श्वेता पुरोहित । प्रत्येक हिंदू-घर में जो भी कार्य हम सर्वप्रथम आरम्भ करते हैं, वह गणेश जी का नाम लेकर ही करते हैं। इसलिये कि उसमें कोई विघ्न न आये और कार्य सफल हो जाय। चाहे हम गणेश जी की विधिवत् पूजा से अपना कार्य आरम्भ करें, चाहे पूजा न करके भी, गणेश जी का नाम-स्मरण ही कल्याणकारी है। व्यवसायी लोग अपने व्यवसायके आरम्भमें और माता-पिता अपने बालकों के विद्यारम्भ में गणेश जी का पूजन अवश्य करते हैं। व्यावसायिक बही-खातोंके या पुस्तकोंके प्रथम पृष्ठपर ‘श्री गणेशाय नमः’ यह मांगलिक वाक्य सर्वप्रथम अवश्य लिखा जाता है।
पार्वती-शिव-तनय सर्वाग्रपूज्य गणेश जी की इस गरिमा-का हेतु रामचरितमानस में संत तुलसीदास जी बताते हैं-‘महिमा जासु जान गनराऊ। प्रथम पूजिअत नाम प्रभाऊ ॥’
(मानस १। १८।२)
इसके विषय में कथानक इस प्रकार है। एक बार देवताओं में इस बात की होड़ लगी कि जो कोई देवता पृथ्वी की परिक्रमा सर्वप्रथम कर लेगा, वही आदिपूज्य होगा। सभी देवता उस दौड़में सम्मिलित हुए। उसमें श्रीगणेश भी थे; किंतु उनको कोई अभिमान नहीं था; वे जानते थे कि मेरे वाहन श्रीमूषकजी हैं, जिनकी चाल बहुत धीमी है; भला, इनके द्वारा पृथ्वीकी परिक्रमा कैसे हो सकेगी? लेकिन गणेश जी ‘राम-नाम ‘के प्रभावको जानते थे। ‘राम-नाम ‘के द्वारा कौन-सी सिद्धि प्राप्त नहीं हो सकती ?
उन्होंने तुरंत यह कार्य किया कि पृथ्वीपर ही राम नाम लिख दिया। ‘राम’ से सारा विश्व ही ओत-प्रोत है और उसी राम-नाम लिखी हुई पृथ्वीकी उन्होंने अपने मूषक सहित परिक्रमा कर दी। इस प्रकार उनके द्वारा पूरी पृथ्वी की परिक्रमा सम्पन्न हो गयी। इस रीति से देवताओं की परिक्रमा की होड़में वे सर्वप्रथम आ गये। बुद्धि से कौन-सा काम कठिन है? राम-नाम का प्रभाव और साथ-साथ उसमें बुद्धि का समावेश- इन दोनों के द्वारा श्री गणेश जी सर्वप्रथम पूज्य एवं वन्द्य हो गये।
राम-नाम स्वयं एक महामन्त्र है, जिसके जपनेसे कोई भी ऐसी सिद्धि नहीं है, जो प्राप्त नहीं हो सकती ? संत तुलसीदास राम-नामकी महत्ताको जानने और समझनेवाले थे। अपनी रचना रामायणमें जहाँ उन्होंने राम-नामकी महत्ताका वर्णन किया है, वहाँ स्पष्ट शब्दोंमें स्वीकार किया है कि ‘राम-नाम-जपका ही यह प्रभाव था, जिसके द्वारा श्रीगणेशजी समस्त देवता-समूहमें सर्वप्रथम पूजनीय हो गये।’
यही गणेशजीकी महिमा है, जिसके कारण हम सर्वप्रथम अपने सभी मंगल कार्योंमें ‘श्रीगणेशाय नमः’ बोलते और लिखते हैं तथा हमारे सभी मंगल-कार्योंमें प्रारम्भ करनेका पर्यायवाची शब्द ‘श्रीगणेशाय नमः’ बन गया है।
श्रीगणेश चतुर्थी की हार्दिक शुभकामनायें
