मणि-शंकर अय्यर ने ठीक कहा था, उससे भी बदतर ये नेता है ;
पूरे भारत को नष्ट करेगा , इतना गिरा हुआ नेता है ।
अच्छे-लोगों को दूर कर दिया , अब केवल चांडाल-चौकड़ी ;
कर्तव्यनिष्ठ-अफसर भी हटाये , ऐसी इसकी शैतान-खोपड़ी ।
हर संस्थान का मान घटाया , चापलूस हर जगह लगाया ;
बहुत बड़ा षड्यंत्र रचाया , लोकतंत्र को नष्ट कराया ।
बेईमानी से चुनाव जीतता , चुनाव-आयोग है पूरा नष्ट ;
ईवीएम को हैक कराया , जनादेश कर दिया भ्रष्ट ।
भोली भाली हिंदू जनता , मूर्ख बनाना है आसान ;
तिलक-त्रिपुंड में फंस जाती है , सच्चे-धर्म से है अनजान ।
धर्महीन – अज्ञानी हिंदू , कभी धर्म का मर्म न जाना ;
पाखंडों में फंसे हुये हैं , अब्बासी – हिंदू न पहचाना ।
बुद्धिमान दुश्मन से घातक , मूर्ख दोस्त की यारी है ;
बहुसंख्यक हिंदू ऐसा ही है , सो अब मरने की तैयारी है ।
अब्बासी – हिंदू महाकुटिल है , महाधूर्त मक्कार है ;
शत – प्रतिशत ये हिंदू – द्रोही , भारत का गद्दार है ।
चीन – पाक से ये क्यों डरता ? या फिर उनका साथी है ;
कुछ तो दाल में काला लगता , या फिर सफेद हाथी है ।
ये पूरा सफेद हाथी है , पूरा भारत चर जायेगा ;
जल्दी ही वो दिन आयेगा , जब भारत मिट जायेगा ।
यदि हमको देश बचाना है तो इससे मुक्ति पाना है ;
वरना वो दिन दूर नहीं है , जब हमको मिट जाना है ।
चुनाव-प्रक्रिया से नहीं हटेगा, क्योंकि सिस्टम सब ध्वस्त है ;
ईवीएम तो पूरा हैक है , चुनाव – आयोग मदमस्त है ।
अब तो केवल सुप्रीम-कोर्ट ही , भारतवर्ष बचा सकता है ;
चुनाव-आयोग निष्पक्ष बनाकर , ईवीएम हटा सकता है ।
देशभक्त जितने अधिवक्ता , उनके कंधों पर जिम्मेदारी ;
लगातार कोशिश करनी है , करें देश की पहरेदारी ।
क्योंकि चौकीदार चोर है व हिंदू – जनता है अनजान ;
अमन-पसंद है हिंदू-जनता , संघर्ष बिना ही देती जान ।
जब चुप रहना कायरता हो तो उसे त्यागना ही बेहतर ;
मणि-शंकर अय्यर की भांति ही , सारे बोलो अब खुलकर ।
एक ही स्वर में अब सब बोलो , हिंदू ! अपनी-आंखें खोलो ;
विधि-सम्मत बस मार्ग यही है , लकवाग्रस्त-जुबान को खोलो ।
करो-मरो की बेला है ये , मरने से पहले कुछ करना है ;
सारी शक्ति झोंक दो अपनी , अच्छी-सरकार तभी मिलना है ।
“जय सनातन-धर्म”, रचनाकार : ब्रजेश सिंह सेंगर “विधिज्ञ”
