्रीय राजमार्गों का कुल विस्तार महज 97000 किलोमीटर है जिसे अगले पांच सालों 2,00,000 किलोमीटर तक बढ़ाने का लक्ष्य है।

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भारत में सड़कों की कुल लंबाई 5.2 मिलियन किलोमीटर है लेकिन राष्ट्रीय राजमार्ग पर देश के कुल ट्रैफिक का 40 फीसदी बोझ है जबकि राष्ट्रीय राजमार्ग देश के कुल सड़कों का महज 2 फीसदी ही है। इसी की वजह से सड़क दुर्घटनाओं के आंकड़े लंबे चौड़े होता जा रहे हैं। राष्ट्रीय राजमार्गों के विस्तार को दोगुणा करने से इनपर न केवल ट्रैफिक का बोझ कम होगा बल्कि इससे सड़क दुर्घटनाओं में भी कमी आएगी।

दूसरा महत्वपूर्ण कदम है, देश में व्यापक रूप से मौजूद 2 लेन वाले राजमार्गों की मौजूदगी। हमारा लक्ष्य है कि इन दो लेन वाले राजमार्गों को जल्द से जल्द चार लेन वाले राजमार्गों में तब्दील किया जाए। पहले 2 लेन वाले राजमार्ग पर प्रतिदन 15000 पैसेंजर कार यूनिट के गुजरने पर उसे 4 लेन वाले राजमार्ग में तब्दील करने योग्य माना जाता था अब सरकार ने इस क्राइटेरिया को बदल दिया है. अब नए नियम के मुताबिक जिस 2 लेन वाले राजमार्ग पर 10000 पैसेंजर कार प्रतिदिन गुजरती हैं उसे भी 4 लेन वाले राजमार्गों में तब्दील किया जाएगा।

दो लेन के राजमार्गों को चार लेन के राजमार्गों में तब्दील करने से सड़क हादसों की संख्या अपने आप ही कम हो जाएगी क्योंकि चार लेन वाले राजमार्ग में डिवाइडर होने की वजह से सड़कों पर गाड़ियां एक तरफ से ही चलेंगी और गाड़ियों के आमने-सामने टकराने की संभावना कम हो जाएगी।

तीसरी महत्वपूर्ण पहल के अतंर्गत मंत्रालय ने आम लोगों की मदद से राजमार्गों पर सड़क दुर्घटना के बचाव के लिए ब्लैक स्पॉट्स पहचानने की कोशिश की है। राजमार्गों पर ब्लैक स्पॉट्स वो जगह कहलाते हैं जहां पर अधिकतर दुर्घटनाएं घटती है। एक विस्तृत पड़ताल के बाद सरकार ने पूरे देश के राजमार्गों पर 726 ब्लैक स्पॉट्स की पहचान की है। इन जगहों को बनाने और सुधारने के लिए काम पूरी तेजी से चल रहा है। अब इसे एक सतत प्रक्रिया के रूप में देखा जा रहा है। नए ब्लैक स्पॉट्स की पहचान की जाती है और उसमें सुधार किया जाता है।

सड़क दुर्घटनाओं में लोगों के मरने का आकंड़ा इसलिए भी ज्यादा होता है क्योंकि सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्ति को वाजिब आकस्मिक उपचार मिलने में काफी समय लग जाता है। इस मामले से निपटने के लिए माननीय सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार सरकार ने एक विशेष गाइडलाइन तय की है जिसके अनुसार घायलों को अस्पताल पहुंचाने वाले भले लोगों से अस्पताल। पुलिस या अन्य एजेंसियों की तरफ से कोई पूछताछ या उसका किसी भी तरह से उत्पीड़न नहीं किया जाएगा। समय के अनुसार ये कदम भी सड़क हादसे में जान गंवाने वालों की संख्या मे कमी लाने में कारगर साबित होगा।

इसके अलावा सरकार मोटरव्हीकल एमेंडमेंट बिल संसद में पास कराने को लेकर प्रतिबद्ध है। ये बिल अगस्त 2016 में मेरे द्वारा पेश किया गया था लेकिन उसके बाद से ही ये बिल ट्रांसपोर्ट,टूरिज्म और कल्चर की पार्लियामेंट्री स्टैंडिंग कमिटी के पास रिव्यू के लिए पेंडिंग पड़ी हुई है। इस संशोधन बिल में सड़कों का इस्तेमाल करनेवालों के लिए कड़े नियमों के अलावा सड़क सुरक्षा। रोड एक्सीडेंट पीड़ितों को मदद, ड्राइविंग लाइसेंस प्राप्त करने की इच्छा रखनेवालों के लिए कड़े लाइसेंस नियम और कानून तोड़ने वालों के लिए भारी जुर्माने का प्रावधान किया गया है।

