संदीप देव। Epstein Files से एक बात सामने आयी, जो मैं भारत के संदर्भ में हमेशा कहता था! इसे ठीक से समझने की आवश्यकता है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप चुनावी भाषण एवं अन्य जगह इस्लामी आतंकवाद पर अपनी ‘जुबानी हिट’ से सुर्खियां बटोर रहे थे, वहीं उनके इस भाषण से वैश्विक इस्लामी आतंकवादियों का ग्रुप बहुत खुश था। असल में ट्रंप इसके जरिए इस्लामिक आतंकवाद को उल्टा प्रोत्साहित कर रहे थे अगली लड़ाई के लिए!
यही हाल अमेरिका के सभी राष्ट्रपतियों का था। असल में पाकिस्तान, अफगानिस्तान से लेकर मिडिल-ईस्ट तक इस्लामिक आतंकवाद और आतंकवादी संगठनों को बढ़ाया ही अमेरिका ने है!
अब भारत में मोदी जी 2014 से पहले इस्लाम के विरुद्ध दिखते थे। अक्टूबर 2013 में जब चुनावी माहौल गरम था तो मोदी जी की गुजरात सरकार हिंदुओं को खुश करने के लिए मुस्लिमों को लेकर सोनिया-कांग्रेस की मनमोहन सरकार द्वारा बनाई गई ‘सच्चर कमेटी’ का विरोध करते हुए सुप्रीम कोर्ट गई और याचिका पेश किया कि “एक धर्मनिरपेक्ष देश में किसी रिलीजन के आधार पर कोई कमेटी नहीं बननी चाहिए और न लागू होनी चाहिए।”
मोदी जी चुनाव जीत कर आए और आते ही सच्चर कमेटी को लागू कर हिंदुओं को मूर्ख बना दिया! 31 मार्च 2019 को संसद में एक सवाल का लिखित जवाब देते हुए मोदी सरकार ने कहा कि ‘हमने सच्चर कमेटी की सभी सिफारिशों को लागू कर दिया है।”
फिर भाजपा का अल्पसंख्यक मोर्चा पोस्टर बना-बना कर मुस्लिमों को यह मैसेज देने लगा कि कांग्रेस ने आज तक आपको ठगा है, मोदी जी ने ही आपको सच्चर कमेटी से लेकर, छात्रवृत्ति, अन्य सरकारी योजनाओं आदि में विशेष सुविधाएं दी है, आपकी संख्या सरकारी नौकरियों में बढ़ाई है आदि। मोदी सरकार ने तो संविधान की भावना को कूड़ेदान में डालते हुए IAS/IPS की तैयारी में भी मजहब के आधार पर दिए गये अपनी फ्री कोचिंग योजना का खूब ढिंढोरा पीटा!
अब एप्सटीन फाइल से स्पष्ट हो रहा है कि अपने वोटरों को मूर्ख बनाकर इस्लाम को बढ़ाने का ‘वैश्विक फिनोमिना’ है, जिसका लीडर अमेरिका है।
वैसे भी अमेरिकी #ACYPL में मोदी जी का प्रशिक्षण तो हुआ ही है 1990 के दशक में! फिर नीतियां तो अमेरिकी ही चलेगी न?
आपको बता दूं कि #Epstein भी यहूदी होकर इस्लाम के फेवर में काम कर रहा था! सऊदी अरब के सुल्तान से उसके लिंक निकले हैं। यही नहीं पवित्र काबा की चीजें भी एप्सटीन के आइलैंड पर मिली है। अर्थात् यह ‘ग्लोबल एलिट’ और ‘डीप स्टेट’ का बहुत गहरा खेल है! जो आपको दिखता है, असल में वह होता नहीं! और यही विचारधारा दुनिया को ‘लीड’ कर रही है!
इस्लाम का जिहाद और जुझारूपन वैश्विक हथियार बाजार, मानवाधिकार बाजार, एनजीओ बाजार, अपने वोटरों को डरा कर रखने का बाजार, ग्लोबल एलिट के मानवीय चेहरा को प्रदर्शित करने का बाजार आदि को बेहद सूट करता है! हिंदू डरेगा तो ही वोट करेगा? और डरेगा किससे? इस्लाम बढ़ेगा तो ही यहूदी-ईसाई हथियार के व्यापार से मानवाधिकार के शोर तक का धंधा करेगा? तो इस्लामी आतंकवाद नहीं होगा तो ग्लोबल एलिट की पॉलिसी वर्क कैसे करेगी? यही असली फंडा है!
