सुप्रीम-कोर्ट में घेरा डालो
सुप्रीम-कोर्ट में घेरा डालो , न्याय संरक्षित करना है ;
भारत का असली-भाग्यविधाता, “जेन-जी” को ही होना है ।
शासन-सत्ता की सभी गड़बड़ी , सुप्रीम-कोर्ट के कारण है ;
दोषी को दंड नहीं मिलता है , भ्रष्टाचार ही कारण है ।
सुप्रीम-कोर्ट यदि न सुधरा तो , पूरा-देश बिगड़ जायेगा ;
अंतिम-हद तक बिगड़ चुका है, इसी तरह से मिट जायेगा ।
यदि मिटने से बचना है तो , आगे बढ़कर लड़ना होगा ;
कोई भी चुप नहीं बैठना, सबको आंदोलन करना होगा ।
रास्ता-रोको , चक्का-जाम हो , जेल-भरो आन्दोलन हो ;
सविनय-अवज्ञा आन्दोलन हो , असहयोग-आन्दोलन हो ।
अंग्रेजों से भी बर्बर-सत्ता , उनसे भी नीचे गिरी हुयी है ;
विश्व में सबसे-अधिक गिरी है , गंदे-पापों से सनी हुयी है ।
पता नहीं क्यों मूर्ख है जनता ? कैसी सरकारें चुनती है ?
छल ,कपट ,धोखा ,मक्कारी , इनके-जाल में फंसती है ।
सहनशील भारत की जनता , अत्याचार को सहती रहती ;
पर अब सारी-सीमा टूटी, आखिर कब तक जनता सहती ?
पेपर – लीक बेचकर नेता , अपनी मौत बुला बैठा ;
जले में नमक वोट की चोरी , मंदिर में लूट करा बैठा ।
हलक में अब ये तीनों अटकी , जीवन लेकर जायेंगी ;
“जेन-जी” की विजय-यात्रा , अंतिम-मुकाम को पायेगी ।
चरित्रहीन-गद्दार जो नेता , जितने अफसर हैं सहयोगी ;
सभी धूल को चाटने वाले, बहुत-बुरी गति इनकी होगी ।
सभी-कुकर्मों की सजा मिलेगी, सजा-अधिकतम ही होगी ;
ताकि मिसाल हो ऐसी कायम, आगे हिम्मत कभी न होगी ।
सारे पापी-नेता व अफसर , सारे सहयोगी न्यायाधीश ;
यदि गुनाह से तौबा कर लें , जनता के कदमों में रखें शीश ।
रिश्वत व लूट का जो भी धन है, स्वेच्छा से वापस कर दें ;
जो भी विदेश में धन भेजा है , उसको भी लाकर दे दें ।
इकबाले-जुर्म सबको करना है,कदमों में नाक रगड़ना होगा;
मृत्यु-दंड से बच जायेंगे , केवल जेल भुगतना होगा ।
सबको प्रायश्चित करना होगा, करनी का फल भोगना होगा ;
वरना वो दिन दूर नहीं है , बुरी-मौत ही मरना होगा ।
लोकतंत्र के जो हत्यारे , न्याय की हत्या करने वाले ;
मानवता के ये अपराधी, अब किसी तरह न बचने वाले ।
“जेन-जी” अब नहीं थमेगा , सेना को भी आना होगा ;
भारत को न मिटने देंगे , चाहे जो भी करना होगा ।
“इंकलाब-जिंदाबाद” , ब्रजेश सिंह सेंगर
