एटम-बम जानो “जेन-जी” को
सुप्रीम-कोर्ट अब आंखें खोलो , न्याय-मार्ग को करो प्रशस्त ;
अब्बासी-हिंदू भारत का नेता, कर रहा देश का सूरज अस्त ।
सुप्रीम-कोर्ट भी देश का हिस्सा , संग-संग जीता मरता है ;
जब भारत ही नहीं बचेगा , तब भला तू कैसे बच सकता है ?
हम सब भारत के वासी हैं , सबको मिलकर ही रहना है ;
अलग-अलग जिम्मेदारी है , हर-स्थिति में पूरी करना है ।
सुप्रीम-कोर्ट की जिम्मेदारी , न्याय सदा जीवित रखना ;
फिर क्यों फेल हो गये इसमें,चुपचाप देखते न्याय का मिटना ।
वोटो की चोरी – टैक्स डकैती , टोल – टैक्स की लूट है ;
भ्रष्टाचार आ गया गले तक , हो रही देश की टूट है ।
निर्दयता पुलिस की बढ़ती जाती, कर्तव्यों को छोड़ दिया है ;
सरकारी-छूट इन्हें रिश्वत की , सत्यनिष्ठा को तोड़ दिया है ।
नेता-अपराधी-पुलिस का अंतर , जरा भी नहीं बच पाया है ;
नब्बे-प्रतिशत खूंख्वार-भेड़िये , ऐसा बुरा समय आया है ।
नेता-अफसर-पुलिस व्यवस्था , कानून-व्यवस्था की हत्यारी ;
मुट्ठी-भर ही शेष बचे हैं , जिनको भारत-माता प्यारी ।
रिश्वत लेना देशद्रोह है , कायर – कमजोर – नपुंसक देते ;
भ्रष्टाचारी इन सबसे बढ़कर , देशद्रोह ही करते रहते ।
भ्रष्टाचार भी देशद्रोह है , इसकी सजा मौत की हो ;
पर ऐसे न्यायाधीश कहां है,जो जस्टिस-लोया की तरह से हों ।
हमें चाहिये “जस्टिस-लोया” भारत में तब ही न्याय बचेगा ;
न्याय बचेगा – देश बचेगा , वरना गृह-युद्ध भयंकर होगा ।
अब्बासी-हिंदू भारत का नेता , ये बहुत शीघ्र करवा देगा ;
देश का सबसे-बड़ा शत्रु है , भारत में आग लगा देगा ।
“जेन-जी” अब आक्रोशित हैं , उनको ज्यादा मत भड़काओ ;
सुप्रीम-कोर्ट तक नहीं बचेगा,अब फौरन हरकत में आ जाओ ।
न्याय की रक्षा करनी ही होगी , अब तो ये मजबूरी है ;
वरना सब-कुछ मिट सकता है, अब नहीं बची कोई दूरी है ।
आग चौखट तक पहुंच चुकी है, सुप्रीम-कोर्ट अब निद्रा छोड़ो ;
भ्रष्टाचार की आग बुझाओ, सारा लिहाज नेता का छोड़ो ।
डूबता हुआ जहाज ये नेता,अब दुश्मन-देश भी न बचा सकेंगे ;
चीन ,पाक, अमरीका मिलकर भी , इसको नहीं बचा पायेंगे ।
एटम-बम मानो “जेन-जी” को, इसको फटने से फौरन रोको ;
अभी समय है न्याय बचाओ , बेईमानों को बाहर फेंको ।
अब्बासी-हिंदू भारत का नेता , चोरों का सरदार है ;
गैंग सहित ये जेल में जाये , करना निर्णय ये असरदार है ।
“जय सनातन-धर्म”,ब्रजेश सिंह सेंगर “विधिज्ञ”
