कोई बेटी नहीं बचेगी
सड़ी – बुद्धि का बुड्ढा – नेता , चरित्रहीन और महाभ्रष्ट ;
तथाकथित हिंदूवादी दल , धर्म – सनातन करता नष्ट ।
समलैंगिक है मातृ – संस्था , आपस में ही बरत रहे ;
प्रेस-मीडिया महा-नपुंसक , फिर भी सबके भेद खुल रहे ।
अंधभक्त हैं अकल के अंधे , अपनी आंखें फोड़ रखी हैं ;
सच्चाई न देखना चाहें , अपनी किस्मत मोड़ रखी है ।
मौत के मुंह में किस्मत मोड़ी , बहुत शीघ्र गिरने वाले हैं ;
लगता जीवन से बैर है इनको ,आत्महत्या करने वाले हैं ।
इन मूर्खों को कौन बताये ? कभी नहीं ये सुधरेंगे ;
इनको और नहीं कुछ आता, नेता की ही चप्पल चाटेंगे ।
काफी हिंदू ऐसे ही हैं , काफी भय या भ्रम में है ;
धर्महीन – अज्ञानी हिंदू , पता नहीं ये किनमें हैं ।
किंकर्तव्यविमूढ़ है हिंदू ! पूरी भ्रम की स्थिति है ;
अच्छा नेतृत्व नहीं हिंदू का , घातक-विपरीत परिस्थिति है ।
भ्रष्टाचार का रोग भयानक , हिंदू के लिये ही कैंसर है ;
गुंडे – गिरोहबंद हैं जितने , उनके लिये सदा अवसर है ।
जागो हिंदू ! अब तो जागो , अपना-धर्म व देश बचाओ ;
कुछ भी हो पर हर-हालत में , अब अच्छी-सरकार बनाओ ।
जंगे – आजादी लड़ो दूसरी , हर – हिंदू घर से निकले ;
कुर्बानी तो देनी होगी , तभी देश बचकर निकले ।
अब्बासी-हिंदू नेता के कारण , पूरे-देश को खतरा है ;
सबसे बड़ा ये शत्रु देश का , हुआ मानसिक खतना है ।
शुरू हो चुकी ध्वंस-प्रक्रिया , दिन पर दिन बढ़ती जायेगी ;
कोई बेटी नहीं बचेगी , “अंकिता-भंडारी” सी मृत्यु पायेगी ।
देव-भूमि जो उत्तराखंड है , क्यों कर दानव-भूमि बन रही ?
हिंदू ! तूने जो धोखा खाया , तेरी बेटी भुगत रही ।
हिंदू ! तेरी गलती का फल , तेरे बच्चों को भोगना होगा ;
जैसा हृदय-सम्राट बनाया , वैसा ही शासन मिलना होगा ।
पापी – सरकार बनाने वाले , पाप के भागीदार हैं ;
कैसा चौकीदार बनाया ? जो चोरों का सरदार है ।
यदि तुमको अपनी रक्षा करनी , चौकीदार बदलना होगा ;
ठोंक-बजा कर देख-परख कर , चरित्रवान रखना होगा ।
यदि नहीं समझ में आता कोई,हर-बार नयी-सरकार बनाओ ;
जैसे ताश के पत्ते फेंटों , कुछ वैसा ही कर दिखलाओ ।
दोबारा कोई न जीते , नये खून को आगे लाओ ;
अब चाहे जो भी करना पड़े, पर अच्छी-सरकार बनाओ ।
“जय सनातन-धर्म”, रचनाकार : ब्रजेश सिंह सेंगर “विधिज्ञ”
