India Speak Daily Bureau. गुजरात दंगे के बाद नरेंद्र मोदी की छवि काफी गिर रही थी। उन्हें वैश्विक स्तर पर अल्पसंख्यक खासकर मुस्लिम विरोधी माना जाने लगा था। ऐसे में गांधीवादी लेखिका और प्रोफेसर मधु पूर्णिमा किश्वर आगे आईं और उन्होंने गुजरात दंगे पर शोध करने का निर्णय लिया। वो इसके लिए गुजरात गई, पीड़ितों से मिलीं, मुस्लिम नेताओं से मिली और गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी से भी मिलीं। नरेंद्र मोदी का उन्होंने लंबा वीडियो साक्षात्कार किया और हर उस आरोप पर उनसे जवाब मांगा, जो उन पर लगा था। यह पहली बार था कि नरेंद्र मोदी का पक्ष भी जनता में आया, अन्यथा उन पर वामपंथी मीडिया की ओर से तब तक एकतरफ रिपोर्टिंग ही हो रही थी।
मधु किश्वर ने अपने इस शोध को पहले ‘मोदीनामा’ नाम से एक बुकलेट के रूप में लिखा और फिर इसे ‘मोदी, मुस्लिम और मीडिया’ के रूप में विस्तारित करते हुए एक गंभीर पुस्तक (अंग्रेजी भाषा में) के रूप में प्रकाशित किया। मधु किश्वर का निष्कर्ष था कि “नरेंद्र मोदी मुस्लिम विरोधी नहीं, बल्कि हद से अधिक मुस्लिमपरस्त नेता हैं।” मधु जी ने इसे पूरे प्रमाण के साथ रखा और लिखा, जिस कारण काफी हद तक मोदी की मुस्लिम विरोधी छवि दूर हुई।
वही मधु किश्वर आजकल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर गंभीर आरोप लगाकर उन्हें और उनके समर्थकों को असहज कर रही हैं! पहले एक्सपोजर में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चरित्र पर महिलाओं को लेकर गंभीर आरोप लगाए थे। इसे लेकर कई दिनों तक सोशल मीडिया पर भयंकर बवाल मचा था। मधु जी के उस एक्स पोस्ट पर लाखों लोगों ने इसे पढ़ा था। सभी सोशल प्लेटफार्म पर या तो मधु जी के लगाए आरोप के पक्ष में या फिर विपक्ष में चर्चा चल रही थी।
मधु जी ने भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी के एक आरोप वाले वीडियो पर हां में हां मिलाते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चरित्र को संदिग्ध बताया था। हालांकि इस बारे में भाजपा या मोदी सरकार की ओर से अभी तक कोई जवाब सामने नहीं आया है।
इसके कुछ दिन बाद ही अप्रैल 2026 की शुरुआत होते ही, मधु किश्वर ने एक और धमाका करते हुए अपने उस आरोप को बल प्रदान किया और यह लिखा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी कांग्रेस के हाथों ‘कांप्रोमाइज’ हैं। उन्होंने इस पर एक लंबा-चौड़ा एक्स पोस्ट लिखा है।
मधु किश्वर ने अंग्रेजी में एक्स पोस्ट किया, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया है कि “मोदी बहुत बुरी तरह से फंसे हुए हैं, इसलिए वह निर्णय नहीं ले पा रहे हैं।” मधु किश्वर के अनुसार, “यह चौंकाने वाली जानकारी मुझे किसी ऐसे व्यक्ति से मिली है, जिसके पास PM के बारे में अंदर की बहुत सारी जानकारियां हैं।” मधु का कहना है कि “मेरे इस जानकारी के बुनियादी तथ्यों की जाँच कोई भी कर सकता है, जिसे Google पर सर्च करना आता हो।”
मधु के अनुसार, “जिस दिन मोदी जी ने PM का पदभार संभाला, उनके पास पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के समय कैबिनेट सेक्रेटरी रहे श्री अजीत कुमार सेठ एक मोटी-सी फ़ाइल लेकर ‘महामानव’ से मिलने आए थे। मधु के अनुसार अजीत सेठ वर्ष 2011 से पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के कैबिनेट सेक्रेटरी थे। मधु यहां ‘महामानव’ मोदी जी के लिए प्रयुक्त कर रही हैं!
