Suresh Chiplunkar आईएएस रहते हुए… अलगाववाद को खुला नैतिक समर्थन देने वाले, जनवरी 2019 में आईएएस से त्यागपत्र देकर कश्मीर की स्वायत्तता और अलगाववाद की तरफ स्पष्ट झुकाव रखने वाली राजनीतिक पार्टी बनाने वाले शाह_फैजल, अब खुले तौर पर पुनः सीनियर आईएएस का पद संभालने जा रहे हैं….
2010 में शाह फैजल घाटी के पहले ऐसे अभ्यर्थी थे, जो डॉक्टर होने के वाबजूद उर्दू भाषा के माध्यम से आईएएस में सफल और टॉपर हुए थ ! आईएएस ‘टाप’ करने के फौरन बाद वह मनमोहन सिंह से मिले थे… PM से ऐसी भेंट बिरलों को ही मिल पाती है… वह पुलवामा और बांदीपोरा जैसे आतंकवाद प्रभावित क्षेत्रों में रहे…. मग़र अलगाववाद पर उनका नज़रिया सहानभूति से भरा हुआ था …. वह अक्सर अपनी यह भावनाएं सामने रखने में गुरेज नही करते थे….
2018 में भारत की मोदी सरकार ने दस महीने के लिए उन्हें हार्वर्ड केनेडी स्कूल में फेलोशिप के लिए अमेरिका भेजा…. मग़र इस Lavish training से लौटने के बाद उन्होंने आईएएस से त्यागपत्र दे दिया… “रहस्यमयी परिस्थितियों” में मोदी सरकार ने उनका इस्तीफा स्वीकार नहीं किया … शाह फैजल ने भी एक पॉलिटिकल पार्टी भी बनाई और उसके सर्वेसर्वा बन गए… 14 अगस्त 2019 की रात चुपचाप तुर्की जाते समय उन्हें गिरफ्तार करके जेल में डाल दिया गया (हालांकि कागजों पर वह उस समय भी आईएएस थे )….
जो शख्स सरेआम अलगाववाद का खुला समर्थक हो, भारत विरोधी ट्वीट करता हो… इमरान की तारीफ में ट्वीट डालता हो , अलगाव समर्थक पार्टी बनाता हो,, साल भर जेल में भी रहा हो,, तब ऐसी क्या मजबूरी है कि मोदी सरकार इस व्यक्ति को फिर से बेहद वरिष्ठ और निहायत महत्वपूर्ण पद देने जा रही है ?….
सबसे बड़ा और रहस्यमई सवाल यह है कि सवा तीन वर्ष तक मोदी सरकार के कार्यालय में उसका इस्तीफा क्यों दबा रहा ? इस्तीफा क्यों नहीं स्वीकार किया गया ?…. जबकि इसी 3 साल की अवधि में 11 अन्य आईएएस ने इस्तीफ़े दिए और सभी के इस्तीफे तुरन्त स्वीकार कर लिए गए… लेकिन शाह फैजल का नहीं, और अब वह सीनियर आईएएस बनकर मंत्रालय में??
क्या आपको यह मामला रहस्यमय और गंभीर नहीं लगता?? आखिर शाह फैजल के पास ऐसा क्या है?? जबकि इधर तो अंधभक्तों का गिरोह आए दिन मूर्खों की तरह किसी को भी देशद्रोही का सर्टिफिकेट बांटकर उन्हें पाकिस्तान जाने की सलाह देता फिरता है… फिर इस स्पष्ट मामले में उनके मुंह में दही क्यों जमा हुआ है??