इन सबके अलावा मेरा मंत्रालय इंटेलीजेंट ट्रैफिक सिस्टम को लागू करने के प्रयास में भी जुटा हुआ है। इस सिस्टम को लागू करने से ट्रैफिक कानून तोड़ने वालों को रियल टाइम में ट्रैक करके पकड़ा जा सकेगा। पूरे सिस्टम का आधुनिकीकरण करना मंत्रालय के एजेंडे में सबसे ऊपर है। पुलों को लेकर एक और महत्वपूर्ण पहल मंत्रालय के द्वारा की जा रही है। सरकार ने इंडियन ब्रिज मैनेजमेंट सिस्टम्स (आईबीएमएस) की स्थापना की है।

इस सिस्टम में पूरे देश में मौजूद पुलों का रियल टाइम रिकॉर्ड मौजूद रहेगा। इस सिस्टम में किसी भी पुल का रिपेयर और मेटेंनेंस की जरुरत का रिकार्ड रखा रहेगा। इससे पहले देश के पुलों का कोई डाटाबेस मौजूद नहीं था। अभी भी देश में कुछ ऐसे पुल मौजूद हैं जो कि सौ साल पुराने हैं। इसके साथ ही सरकार ने स्पीड ब्रेकर्स को लेकर भी एक निश्चित गाइडलाइन तय किए हैं। देश में स्पीड ब्रेकर्स की वजह से प्रतिदिन औसतन 30 क्रैश और 9 मौतें होती हैं.

मुझे ये बताते हुए खुशी हो रही है कि हमारे लगातार प्रयास के वजह से सड़क दुर्घटनाओं को आकड़ों में 2017 में 3 फीसदी की कमी आई है। ये सब कुछ महत्वपूर्ण पहल है जो कि सरकार की तरफ से की गई है लेकिन सबसे बड़ी चुनौती लोगों के माइंडसेट में बदलाव लाना है। खास करके भारत में अधिकतर सड़क दुर्घटनाएं लोगों की गलती या फिर लापरवाही से होती है। जब तक सुरक्षा का भाव देश के आम लोगों के मन तक नहीं पहुंचेगा तब तक सड़क दुर्घटनाओं को 50 फीसदी तक कम करने की चुनौती सपना बनी रहेगी।

यहां मेरा स्पष्ट रूप से मानना है कि एनजीओ,कार्पोरेट सेक्टर और नागरिक समूहों को भी सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने के लिए महत्वपूर्ण रोल अदा करना पड़ेगा। पिछले कुछ वर्षों में उनका सहयोग शानदार रहा है लेकिन हमें इस कैंपेन को अगले स्तर तक ले जाना है।

अगर हम सड़क सुरक्षा को राष्ट्र के विवेक के साथ जोड़ना चाहते हैं तो हमें इसे अच्छे नागरिकों के कर्तव्यों से जोड़ना होगा। इसके लिए मैं देश के सभी शैक्षणिक संस्थानों से अपील करता हूं कि वो सड़क सुरक्षा डॉयलाग को अपने इंस्टीट्यूट के एक्स्ट्रा कैरिकुलम एक्टिविटी का महत्वपूर्ण पार्ट बनाएं। स्टूडेंट्स को रोड सेफ्टी का वचन दिलाया जाए। हमें सड़क सुरक्षा अभियान को इतना आगे बढ़ाना होगा जिससे कि हम रोड सेफ्टी बैज को आक्रमक तरीके से प्रमोट कर सके और वो गाड़ियों पर नजर आने लगे। इस स्टिकर पर लिखा हुआ होगा, ‘मैं वचन देता हूं कि मैं एक जिम्मेदार सड़क उपयोगकर्ता हूं।’

नोट- नितिन कडकरी का यह आलेख फर्स्ट पोस्ट से लिया गया है…

URL: People should create road campaign for road safety: Nitin Gadkari

Keywords: Nitin gadkari, Ministry of Road Transport, nitin gadkari’s article, road safety, road accident, national highway, delhi meerut expressway, नितिन गडकरी, नितिन गडकरी का लेख, सड़क सुरक्षा, सड़क दुर्घटना, दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस वे

Courtesy Desk May 31, 2018
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TAGGED: Modi government schemes, Nitin Gadkari

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