नंगा ही रहता हरदम चंगा
“एपस्टीन-फाइल्स” का मामला , पूरा खुलने वाला है ;
अब्बासी-हिंदू भारत का नेता , जल्द निपटने वाला है ।
धन्य है अमरीका की संसद , जनता के प्रति उत्तरदायी ;
कौन देश में कितना नंगा ? उसकी पूरी छवि दिखलायी ।
भारत में स्थिति एकदम उल्टी , नंगा ही रहता हरदम चंगा ;
चरित्रवान की कम है इज्जत , बह रही है पूरी उलटी गंगा ।
जो जितना नीचे गिरता है , उतना ही ऊपर जाता है ;
बड़ा अनोखा देश है भारत , नंगों को इज्जत देता है ।
यही वजह है बर्बादी की ,अब देश ही मिटने वाला है ;
जल्द ही पूरा मिट सकता है, स्वाभाविक होने वाला है ।
हिंदू ! जैसे बीज बोयेगा , फसल उसी की काटेगा ;
हृदय-सम्राट बनाया किसको ? उसका फल तो भोगेगा ।
पता नहीं ये बात है कैसी ? रोने की या हंसने की ;
आंखें मूंदे हिंदू ! लेटा है , जबकि बारी है उठने की ।
ऐसा चौकीदार रखा है , जो खुद चोरों का सरदार ;
पूरे भारत को लूट रहा है , हो जाओ हिंदू ! खबरदार ।
जान-माल-सम्मान की रक्षा , यदि हिंदू को करनी है ;
सामर्थ्यवान खुद बनना होगा , वरना तेरी मरनी है ।
मुर्दादिल क्यों हिंदू जनता ? खामोशी से अन्याय को सहती ;
राणाप्रताप को भुला दिया क्या?वीरशिवा सी बात न करती।
वीरों का इतिहास हमारा , सरकारों ने जिसे छिपाया ;
झूठे-इतिहास को पढ़ते-पढ़ते , हिंदू में कायरपन आया ।
जो डरता है सो मरता है , परम – सत्य इसको मानो ;
योद्धा के आगे मौत भी डरती , हिंदू ! इसको करके जानो ।
सारे हिंदू ! योद्धा बन जाओ , भारत की रक्षा करनी है ;
जंगे-आजादी लड़ो दूसरी , सम्मान की रक्षा करनी है ।
भलमनसाहत की नहीं है इज्जत , गुंडागर्दी पूरी हावी है ;
नेतृत्व बने जब पूर्ण नपुंसक , महाविनाश अवश्यम्भावी है ।
देश-भक्ति , साहस व शौर्य , नहीं है जिसमें वही नपुंसक ;
नब्बे-प्रतिशत नेता-अफसर,केवल हिंदू के लिये हैं हिंसक ।
म्लेच्छों से ये सदा ही डरते , स्टॉकहोम – सिंड्रोम है ;
चरित्रहीन नाकारा ये सब , भूले फूकन का अहोम है ।
धर्महीन – अज्ञानी हिंदू ! हरदम गलत फैसले लेता ;
परमभ्रष्ट अब्बासी – हिंदू , उसको चुनता देश का नेता ।
हिंदू ! सही-मार्ग पर आओ , “धर्म-सनातन” में आओ ;
नंगेलोगों को चुनाव हराकर,अब तो अच्छी-सरकार बनाओ ।
“जय सनातन-धर्म”, रचनाकार : ब्रजेश सिंह सेंगर “विधिज्ञ”