मधु किश्वर के अनुसार, “अजीत सेठ ने मोदी को फाईल थमाते हुए कहा, “डॉ. साहब (मनमोहन सिंह) ने सुझाव दिया है कि आप इस फ़ाइल को ध्यान से देखें।”
मधु आगे लिखती हैं, “महामानव ने फ़ाइल ली और जैसे ही उसके पन्ने पलटे, उनका चेहरा पीला पड़ गया, क्योंकि उस फ़ाइल में उनके बारे में बहुत सारी ऐसी बातें थीं, जिनसे वे मुश्किल में पड़ सकते थे। मोदी घबराए हुए दिखे और उन्होंने सेठ से पूछा, “यह फ़ाइल आप तक कैसे पहुँची?” सेठ ने शांत भाव से जवाब दिया, “PMO में कैबिनेट सेक्रेटरी होने के नाते, सभी ज़रूरी फाइलें मेरे पास ही आती हैं।” मोदी जी ने विनम्रता से फाइल वापस कर दी। मोदी को अजीत सेठ का इशारा अच्छी तरह समझ में आ गया था!”
मधु किश्वर आरोप लगाती हैं कि “अजित कुमार सेठ को प्रधानमंत्री मोदी ने सेवा विस्तार दिया और उन्हें अपना कैबिनेट सेक्रेटरी नियुक्त किया!” वह आगे लिखती हैं, “इसका मतलब है कि डॉ. मनमोहन सिंह और कांग्रेस नेता सोनिया गांधी की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के PMO कार्यालय और उनके सभी कार्यों तक सीधी पहुंच हो गई थी!”
मधु के अनुसार, “मोदी जी ने 2014 में अजीत सेठ को सेवा विस्तार दिया और वे जून 2015 तक इस पद पर रहे।” मधु सवाल उठाती हैं कि “क्या आपने दुनिया में कहीं भी किसी ऐसे प्रधानमंत्री के बारे में सुना है, जिसने अपने कट्टर दुश्मन के सबसे भरोसेमंद वरिष्ठ अधिकारी को अपने ही PMO का प्रमुख नियुक्त किया हो?”
मधु आगे लिखती हैं, “सेवानिवृत्त होने के बाद, सेठ को एक और ईनाम दिया गया। उन्हें सार्वजनिक उद्यम चयन बोर्ड (PESB) का अध्यक्ष नियुक्त किया गया।”
वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर गंभीर आरोप लगाते हुए लिखती हैं, “इससे शायद यह बात समझ में आ जाए कि तमाम शोर-शराबे के बावजूद, ’56 इंचीय महामानव’ ने सोनिया जी, रॉबर्ट वाड्रा, चिदंबरम और अन्य लोगों के खिलाफ कोई कार्रवाई करने की हिम्मत क्यों नहीं की, जिन पर उन्होंने विदेशों में विदेशी खाते रखने और न जाने क्या-क्या आरोप लगाए थे?”
वह लिखती हैं, “ऐसा नहीं है कि सिर्फ सोनिया जी को ही इस ‘महामानव’ के काले कारनामों की जानकारी है, बल्कि भारत और विदेश, दोनों जगहों पर ऐसे और भी बहुत से लोग हैं, जिन्हें मोदी के कार्य की पूरी जानकारी है।” वह आरोप लगाती हैं कि “यही कारण है कि मोदी जी भारत के सबसे ‘असुरक्षित’ राजनेताओं में से एक हैं और इसीलिए वे भद्दी डींगें हाँकते हैं और शेखी बघारते हैं’!
“भारत और पूरी दुनिया में भ्रष्ट राजनेताओं की कोई कमी नहीं है। लेकिन कोई भी राजनेता खुद को एक संत-पुरुष के रूप में पेश करने के लिए उतना बेताब नहीं रहा, जितना कि भारत के ‘एकमात्र 56 इंचीय’ राजनेता हैं। इसीलिए जनता को संबोधित करते समय उनकी आवाज़ में हमेशा एक अजीब सी घबराहट (hysteria) होती है और वे एक निस्वार्थ ‘महात्मा’ होने का ढोंग करते हैं!”
