
19 जून 2020 को सर्वदलीय बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस बयान का महज 19 सेकंड का क्लिप अब धीमी गति (0.25x स्पीड) से जांच का विषय है। बयान था — “न वहाँ कोई हमारी सीमा में घुस आया है, नहीं कोई घुसा हुआ है, नहीं हमारी कोई पोस्ट किसी दूसरे के कब्जे में है।” इस क्लिप का फ्रेम-बाय-फ्रेम माइक्रोएक्सप्रेशन द्वारा अध्ययन कुछ खास चेहरे के संकेतों को उजागर करता है।
0:03 सेकंड पर “ना वहाँ कोई हमारी” कहते समय पलकें झपकती हैं। बॉडी लैंग्वेज विशेषज्ञों के अनुसार, जब व्यक्ति झूठ बोलता है तो असत्य हिस्से पर असहजता के कारण अनजाने में पलकें झपकने लगती हैं — यह खुद को बचाने की स्वाभाविक प्रतिक्रिया होती है।
0:05 सेकंड पर मोदी जी ने “ना कोई हमारी सीमा में घुस आया है” कहते हुए सिर हिलाते हुए गर्दन थोड़ी टेढ़ी की है और नाक फुलाई जाती है। इस क्षण में अहंकार का भाव उभरता है, मानो “मैंने कह दिया तो यही सत्य है, अब इस पर सवाल न पूछो।”
0:10 सेकंड के आसपास चेहरे पर हल्की सी व्यंग्यात्मक मुस्कान झलकती है। यह भाव कुछ इस तरह का लगता है कि “कर लो जो करना है, लेकिन मेरा कुछ बिगाड़ नहीं पाओगे।”
0:13 सेकंड पर “ना ही हमारी कोई पोस्ट” कहते समय दोबारा पलकें झपकती हैं, जिसे झूठ छिपाने का संभावित संकेत माना जाता है।
0:15 सेकंड पर फिर पलक झपकती है और सिर भी हिलाया जाता है।
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ISD Radio : 19 सेकंड के क्लिप में दिखे मोदी की असहजता और नजर चुराने के संकेत
सबसे उल्लेखनीय क्षण 0:16 सेकंड पर आता है, जब “किसी दूसरे के कब्जे में है” कहा। इस दौरान नजर कैमरे से हट जाती है और कहीं और चली जाती है। विशेषज्ञ इसे असहज सच्चाई से खुद को अलग करने (distancing) का संकेत मानते हैं। यानी मुद्दा इतना असहज है कि बोलते समय सामने देखते हुए बात कहने की बजाय मोदीजी ने नजर चुरा ली। उन्हें पता है कि वो जो बोल रहे हैं वो असत्य है। हम नजर तब चुराते हैं जब झूठ बोल रहे हों।
पूरे क्लिप को 0.25x स्पीड पर देखने से ये सूक्ष्म भाव अधिक स्पष्ट हो जाते हैं, जो सामान्य गति में आसानी से नजरअंदाज हो सकते हैं। इस धीमी गति वाले अध्ययन में चेहरे के कई ऐसे संकेत सामने आए हैं, जो बयान की दृढ़ता के साथ-साथ कुछ झूठ को छुपाने की असहजता और नियंत्रण के प्रयासों की ओर इशारा करते हैं। इस बात को कहते हुए मोदी जी को पता था कि वो जो कह रहे थे वो सत्य नहीं था। उन्हें खुद अपनी कही बातों पर विश्वास नहीं था और उनको छुपाने के लिए वो असहज microexpressions का सहयोग ले रहे थे।