मधु किश्वर के अनुसार, “रिकॉर्ड के लिए बता दूँ कि जब मोदी जी ने 2014 के चुनावी अभियान के दौरान पहली बार “56 इंच की छाती” होने का दावा किया था, तो मैंने व्यक्तिगत रूप से उनसे कहा था, “नरेंद्र भाई, ऐसा मत करो। यह भद्दा लगता है।” उनका जवाब था, “आम जनता को यह बहुत पसंद आता है, मधु जी। आप जैसे बुद्धिजीवी ही परिष्कृत भाषणों की उम्मीद करते हैं!”
मोदी के वो समर्थक जो अभद्र और अपशब्दों का प्रयोग हर सवाल उठाने वाले पर करते हैं, उन पर कटाक्ष करते हुए मधु किश्वर लिखती हैं, “मोदी जी के भाड़े के चमचों, अब अपने ‘हृदय सम्राट’ से जाकर पूछो कि उन्होंने डॉ. मनमोहन सिंह के कैबिनेट सेक्रेटरी को अपने ही PMO का सबसे शीर्ष अधिकारी क्यों नियुक्त किया था? तुम अपने झूठ और अश्लील आरोपों से मुझे जितना ज़्यादा उकसाओगे, उतनी ही ज़्यादा गंदगी हर तरफ़ से बाहर आएगी और तुम्हारे ‘हृदय सम्राट’ का पर्दाफ़ाश कर देगी!”
वहीं मधु किश्वर के कथन का समर्थन करते हुए CBI के पूर्व निदेशक एम.नागेश्वर राव ने लिखा, “मधु जी, मैं आपकी पोस्ट में कुछ और जोड़ना चाहूँगा। UPA के शासनकाल के दौरान, जब नरेंद्र मोदी के लिए हालात बेहद तनावपूर्ण थे और ऐसी ज़ोरदार चर्चाएं थीं कि उन्हें किसी भी दिन गिरफ़्तार किया जा सकता है, तब BJP के एक वरिष्ठ नेता ने मुझे बताया था कि मोदी को गिरफ़्तारी से बचाने और उसके चलते गुजरात के मुख्यमंत्री पद से हटने से रोकने में शरद पवार ने अहम भूमिका निभाई थी।”
नागेश्वर राव आगे लिखते हैं, “शिवसेना नेता संजय राउत ने भी अपनी किताब में यही बात बताई है। इसमें कोई हैरानी की बात नहीं है कि मोदी ने 2017 में शरद पवार को ‘पद्म विभूषण’ से सम्मानित करके इस एहसान का बदला चुकाया है।”
सीबीआई के पूर्व निदेशक एम.नागेश्वर राव द्वारा शरद पवार और मोदी के रिश्ते का रहस्योद्घाटन करने पर मधु किश्वर ने ट्वीट कर उनका धन्यवाद किया और लिखा, “इस पुष्टि के लिए धन्यवाद। मैं खुद ही यह जानकारी साझा करने वाली थी, लेकिन बेहतर यही हुआ कि यह जानकारी आपकी तरफ से आई।
मोदी ने न केवल शरद पवार, जिन पर दाऊद इब्राहिम का ‘गॉडफ़ादर’ होने का आरोप है, को ‘पद्म विभूषण’ देकर उनका एहसान चुकाया, बल्कि जब मोदी बारामती गए, तो उन्होंने सार्वजनिक रूप से पवार के पैर छुए और उन्हें अपना ‘गुरु’ भी कहा! हम सभी इस ‘गुरु-चेला’ वाले प्रेम-प्रसंग को देखकर हैरान रह गए थे, और इसका असली कारण हमें बाद में पता चला!”

नागेश्वरराव जी का कथन और भी महत्वपूर्ण है।
पर राजनीति में ऐसा क्यों होता है कि कांग्रेस के लिए तब जो व्यक्ति बड़ा खतरा था उसे ही कांग्रेस ने छोड़ रखा था, या यहां कांग्रेस नेताओं का अनुमान गलत निकला कि मोदी के नेतृत्व में भाजपा बहुमत नहीं पा पाएगी।